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सुप्रीम कोर्ट ने मालविंदर, शिविंदर सिंह को अवमानना का दोषी पाया, जापानी फर्म को नहीं किया था भुगतान

सुप्रीम कोर्ट ने रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर्स मालविंदर सिंह और शिंविंदर सिंह को शुक्रवार को न्यायालय की अवमानना का दोषी ठहराया.

November 15, 2019 1:52 PM
मालविंदर और शिविंदर सिंह

सुप्रीम कोर्ट ने रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर्स मालविंदर सिंह और शिंविंदर सिंह को शुक्रवार को न्यायालय की अवमानना का दोषी ठहराया. इन दोनों ने फोर्टिस हेल्थकेयर में अपने शेयर नहीं बेचने के शीर्ष अदालत के आदेश का उल्लंघन किया है. शीर्ष अदालत ने इससे पहले सिंह बंधुओं से उनकी योजना के बारे में पूछा था कि वे जापान की औषधि निर्माता कंपनी दायची सैंक्यो को 3,500 करोड़ रुपये का भुगतान कैसे करेंगे. सिंगापुर के एक ट्रिब्यूनल ने सिंह बंधुओं को दाइची सैंक्यो को चार हजार करोड़ रुपये का भुगतान करने का फैसला सुनाया था.

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि रैनबैक्सी के पूर्व प्रवर्तक न्यायालय की अवमानना के दोषी हैं. पीठ ने कहा कि सिंह बंधुओं ने उसके पहले के उस आदेश का उल्लंघन किया है जिसमें उन्हें फोर्टिस समूह के अपने नियंत्रण वाले शेयरों की बिक्री मलेशियाई कंपनी आईएचएच हेल्थकेयर को नहीं करने के लिए कहा गया था.

जापानी फर्म ने दायर की थी याचिका

न्यायालय ने कहा कि वे सजा के सवाल पर सिंह बंधुओं को बाद में सुनेंगे. जापानी फर्म ने सिंह बंधुओं के खिलाफ न्यायालय की अवमानना याचिका दायर की थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि उनके पक्ष में दिया गया आर्बिटल का फैसला मुश्किल में पड़ गया है क्योंकि सिंह बंधुओं ने फोर्टिस समूह में अपने नियंत्रण वाले अपने शेयर मलेशिया की कंपनी को बेच दिये हैं.

फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर मा​लविंदर सिंह और सुनील गोधवानी ED की गिरफ्त में, मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में कड़ा कदम

ED ने मालविंदर सिंह को किया गिरफ्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रेलीगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड (RFL) के कोष में हेरफेर करने के आरोप में गुरुवार को फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रवर्तक मा​लविंदर सिंह और रेलीगेयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड के मुख्य प्रबंध निदेशक (सीएमडी) सुनील गोधवानी को गिरफ्तार किया था. मामले से जुड़े वकील ने बताया कि ईडी ने तिहाड़ जेल में ही दोनों को अपनी हिरासत में लिया. दिल्ली पुलिस ने कथित घोटाले में मामला दर्ज कर दोनों गिरफ्तार किया था.

अक्टूबर में पुलिस ने मा​लविंदर सिंह और सुनील गोधवानी दोनों का REL और उसकी दोनों सब्सिडरी पर पूरा कंट्रोल होने की बात कही थी. पुलिस ने आरोप लगाया था कि उन्होंने RFLको बुरी वित्तीय हालत में डाला. उन्होंने ऐसी कंपनियों को लोन बांटे जिन पर उनका कंट्रोल था और वह वित्तीय तौर पर बुरी हालत में थीं. पुलिस के मुताबिक, जिन कंपनियों को लोन दिए गए, उन्होंने रिपेमेंट में जानबूझकर डिफॉल्ट किया जिससे RFL को करीब 2,937 करोड़ का नुकसान हुआ.

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