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Nifty 50 ETF: कम लागत में दमदार रिटर्न, 5 साल में पैसे हुए डबल; वोलेटाइल मार्केट में चुनें सेफ विकल्प

Stock Vs ETF: Nifty 50 ETF आपके लिए सीधे इक्विटी में पैसा लगाने की बजाए निवेश का सुरक्षित म्यूचुअल फंड का सेफ विकल्प हो सकता है.

Updated: May 11, 2021 11:55 AM
Stock Vs ETFStock Vs ETF: Nifty 50 ETF आपके लिए सीधे इक्विटी में पैसा लगाने की बजाए निवेश का सुरक्षित म्यूचुअल फंड का सेफ विकल्प हो सकता है.

Nifty 50 ETF: कोरोना वायरस महामारी के चलते शेयर बाजार में बीते 3 महीने से उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है. इस साल फरवरी में बाजार अपने रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था. जिसके बाद से बाजार में करेक्शन आया है. हालांकि वैक्सीनेशन तेज होने के बीच बाजार एक बार फिर 15000 के स्तर की ओर बढ़ रहा है. एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाले कुछ दिनों में निफ्टी एक बार फिर 15000 का स्तर ब्रेक कर देगा. फिलहाल बाजार का वैल्यूएशन अभी भी हाई है. मिडकैप और स्मालकैप शेयरों में भी तेजी देखने को मिली है. एक ओर बाजार का हाई वैल्युएशन और दूसरी ओर कोरोना के बढ़ रहे मामले कनफ्यूजन और बढ़ा रहे हैं. इस स्थिति में एक्सपर्ट रिस्क फ्री निवेश की सलाह दे रहे हैं. अगर आप भी किसी ऐसे ही विकल्प की तलाश में हैं तो Nifty 50 ETF आपके लिए म्यूचुअल फंड का सेफ विकल्प हो सकता है.

क्या है ETF

ईटीएफ म्यूचुअल फंड जैसे होते हैं. लेकिन, दोनों में बड़ा अंतर यह है कि ईटीएफ को केवल स्टॉक एक्सचेंज से खरीदा या बेचा जा सकता है. जिस तरह आप शेयरों को खरीदते हैं. ठीक वैसे ही आप एक्सचेंज के कारोबारी घंटों के दौरान ईटीएफ को खरीद सकते हैं. ईटीएफ के पोर्टफोलियो में तमाम तरह की प्रतिभूतियां होती हैं. इनका रिटर्न इंडेक्स जैसा होता है. ये शेयर बाजार पर लिस्ट होते हैं. वहां इन्हें खरीदा और बेचा जा सकता है.

क्यों है ईटीएफ बेहतर विकल्प

एक्सपर्ट का मानना है कि कंजर्वेटिव निवेशकों के लिए अभी ईटीएफ में निवेश बेहतर विकल्प हो सकता है. ये अमूमन एक खास इंडेक्स को ट्रैक करते हैं. यह इंडेक्स का ही रेप्लिका होता है. इंडेक्स में जितनी तेजी आएगी, अमूमन इन्हें भी ग्रोथ का उतना फायदा मिल सकता है. यह इंडेक्स में शामिल शेयरों में निवेश करता है, जिसका मतलब है कि आपका पोर्टफोलियो खुद ही डाइवर्सिफाई हो जाता है.

एक्सपेंस रेश्यो बेहद कम

Nifty 50 ETF की खासियत है कि इस सेग्मेंट में स्कीम में शामिल स्कीम का एक्सपेंस रेश्यो बेहद कम है. एक्सपेंस रेश्यों कम होने का मतलब है कि आपके निवेश की लागत यहां कम हो जाएगी. एक्सपेंस रेश्यो का मतलब है कि किसी फंड में निवेश के बाद अपने पैसे को मैनेज करने के लिए आप फंड हाउस को हर साल कितना पेमेंट करते हैं.

एक्सपेंस रेश्यो कम या ज्यादा होने का मतलब आप ऐसे समझ सकते हैं कि मान लिया आपने किसी फंड में 10 हजार रुपये निवेश किया और फंड का एक्सपेंस रेश्यो 1.5 फीसदी है. ऐसे में आपको फंड हाउस को एक्सपेंस रेश्यो के रूप में 150 रुपये एक साल में भुगतान करना होगा. दूसरे तरह से देखा जाए तो मान लीजिए कि आपने उस फंड में 10 फीसदी सालाना रिटर्न हासिल किया है तोक आपका वास्तविक रिटर्न 8.5 फीसदी रह जाएगा.

टॉप रिटर्न देने वाली स्कीम

SBI ETF निफ्टी 50

एक्सपेंस रेश्यो: 0.07 फीसदी
एसेट: 92966 करोड़
6 महीने का रिटर्न: 18.61 फीसदी
1 साल का रिटर्न: 62.51 फीसदी
5 साल का रिटर्न: 14.95 फीसदी
5 साल में 1 लाख की वैल्यू: 2 लाख

UTI निफ्टी ETF

एक्सपेंस रेश्यो: 0.07 फीसदी
एसेट: 23841 करोड़
6 महीने का रिटर्न: 18.61 फीसदी
1 साल का रिटर्न: 62.51 फीसदी
5 साल का रिटर्न: 14.96 फीसदी
5 साल में 1 लाख की वैल्यू: 2 लाख

कोटक निफ्टी ETF

एक्सपेंस रेश्यो: 0.12 फीसदी
एसेट: 1186 करोड़
6 महीने का रिटर्न: 18.56 फीसदी
1 साल का रिटर्न: 62.36 फीसदी
5 साल का रिटर्न: 14.84 फीसदी
5 साल में 1 लाख की वैल्यू: 2 लाख

HDFC निफ्टी 50 ETF

एक्सपेंस रेश्यो: 0.05 फीसदी
एसेट: 897 करोड़
6 महीने का रिटर्न: 18.62 फीसदी
1 साल का रिटर्न: 62.49 फीसदी
5 साल का रिटर्न: 14.92 फीसदी
5 साल में 1 लाख की वैल्यू: 2 लाख

ICICI प्रू निफ्टी नेक्स्ट 50 ETF

एक्सपेंस रेश्यो: 0.39 फीसदी
एसेट: 1101 करोड़
6 महीने का रिटर्न: 26.66 फीसदी
1 साल का रिटर्न: 57.12 फीसदी
5 साल का रिटर्न: 13.85 फीसदी
5 साल में 1 लाख की वैल्यू: 1.92 लाख

(सोर्स: वैल्यू रिसर्च)

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