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Mutual Fund: शेयर बाजार रिकॉर्ड हाई पर, इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेशकों को क्या करना चाहिए?

Mutual Fund Strategy: शेयर बाजार के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के बाद इक्विटी फंड निवेशकों की सही स्ट्रैटेजी क्या होनी चाहिए.

Updated: Nov 23, 2020 8:09 AM
mutual fund strategyMutual Fund Strategy: शेयर बाजार के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के बाद इक्विटी फंड निवेशकों की सही स्ट्रैटेजी क्या होनी चाहिए.

Mutual Fund Strategy: शेयर बाजार ने पिछले हफ्ते अपना आल टाइम हाई बनाया है. सेंसेक्स पहली बार 40 हजार का स्तर पार किया. वहीं निफ्टी ने भी 12900 का स्तर पार कर 13000 की ओर कदम बढा दिए. देखा जाए तो इस साल मार्च के लो से सेंसेक्स में 75 फीसदी से ज्यादा ग्रोथ देखने को मिली है. लॉकडाउन के दौर में बाजार में मई से ही अच्छी खासी रिकवरी देखने को मिली. इस दौरान बाजार का वैल्युएशन एक बार फिर ज्यादा हुआ है और बहुत से शेयर भी अपने 52 हफ्तों का हाई पार कर गए या पार करने के करीब हैं. ऐसे में इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेशकों को एक बार फिर चिंता सताने लगी है कि क्या उन्हें यहां से कुछ प्रॉफिट बुक करना चाहिए या निवेश को छोड़ देना चाहिए.

मई से शेयर बाजार में जैसे जैसे रैली आनी शुरू हुई है, इक्विटी फंडों का रिटर्न भी सुधरने लगा है. पिछले 3 महीने की बात करें तो लॉर्जकैप फंड, मल्टीकैप फंड, मिडकैप फंड और स्मालकैप फंड सेग्मेंट का औसत 12 फीसदी, 11 फीसदी, 11 फीसदी और 12 फीसदी रहा है. वहीं पिछले एक साल के दौरान इन सेग्मेंट में 7 फीसदी, 7.5 फीसदी, 15 फीसदी और 19 फीसदी रिटर्न मिला है. वहीं अलग अलग फंडों का रिटर्न देखें तो कुछ ने इस दौरान 20 फीसदी तक रिटर्न दिया है.

निवेशकों को क्या करना चाहिए

बीपीएन फिनकैप के डायरेक्टर एके निगम का कहना है कि मार्च के लो से बाजार में अच्छी खासी रैली आई है, जिसका फायदा इक्विटी फंड निवेशकों को भी मिल रहा है. यह सही है कि इस दौीरान कुछ फंड का वेल्युएशन ज्यादा हुआ है. फिर भी निवेशकों को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि जिस उद्देश्य के साथ उन्होंने निवेश किया है, वह पूरा हुआ है या नहीं. या पूरा होने के कगार पर है. या अभी शुरूआत है. इस आधार पर उन्हें मुनाफा वसूली का फैसला करना चाहिए.

20% शिफ्ट करने से करें शुरू: अगर उनका गोल पूरा होने के करीब आ रहा है तो निवेशकों को एक साथ मुनाफा वसूली करने की बजाए एक तय समय अंतराल पर 20—20 फीसदी पैसा निकालना चाहिए. शुरू में वे अपने निवेश का 20 फीसदी डेट फंड की ओर शिफ्ट कर सकते हैं. अगर आगे मार्केट में गिरावट की आशंका बने तो 20 फीसदी, 20 फीसदी फिर डेट की ओर शिफ्ट करें.

शॉर्ट ड्यूरेशन या लिक्विड फंड: लेकिन ध्यान देने की बात है कि जिस तरह के मैक्रो एन्वायरनमेंट बने हैं, बाजार में हिल्के फुल्के करेक्शन के बाद फिर तेजीर आ सकती है. इसलिए बेहतर तरीका यह है कि इक्विटी फंड से जो पैसा निकालें, उसे डेट कटेगिरी में शॉर्ट ड्यूरेशन या लिक्विड फंड में निवेश करें. ताकि जब बाजार में फिर तेजी आए तो डेट फंड के मेच्योर होने के बाद वह पैसा फिर इक्विटी फंड में डाल सकें.

एसेट अलोकेशन थीम: एक और तरीका बेहतर है कि यहां से इक्विटी फंड से कुछ पैसा निकालकर उसे एसेट अलोकेशन थीम के आधार पर निवेया करें. एसेट अलोकेशन थीम से आपका पोर्टफोलियां डाइवर्सिफाई हो जाता है और उतार चढ़ाव के जोखिम से सुरक्षा मिलती है. एसेट अलोकेयान थीम में आपका पैसा इक्विटी, गोल्ड और डेट में लगाया जाता है.

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