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सेंसेक्स 468 अंक फिसला, निवेशकों के 2.32 लाख करोड़ डूबे; मार्केट में गिरावट की 5 वजहें

सोमवार को रुपये में रिकॉर्ड गिरावट और कमजोर ग्लोबल संकेतों के चलते घरेलू शेयर बाजार में भी दबाव है. सेंसेक्स 114 अंक टूटकर 38275 के स्तर पर कारोबार कर रहा है.

September 10, 2018 4:30 PM
stock market, stocks, rupee, bank, pharma, metal, IT, auto, sensex, nifty, BSE, NSEसोमवार को रुपये में रिकॉर्ड गिरावट और कमजोर ग्लोबल संकेतों के चलते घरेलू शेयर बाजार में भी दबाव है. सेंसेक्स 114 अंक टूटकर 38275 के स्तर पर कारोबार कर रहा है. (Reuters)

सोमवार को ट्रेड वार बढ़ने की आशंका, रुपये में रिकॉर्ड गिरावट और कमजोर ग्लोबल संकेतों के चलते घरेलू शेयर बाजार बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ. सेंसेक्स 468 अंक टूटकर 37922 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 155 अंक टूटकर 11434 के स्तर पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान निफ्टी पर चौतरफा बिकवाली दिखी है. आईटी को छोड़कर सभी इंडेक्स में बड़ी गिरावट रही. मिडकैप और स्मालकैप में भी बिकवाली रही. रुपये में 72.68 के स्तर तक गिरावट रही. एशियाई बाजारों में कमजोरी रही है.

किन शेयरों में तेजी, किनमें गिरावट

कारोबार में एक्सिस बैंक, इंफोसिस, ल्यूपिन, सिप्ला, वेदांता लिमिटेड, मनपसंद बेवरेज, कॉफीडे और एमएफएसएल में तेजी रही है. वहीं, इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस, यस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, बीपीसीएल, टाटा मोटर्स, आईएफसीआई, आईआईएफएल, पीएफएस और अडानी इंटरटेनमेंट में कमजोरी रही है.

11 में 10 इंडेक्स में कमजोरी

निफ्टी पर 11 में से 10 इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं. हालांकि रुपये में कमजोरी बढ़ने के चलते आईटी  इंडेक्स में हल्की तेजी रही है. मेटल, पीएसयू बैंक और फार्मा शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट रही है. फार्मा और पीएसयू में 2 फीसदी से ज्यादा गिरावट रही. वहीं, एफएमसीजी, मेटल और आॅटो में 1.8 फीसदी के करीब गिरावट रही. रियल्टी और अन्य दोनों बैंक इंडेक्स भी गिरकर बंद हुए. आईटी में 0.05 फीसदी की मामूली तेजी रही. बीएसई मिडकैप इंडेक्स में 277 अंकों और स्मॉलकैप इंडेक्स में 188 अंकों की गिरावट रही.

निवेशकों के 2.32 लाख करोड़ डूबे

बाजार की गिरावट से सोमवार को निवेशकों के करीब 2.32 लाख करोड़ रुपये डूब गए. बीएसई का मार्केट कैप शुक्रवार को 15,775,242 करोड़ रुपये था. जबकि सोमवार को यह घटकर 15,542,389 करोड़ रुपये रह गया. इस लिहाज से एक दिन में निवेशकों के 2.32 लाख करोड़ रुपये घट गए.

रुपया 72.51 के भाव पर

सोमवार के कारोबार में रुपये में भारी गिरावट है. रुपया 77 पैसे टूटकर डॉलर के मुकाबले 72.51 के भाव पर आ गया. यह रुपये का अबतक का सबसे निचला स्तर है. शुक्रवार ​को रुपया 71.73 प्रति डॉलर के भाव पर बंद हुआ था. क्रूड के भाव बढ़ने, ग्लोबल टेंशन, ट्रेड वार के बीच डॉलर की डिमांड बढ़ने से रुपये पर दबाव है. जानकार मान रहे हैं कि रुपये में अभी गिरावट बढ़ेेगी और यह 74 के भाव तक टूट सकता है.

इन 5 वजहों से गिरा बाजार

1. कमजोर रुपया

रुपये में लगातार आ रही गिरावट से मार्केट सेंटीमेंट बिगड़ गया है. सोमवार के कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 72.68 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक लुढ़क गया था. रुपये में करीब 90 पैसे तक की तेज गिरावट दर्ज की गई.

2. US-चीन ट्रेड वॉर

अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनॉल्ड ट्रम्प की तरफ से चीनी उत्पादों पर अतिरिक्त 267 अरब डॉलर का टैरिफ लगाने की संभावनाओं पर विचार करने की खबरों से देश की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में तनाव बढ़ता जा रहा है. अमेरिकी में जॉब डाटा बेहतर होने और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में बढ़ोतरी का रास्ता अपनाने की खबरों के बाद ट्रम्प की तरफ यह बयान आया है. ट्रेड वार गहराने की आशंका का असर एशियाई बाजारों पर पड़ रहा है.

3. क्रूड में तेजी

क्रूड यानी कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के चलते रुपया और बांड दोनों पर दबाव बढ़ रहा है. भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा क्रूड आयात करता है. ऐसे में क्रूड महंगा होने से न केवल आयातकों की तरफ से डॉलर की डिमांड बढ़ रही है बल्कि महंगाई भड़कने का भी खतरा बढ़ गया है. सोमवार को इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड के दाम 77 डॉलर प्रति बैरल के पार चले गए.

4. आर्थिक आंकड़े

आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, व्यापार घाटा बढ़ने से देश का चालू खाता घाटा (CAD) वैल्यू टर्म में अप्रैल—जून तिमाही के दौरान बढ़कर 15.8 अरब डॉलर हो गया. पिछले साल इसी​ तिमाही में यह आंकड़ा 15 अरब डॉलर था. इसके अलावा, सरकार की कुल देनदारी बढ़ने की रिपोर्ट से भी मार्केट का सेंटीमेंट कमजोर हुआ. जून तिमाही में सरकार की कुल लायबिलिटी बढ़कर 79.8 लाख करोड़ हो गई, जो मार्च 2018 तक 77.98 लाख करोड़ थी. जून 2018 तक कुल लॉयबिलिटी में सरकारी कर्ज की हिस्सेदारी 89.3 फीसदी हो गई.

5. बॉन्ड यील्ड में तेजी

10 साल की बॉन्ड यील्ड करीब 8.11 फीसदी हो गई, जोकि नवंबर 2014 के बाद सबसे ज्यादा है. जब भी मैक्रोइकोनॉमिक इंडिकेटर्स कमजोर पड़ते हैं, बॉन्ड यील्ड बढ़ जाती है. तब निवेशक अपने जोखिम से बचने के लिए बॉन्ड से अधिक रिटर्न चाहते हैं.

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