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मुद्रास्फीति जनवरी में घटकर 5.07 पहुंची, मंहगाई में आंशिक कमी

खाद्य पदार्थो की कीमतों में मामूली गिरावट से देश की खुदरा मुद्रास्फीति जनवरी में घटकर 5.07 फीसदी रही, जबकि फैक्टरी उत्पादन की वृद्धि दर दिसंबर में घटकर 7.1 फीसदी रही।

February 13, 2018 10:57 AM
मुद्रास्फीति दर, मुद्रास्फीति, मंहगाई दर, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, आरबीआईसाल 2017 के दिसंबर में खुदरा मुद्रास्फीति दर 5.21 फीसदी पर थी, वहीं, नवंबर में औद्योगिक उत्पादन दर (आईआईपी) प्रभावशाली 8.8 फीसदी रही।

खाद्य पदार्थो की कीमतों में मामूली गिरावट से देश की खुदरा मुद्रास्फीति जनवरी में घटकर 5.07 फीसदी रही, जबकि फैक्टरी उत्पादन की वृद्धि दर दिसंबर में घटकर 7.1 फीसदी रही। आधिकारिक आंकड़ों से सोमवार को यह जानकारी मिली। भारतीय उद्योग जगत ने उद्योग में उच्च एकल अंकों की रिकवरी दर के साथ ही मुद्रास्फीति में हल्की गिरावट की सराहना की। साल 2017 के दिसंबर में खुदरा मुद्रास्फीति दर 5.21 फीसदी पर थी, वहीं, नवंबर में औद्योगिक उत्पादन दर (आईआईपी) प्रभावशाली 8.8 फीसदी रही।

साल-दर-साल आधार पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) 2017 के जनवरी में 3.17 फीसदी रही थी। उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) जनवरी में 4.58 फीसदी रही, जबकि 2017 के दिसंबर में यह 4.85 फीसदी पर थी। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, फैक्टरी उत्पादन में क्रमिक मंदी मुख्य रूप से विनिर्माण क्षेत्र में कम उत्पादन के कारण थी।

हालांकि, साल-दर-साल आधार पर विनिर्माण क्षेत्र में प्रभावशाली 8.4 फीसदी की वृद्धि दर दर्ज की, जबकि खनन क्षेत्र उत्पादन में मामूली 1.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है, साथ ही बिजली उत्पादन के उप-समूह में 4.4 फीसदी की वृद्धि हुई है। सीएसओ ने कहा, “उद्योगों के संदर्भ में, विनिर्माण क्षेत्र के 23 में से 16 में साल 2017 के दिसंबर में सकारात्मक वृद्धि दर रही।”

उद्योग संगठन एसोचैम ने आईआईपी आंकड़ों को ‘भारत में औद्योगिक गतिविधियों के विकास चक्र की दिशा में एक सकारात्मक संकेत’ करार दिया है। एसोचैम के अध्यक्ष संदीप जाजोदिया ने कहा, “हालांकि, भौगोलिक राजनीतिक परिस्थितियों के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था में निरंतर अनिश्चितताओं के रूप में भारतीय अर्थव्यवस्था का जोखिम बढ़ रहा है, जिसमें बढ़ते वैश्विक संरक्षणवाद के कारण बाहरी मांग में इजाफे में हो रही देरी भी शामिल है।”

उन्होंने कहा, “इसके अलावा, निजी निवेश में कॉरपोरेट ऋण उतार-चढ़ाव के रूप में कई बाधाएं आ रही है। बैंकों का एनपीए (फंसा हुआ कर्ज) बढ़ता जा रहा है। साथ ही कई नियामक और नीतिगत चुनौतियां भी हैं।”इंडिया रेटिंग एंड रिसर्च (इंड-रॉ) के प्रमुख अर्थशाी सुनील कुमार सिन्हा ने एक बयान में कहा, “लगातार दूसरे महीने आईआईपी में उच्च एकल अंकों की वृद्धि दर रही है, जो कि उत्साहजनक है।”

उन्होंने कहा, “खुदरा मुद्रास्फीति जनवरी में घटकर 5.07 फीसदी रही है, जो पिछले महीने दर्ज 5.21 फीसदी से कम है, लेकिन आरबीआई (भारतीय रिजर्व बैंक) के लक्ष्य 4 फीसदी से अधिक है।”

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