RBI Report: FY22 में 12.5% हो सकता है सरकारी बैंकों का NPA, लेकिन पूंजी की कमी नहीं होगी

RBI के मुताबिक महामारी का बिजनेस पर असर मॉडरेट रहा तो सरकारी बैंकों का एनपीए 13.06% और गंभीर असर पड़ने पर 13.95% तक हो सकता है. हालांकि इन चिंताजनक आंकड़ों के बावजूद RBI के मुताबिक बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी है.

Stress report Loan loss ratios could rise but banks have enough capital says RBI
केंद्रीय बैंक द्वारा हर दो साल पर पब्लिश होने वाली वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में गवर्नर शक्तिकांत दास ने लिखा है कि कोरोना की दूसरी लहर से कारोबार पर गंभीर असर पड़ा है

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमान के मुताबिक अगले साल मार्च 2022 तक सरकारी बैंकों में बैड लोन का अनुपात 12.54 फीसदी तक पहुंच सकता है, जो मार्च 2021 में खत्म हुए साल में 9.54 फीसदी था. इतना ही नहीं, अगर बिजनेस पर महामारी का असर ज्यादा गंभीर रहा तो सरकारी बैंकों के एनपीए और बढ़ भी सकते हैं.

हालांकि आरबीआई के मुताबिक सरकारी बैंकों के मामले में स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है. रिजर्व बैंक के मुताबिक कोरोना महामारी के बावजूद अच्छी बात यह है कि बैंकों के पास पर्याप्त मात्रा में पूंजी है और प्रॉविजन कवरेज रेशियो अधिक है. आरबीआई का अनुमान है कि स्थिति कितनी भी बदतर हो जाए लेकिन कैपिटल एडिक्वेसी में गिरावट कम रहेगी और सभी 46 बैंकों का एडिक्वेसी रेशियो न्यूनतम 9 फीसदी के निर्धारित स्तर से अधिक ही रहेगा.

महामारी का असर ज्यादा रहा तो 11.22% तक जा सकता है कुल एनपीए

केंद्रीय बैंक द्वारा हर दो साल पर पब्लिश होने वाली वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में गवर्नर शक्तिकांत दास ने लिखा है कि कोरोना की दूसरी लहर से कारोबार पर गंभीर असर पड़ा है. रिजर्व बैंक के मुताबिक कोरोना महामारी की बिजनेस पर जो मार पड़ी है, उसका असर सभी बैंकों पर दिखाई देगा.

आरबीआई का अनुमान है कि मार्च 2022 तक सरकारी और निजी सभी बैंकों के ग्रास नॉन परफॉर्मिंग एसेट (NPA) में भारी बढ़ोतरी होने की आशंका है. अगर महामारी का असर सामान्य रहा तो NPA 9.8 फीसदी रहेंगे. लेकिन अगर महामारी का असर मॉडरेट यानी हल्का रहा, तो NPA 10.36 फीसदी और कोरोना का असर ज्यादा गंभीर रहने पर ये बढ़कर 11.22 फीसदी तक जा सकते हैं.

सरकारी बैंकों की स्थिति तो और भी खराब हो सकती है. मॉडरेट असर के मामले में उनका एनपीए बढ़कर 13.06 फीसदी हो सकता है, जबकि गंभीर असर के मामले में यह 13.95 फीसदी तक जा सकता है. हालांकि इन चिंताजनक आंकड़ों के मुताबिक आरबीआई ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी प्रकार के दबाव से निपटने के लिए बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी है.

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मई के अंत से आर्थिक गतिविधियों में सुधार शुरू

कोरोना के चलते लगाए गए लॉकडाउन/कर्फ्यू से जिन सेक्टर्स को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है, उनमें रिटेल ट्रेड, ट्रैवल, हॉस्पिटैलिटी, एविएशन और एमएसएमईज हैं. केंद्र सरकार द्वारा एमएसएमईज के लिए लाई गई क्रेडिट गारंटी स्कीम्स को हेल्थकेयर सेक्टर के लिए भी शुरू किया गया है जिससे कारोबार को बचाने में मदद मिलेगी और डिफॉल्ट होने की आशंका कम होगी. दास के मुताबिक कोरोना महामारी की दूसरी लहर से देश पर गंभीर असर पड़ा है लेकिन मई के आखिरी से आर्थिक गतिविधियों में सुधार शुरू हो चुका है.

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