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Sovereign Gold Bond 2021: 1 मार्च से सस्ता सोना खरीदने का मौका, निवेश से पहले जानें बॉन्ड की खासियत

अगर आप निवेश के बेहतर विकल्प की तलाश में हैं, तो सोमवार यानी 1 मार्च से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में पैसा लगाने का मौका है.

February 28, 2021 3:21 PM
Sovereign Gold Bond 12th series starts from 1 march know how to invest and all features benefitsअगर आप निवेश के बेहतर विकल्प की तलाश में हैं, तो सोमवार यानी 1 मार्च से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में पैसा लगाने का मौका है.

Sovereign Gold Bond Scheme: अगर आप निवेश के बेहतर विकल्प की तलाश में हैं, तो सोमवार यानी 1 मार्च से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में पैसा लगाने का मौका है. गोल्ड बॉन्ड की 12वीं सीरीज 1 मार्च से निवेश के लिए खुल रही है, जो 5 मार्च तक खुली रहेगी. गोल्ड बॉन्ड के लिए इस बार सरकार ने इश्यू प्राइस 4,662 रुपये प्रति ग्राम यानी 46,620 रुपये प्रति 10 ग्राम तय किया है. वहीं, अगर ऑनलाइन गोल्ड बॉन्ड खरीदते हैं, तो हर ग्राम पर 50 रुपये की छूट भी मिलेगी. ऑनलाइन इन्वेस्टर्स के लिए इश्यू प्राइस 4,612 रुपये प्रति ग्राम यानी 46,120 रुपये प्रति 10 ग्राम होगा.

कहां से खरीद सकते हैं गोल्ड बॉन्ड

एसजीबी के हर आवेदन के साथ निवेशक के पास PAN होना जरूरी है. गोल्ड बॉन्ड को ऑनलाइन खरीद सकते हैं. इसके अलावा इसकी बिक्री बैंकों, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएचसीआईएल), चुनिंदा डाकघरों और एनएसई व बीएसई जैसे स्टॉक एक्सचेंज के जरिए भी होगी. स्माल फाइनेंस बैंक और पेमेंट बैंक में इनकी बिक्री नहीं होती है.

कितना कर सकते हैं निवेश

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम में एक वित्त वर्ष में एक व्यक्ति अधिकतम 400 ग्राम सोने के बॉन्ड खरीद सकता है. वहीं न्यूनतम निवेश एक ग्राम का होना जरूरी है. वहीं HUFs एक वित्त वर्ष में 4 किलोग्राम तक निवेश कर सकेंगे, जबकि ट्रस्ट इसमें 20 किलोग्राम तक निवेश कर सकेंगे.

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गोल्ड बॉन्ड के क्या हैं फायदे

  • गोल्ड बॉन्ड मेच्योरिटी पर यह टैक्स फ्री होता है. वहीं इसमें एक्सपेंस रेश्यो कुछ भी नहीं है. भारत सरकार द्वारा समर्थित होने से डिफॉल्ट का खतरा नहीं होता है.
  • यह HNIs के लिए भी बेहतर विकल्प है, जहां इसमें मेच्योरिटी तक होल्ड करने में कैपिटल गेंस टैक्स नहीं देना होता है. इक्विटी पर 10 फीसदी कैपिटल गेंस टैक्स लगता है. ऐसे में लंबी अवधि के निवेश विकल्पों में यह बेहतर साबित हो रहा है.
  • फिजिकल गोल्ड की बजाए गोल्ड बॉन्ड को मैनेज करना आसान और सुरक्षित होता है.
  • इसमें शुद्धता का कोई झंझट नहीं होता और कीमतें सबसे शुद्ध सोने के आधार पर तय होती हैं.
  • इसमें एग्जिट के आसान विकल्प हैं. गोल्ड बॉन्ड के अगेंस्ट लोन की सुविधा भी मिलती है.

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