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2020: रिकॉर्ड लो से रिकॉर्ड हाई; शेयर बाजार की 10 घटनाएं, जिससे निवेशकों पर सीधा हुआ असर

Stock Market 10 Big Events 2020: इस साल शेयर बाजार की कुछ बड़ी घटनाएं, जिसने सीधे तौर पर निवेशकों को प्रभावित किया.

Updated: Dec 25, 2020 4:20 PM
Tata Motors Share Price Today, Tata Motors Stock PriceAnalysts say that Tata Motors' stock run up in past few trading sessions is on account of numerous fundamental triggers.

Stock Market Big Events 2020: साल 2020 खत्म होने वाला है और शेयर बाजार अपने आलटाइम पर नए साल की शुरूआत करने जा रहा है. बाजार सेंटीमेंट इस दौरान बेहद मजबूत हैं और निवेशक लगातार अपना पैसा बाजार में लगा रहे हैं. मार्केट में यह रैली सिर्फ चुनिंदा सेक्टर्स या चुनिंदा शेयरों की वजह से नहीं है. बल्कि इसमें लॉजकैप के अलावा मिडकैप और स्मालकैप भी शामिल हैं. हालांकि अभी जो बाजार की तस्वीर दिख रही है, वह इस साल के कई महीनों से बिल्कुल अलग है. इसी साल मार्च में बाजार में ऐतिहासिक गिरावट आई थी और तकरीबन 90 फीसदी शेयरों का रिटर्न निगेटिव में आ गया. जबकि साल की शुरूआत भी जोरदार तेजी के साथ हुई थी जो फरवरी तक जारी थी. जानते हैं शेयर बाजार की कुछ बड़ी घटनाएं, जिसने सीधे तौर पर निवेशकों को प्रभावित किया.

यूनियन बजट 2020

पिछले साल 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया था. बजट के उम्मीदों से बजट के बाद बाजार में जमकर रैली देखने को मिली. फरवरी में बाजार रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया. सरकार ने बजट में जहां अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कंजम्पशन पर जोर दिया, वहीं, बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर था. वहीं वित्त मंत्री ने नया इनकम टैक्स स्ट्रक्चर पेश किया. अर्थव्यवस्था पर फोकस को देखते हुए बाजार सेंटीमेंट बेहर हुए. वैसे तो बजट के दिन बाजार में गिरवट रही, लेकिन क्लेरिटी आने पर बाजार में खरीददारी बढ़ी.

कोरोना वायरस

बजट के बाद से बाजार की यह रैली ज्यादा दिनों नहीं चल पाई. मार्च में कोरोना वायरस के चलते बाजार अपने निचले सतरों पर पहुंच गया. 24 मार्च को सेंसेक्स 25638.9 के लो स्तर पर आ गया. वहीं निफ्टी भी 7511 के लो लेवल पर आ गया. भारत में जनवरी में ही पहला कोरोना वायरस का केस मिला था. जिसकी बढ़ती दर को देखते हुए मार्च में देशव्यापी लॉकडाउन लगाना पड़ा. लॉकडाउन के चलते अर्थव्यवस्था लगभग ठप पड़ गई. कंपनियों का कारोबार गिरने लगा. ज्यादातर सेक्टर में गिरावट रही, जिससे उनके शेयरों में जमकर गिरावट आई. लोगों ने बाजार में पैनिक बॉइंग भी की. सेंसेक्स और निफ्टी में 40 फीसदी के करीब गिरावट आई तो मिडकैप और स्मालकैप 50 फीसदी से ज्यादा कमजोर हुए.

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अनलॉक

लॉकडज्ञउन के बाद से धीरे धीरे अर्थव्यवस्था को खोलने के लिए अनलॉक का दौर शुरू हुआ. इस दौरान में फेजवाइज अलग अलग सेक्टर्स को कुछ शर्तों के साथ छूट दी गई. फिलहाल इसका असर दिखा और जुलाई से बाजार में फिर तेजी आनी शुरू हुई. जुलाई में यह तेजी शुरू हुई और नवंबर आते आते बाजार अपने रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया. दिसंबर में सेंसेक्स ने 47000 का स्तर पार किया तो निफ्टी भी 13750 के पार गया.

राहत पैकेज

लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान से उबारने के लिए केंद्र सरकार ने अलग अलग चरणों में राहत पैकेज का एलान किया. इसके जरिए जहां मांग बढ़ाने के साथ बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाने के उपाय किए गए. वहीं आम आदमी को भी राहत दी गई. भारत सरकार ने कोरोना महामारी को देखते हुए 29.87 लाख करोड़ के कोविड रीलीफ पैकेज का एलान किया. यह जीडीपी के 15 फीसदी के बराबर था.

गोल्ड

इस साल अगस्त में सोने ने 56000 रुपये प्रति 10 ग्राम का भाव पार किया था. जबकि पिछले साल के अंत में सोना 40 हजार से नीचे बंद हुआ था. गोल्ड में इस शानदार रैली को देखते हुए बाजार से पैसा निकालकर बहुत से निवेयाकों ने सोने में लगाया. गोल्ड में इस रैली के पीछे कोरोना महामारी के चलते आर्थिक अनिश्चितता प्रमुख वजह थी.

आरबीआई पॉलिसी

आरबीआई ने इस साल ब्याज दरों में 115 बेसिस प्वॉइंट की कटौती की और रेपो रेट 4 फीसदी पर आ गया है. आरबीआई का यह प्रयास भी बाजार के लिए गेमचेंजर साबित हुआ है. आरबीआई के अलावा दुनियाभर के केंद्रीय बेंकों ने भी दरों को निचले स्तरों पर बनाए रखा.

क्रूड

लॉकडाउन के चलते मांग में अनिश्चितता का सेंटीमेंट बना जिससे अप्रैल 2020 में क्रूड 20 डॉलर के भी नीचे चला गया. हालांकि बाद में अर्थव्यवस्था की रिकवरी के उम्मीद में डिमांड में इजाफा हुआ. वहीं ओपेक देशों ने भी प्रोडक्शन कट के जरिए कीमतें सिथर रखने का प्रयास किया. क्रूड इंटरनेशनल मार्केट में अब 50 डॉलर प्रति बैरल के आस पास है.

चीन के साथ टेंशन

इस साल भारत और चीन के बीच टेंशन चर्चा में रह. इससे कुछ दिन बाजार में दबाव देखने को मिला. हालांकि बाद में यह सेंटीमेंट खत्म हुआ.

यूएस इलेक्शन

यूएस प्रेसिडेंट इलेक्शन ने भी इस साल बाजारों को प्रभावित किया. यूएस में इलेक्शन को लेकर पॉलिटिकल अनर्सेटिनिटी का माहौल बना. जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश बढ़ा.

कोविड 19 वैक्सीन

कोरोना वैक्सीन साल के अंतिम महीनों में बाजार के लिए एक बड़ा ट्रिगर साबित हुआ. कई कंपनियों ने अपनी वैक्सीन सेफ होने का दावा किया और उनका ट्रायॅल फाइनल फेज में पहुंच गया. वैक्सीन के बाजार में जल्द आने की उम्मीद से निवेशकों के सेंटीमेंट मजबूत हुए. अब कुछ देशों में वैक्सीनेशन भी शुरू हो गया. वैक्सीन आने का मतलब है कि कोरोना महामारी से जन्ल्द छुटकारा मिलेगा और अर्थव्यवस्था पटरी पर आएगी.

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