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Share Buyback: शेयर बायबैक पर है उलझन? निवेशक याद रखें ये टिप्स

जिन कंपनियों के पास अधिक कैश सरप्लस होता है वे शेयर बायबैक का फैसला करती हैं.

October 28, 2020 3:36 PM
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जिन कंपनियों के पास अधिक कैश सरप्लस होता है वे शेयर बायबैक का फैसला करती हैं. आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों जैसे TCS ने अभी हाल ही में 16 हजार करोड़ और Wipro ने 9500 करोड़ के शेयर बायबैक का ऐलान किया था. इससे पहले 2018 में भी टीसीएस ने 16 हजार करोड़ के शेयर बायबैक का एलान किया था. शेयर बायबैक के तहत कंपनी बाजार में मौजूद अपने शेयरों को वापस खरीदती है. बायबैक से ओपन मार्केट में कंपनी के शेयरों की संख्या कम होती है. कंपनी बायबैक इसलिए करती है क्योंकि ओपन मार्केट में शेयरों की संख्या कम होने से बाजार में उपलब्ध शेयर के भाव बढ़ते हैं और नतीजतन शेयरधारकों की वैल्यू भी बढ़ती है. इससे रिटर्न भी बढ़ता है. शेयरधारकों को यह फायदा मिलता है कि कंपनियां प्रीमियम भाव पर (मौजूदा शेयर भाव से अधिक पर) बायबैक करती हैं.

कंपनी में बढ़ता है भरोसा

एनालिस्ट्स का मानना है कि जब तक स्टॉक अंडरवैल्यू न हो, इसके बायबैक का फैसला प्रबंधन को नहीं लेना चाहिए. जब कोई कंपनी शेयर बायबैक का फैसला करती है तो इससे यह दिखता है कि कंपनी के पास पर्याप्त पूंजी है. बायबैक के फैसले से शेयरधारकों को भरोसा होता है कि कंपनी अधिक नकदी होने पर उसे फायदा देगी, बजाय उसे किसी अन्य एसेट्स में फिर से निवेश करने के.

TCS और Wipro इस महीने कर चुकी हैं बायबैक

टीसीएस ने 3000 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बायबैक का फैसला किया था जबकि उस दिन (7 अक्टूबर) को उसकी क्लोजिंग प्राइस 2737 रुपये प्रति शेयर थी. इसी प्रकार विप्रो ने भी 400 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बायबैक किया था जबकि उस दिन (13 अक्टूबर) को उसके शेयर 375.75 रुपये के भाव पर बंद हुए थे. टीसीएस, विप्रो के अलावा सन फॉर्मा, सुप्रीम पेट्रोकेम, एमामी, डालमिया सीमेंट और ग्रेनूल्स इंडिया लिमिटेड भी शेयर बायबैक का ऐलान कर चुकी हैं.

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दो तरह से हो सकते हैं बायबैक

बायबैक दो प्रकार के होते हैं. एक तो वर्तमान शेयरधारकों से ओपन टेंडर ऑफर और दूसरा स्टॉक एक्सचेंज के जरिए ओपन मार्केट. अधिकतर कंपनियां ओपन मार्कट ऑफर वाला रास्ता अपनाती हैं. टेंडर ऑफर रूट के जरिए किए जाने वाले बायबैक में 15 फीसदी शेयरों को छोटे शेयरधारकों से वापस खरीदने के लिए रिजर्व करना होता है. छोटे शेयरधारक का मतलब ऐसे निवेशकों से है जिनकी मार्केट वैल्यू रिकॉर्ड डेट को 2 लाख से अधिक न हो.

निवेशकों के लिए टिप्स

  • निवेशकों को बायबैक की घोषणा से ठीक पहले शेयर प्राइस की मूवमेंट को एनालाइज करना चाहिए. अगर शेयर भाव में तेज बढ़ोतरी दिख रही है तो निवेशकों को सावधान हो जाना चाहिए.
  • निवेशकों को बायबैक ऑफर के साइज, कीमत और ऑफर की अवधि पर भी ध्यान देना चाहिए. अगर कंपनी के कुल मार्केट कैप की तुलना में बायबैक साइज बहुत कम है, तो बायबैक के बाद शेयर भाव में खास बदलाव की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.
  • निवेशकों को डेट-इक्विटी रेशियो पर ध्यान देना चाहिए. अगर कर्ज स्तर इंडस्ट्री के औसत से अधिक है तो इसका अर्थ यह हुआ कि निकट भविष्य में कंपनी का फ्री कैश फ्लो में बेहतर नहीं रहेगा.
  • कुछ निवेशक बायबैक की तुलना में डिविडेंड्स को अधिक पसंद करते हैं क्योंकि यह अधिक टैक्स-एफिशिएंट है.

 

(Article: Saikat Neogi)

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