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टैक्स फ्री बांड: सेफ रिटर्न के लिए बढ़ा आकर्षण, लेकिन निवेश के पहले इन 2 बातों पर जरूर दें ध्यान

सुरक्षित रिटर्न के लिए टैक्स फ्री बांड का आकर्षण बढ़ा है. इन बांड को सरकार द्वारा किसी खास उद्देश्य से जारी किया जाता है.

April 28, 2020 8:38 AM
Tax Free Bonds, who should invest in tax free bonds, you should know every thing before investment in tax free bonds, government sovereign guarantee, safe return, franklin templeton crisis, FD rates low, repo rateसुरक्षित रिटर्न के लिए टैक्स फ्री बांड का आकर्षण बढ़ा है. इन बांड को सरकार द्वारा किसी खास उद्देश्य से जारी किया जाता है.

Should You Invest in tax Free Bonds: रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में लगातार कटौती के बाद बैंकों ने अपनी जमा दरों को भी कम किया है. वहीं स्माल सेविंग्स पर भी ब्याज दरें सरकार ने घटा दी हैं. फ्रैंकलिन टेम्पलटन क्राइसिस के बाद से डेट फंड को लेकर भी निवेशक सतर्क हो गए हैं. ऐसे में सुरक्षित रिटर्न के लिए टैक्स फ्री बांड का आकर्षण बढ़ा है. इन बांड को सरकार द्वारा किसी खास उद्देश्य से जारी किया जाता है, और इन पर एफडी के बराबर या इससे कुछ ज्यादा ब्याज आफर होता है. स्कीम की खासियत है कि इस पर सरकार की सॉवरेन गारंटी होती है, वहीं ब्याज पर टैक्स भी फ्री होता है. अब सवाल उठता है कि क्या रिटेल इन्वेस्टर्स को अभी टैक्स फ्री बांड का रुख करना चाहिए.

एक्सपर्ट का कहना है कि टैक्स फ्री बांड सुरक्षा के लिहाज से निवेश का अभी बेहतर विकल्प है. लेकिन यहां 2 इश्यू हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है. एक तो इनमें ट्रेड करने वालों की संख्या बहुत कम होती है तो ऐसे में अगर नॉन डीमैट फॉर्मेट में निवेश है तो पैसा मेच्योरिटी तक फंस सकता है. दूसरा इनकी यील्ड कम है, जिस पर निवेशकों को ध्यान देना चाहिए. वहीं सिर्फ टैक्स बचाने के लिए इन बांड में निवेश करने की सोच रहे हैं तो यह फैसला बेहतर नहीं है. यह सिर्फ उन्हीं के लिए ठीक है जो 20 फीसदी से ज्यादा वाले टैक्स ब्रैकेट में आते हों.

स्कीम के साथ क्या है फायदा

फॉर्चून फिस्कल के डायरेक्टर जगदीश ठक्कर का कहना है कि टैक्स फ्री बांड का फायदा यह है कि इनकी पेपर क्वालिटी और रेटिंग दूसरे बांड के मुकाबले बेहतर होती है. वहीं, मेच्योरिटी पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स नहीं देना होता है. वहीं ये बांड सरकार की ओर से किसी खास उद्देश्य के लिए जारी किए जाते हैं, इसलिए इन पर सरकार की सॉवरेन गारंटी होती है. इन पर स्थिर लेकिन सुरक्षित रिटर्न मिलता है. ज्यादातर बांड की मेच्योरिटी 10 साल या 15 साल की होती है. ऐसे में यह उन्हीं टैक्स पेयर्स के लिए बेहतर है, जो 30 फीसदी के ब्रैकेट में आते हों.

ध्यान रखने वाली बात यह है कि निवेशकों को अपने अलोकेशन का 5 से 10 फीसदी से ज्यादा यहां नहीं लगाना चाहिए. उनका कहना है कि टैक्स फ्री बांड लांग टर्म के लिए होते हैं और सरकार की ओर से जारी किए जाते हैं, लेकिन इन्हें निवेशक सब्सक्राइबर्स से एक्सचेंज के जरिए भी खरीद सकते हैं.

ये कंपनियां जारी करती हैं बांड

इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (IIFCL), नेशनल हाईवे अथॉरिटी आफ इंडिया (NHAI), हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (HUDCO), इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (IRFC), पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (PFC), NTPC, REC, NABARD और पीएफसी जैसी कंपनियां टैक्स फ्री बांड जारी करती हैं. इन पर अभी ब्याल 7 फीसदी से 9 फीसदी तक आफर किए गए हैं.

लिक्विडिटी और यील्ड पर जरूर ध्यान दें

BPN फिनकैप कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर एके निगम का कहना है कि टैक्स फ्री बांड सिर्फ उन्हीं के लिए बेहतर है जो इलिक्विड पैसा निवेश करना चाहते हें. इन बांड में खरीदने और बेचने वाले ट्रेडर्स बहुत कम होते हैं, इसलिए जरूरत पर इन्हें भुनाना मुश्किल होता है. इसलिए अगर नॉन डीमैट फॉर्मेट से आपने इनमें निवेश किया है तो पैसा मेच्योरिटी तक यानी 10, 15 या 20 साल तक फंस सकता है. वहीं, यह सिर्फ टैक्स बचाने के लिए ठीक विकल्प नहीं है. सिर्फ उन टैक्सपेयर्स को यहां आना चाहिए जो 20 फीसदी या ज्यादा के टैक्स ब्रैकेट में आते हों.

दूसरा निवेश के पहले बांड का यील्ड रेट जरूर देख लेना चाहिए. सिर्फ कूपन रेट देखकर निवेश करना चाहिए. ज्यादातर बांड पर यील्ड प्राइस की दर कूपन रेट से कम है. इससे यह पता चलता है कि मेच्योरिटी तक होल्ड करने पर आपको कुल कितना रिटर्न मिल रहा है.

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