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भारतीय मसालों पर पड़ी गृह युद्ध और खराब मौसम की मार, आगे भी भाव में तेजी के आसार

पिछले कुछ समय से मसालों की कीमतें तेजी से बढ़़ी हैं और कुछ मसालों में गिरावट आई है लेकिन इस गिरावट को कमोडिटी एक्सपर्ट आंशिक मान रहे हैं.

April 28, 2019 8:20 AM
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Spices Price: भारतीय मसालों की दुनिया भर में बड़ी मांग है और लंबे समय से यूरोपीय बाजारों में इसकी मांग रही है. मसालों से न सिर्फ पकवानों का स्वाद बढ़ता है बल्कि उन्हें लंबे समय तक खराब होने से बचाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता रहा है. हालांकि पिछले कुछ समय से अधिकांश मसालों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. जबकि कुछ मसालों में गिरावट आई है लेकिन इस गिरावट को कमोडिटी एक्सपर्ट आंशिक मान रहे हैं. भारत में प्रमुख रूप से राजस्थान में जीरा व धनिया, गुजरात में जीरा, तेलंगाना में काली मिर्च व हल्दी और केरल में काली मिर्च का उत्पादन होता है. एक्सपर्ट का कहना है कि आगे भी मसालों खासकर जीरा, धनिया, हल्दी, काली मिर्च, इलायची की कीमतों में तेजी बनी रह सकती है.

गृह युद्ध ने भारतीय जीरे की बढ़ाई महक

भारत और चीन जीरे के सबसे बड़े उत्पादक हैं और इन दोनों देशों में 70 फीसदी जीरा होता है. भारतीय जीरे की सबसे अधिक मांग मध्य-पूर्व एशिया के देशों में है. पिछले कुछ समय से सीरिया और टर्की में भी जीरा उत्पादन से भारतीय जीरे का निर्यात प्रभावित होने की संभावना व्यक्त की जा रही थी लेकिन अजय केडिया की मानें तो इन दोनों देशों में गृह युद्ध से भारत को फायदा हुआ है. सिविल वार के कारण सीरिया और टर्की से जीरे की आपूर्ति प्रभावित हुई है और भारतीय जीरे की महक बनी हुई है. भारत में सबसे अधिक जीरा गुजरात और राजस्थान में होता है.

खराब मौसम के कारण धनिया महंगा

पिछले साल धनिया 50 रुपये प्रति किग्रा के भाव पर बिक रहा था जो इस साल 40 फीसदी तक बढ़कर 70 रुपये प्रति किग्रा पर पहुंच गया है. इस साल देश में इसका उत्पादन कम हुआ है. भारत के अलावा इस साल यूक्रेन, बुल्गारिया और रूस जैसे देशों में भी 50 फीसदी धनिया कम उत्पादित हुआ. इसके कारण धनिए का वैश्विक उत्पादन 40 फीसदी तक गिर सकता है.

भारत में सबसे अधिक धनिया राजस्थान में होता है लेकिन इस साल खराब मौसम के कारण इसका उत्पादन प्रभावित हुआ है. इसके अलावा जीरे की खेती के प्रति किसानों के बढ़ते मोह ने भी धनिए का रकबा कम किया है. गुजरात में जीरे की खेती के कारण धनिया का उत्पादन 40 फीसदी तक कम हो सकता है. भारत धनिया का दुनिया में सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक है.

हल्दी की कीमतें फिर उछलने का अनुमान

पिछले कुछ दिनों से हल्दी की कीमतों में गिरावट देखने को मिला है. इसकी मुख्य वजह यह है कि मौसम विभाग (आईएमडी) ने इस साल बेहतर बारिश का अनुमान लगाया है. हालांकि अजय केडिया का मानना है कि हल्दी जल्द ही महंगी हो सकती है क्योंकि इसकी स्काईमेट और अंतरराष्ट्रीय मौसम विभाग ने अलनीनो का अनुमान लगाया है. खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट, इन वजहों से आगे भी बनी रह सकती है नरमी

इसके अलावा अजय केडिया का कहना है कि नया वित्तीय वर्ष शुरू होने के कारण कंपनियां इसका स्टॉक जमा कर रही हैं और किसान भी भविष्य में बेहतर कीमत मिलने की संभावना को लेकर स्टॉक जमा कर रहे हैं. इसकी वजह से कीमतें उछल सकती हैं.

Spices Price: केरल की बाढ़ का मसालों पर असर

पिछले साल केरल को बाढ़ का सामना करना पड़ा. इसकी वजह से वहां मसालों की खेती बुरी तरह प्रभावित हुई. बाढ़ के कारण केरल में उत्पादित होने वाले काली मिर्च और इलायची की फसल खराब हुई है. इस साल अब तक इलायची की कीमतें 19.94 फीसदी तक बढ़ चुकी हैं.

बीते 3 साल में कितना रहा मसालों का निर्यात

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