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म्यूचुअल फंड: आईपीओ की तरह बाजार में NFO की बहार, क्या आपको लगाना चाहिए दांव

New Fund Offer: ऐसे समय में जब अधिकांश इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स से रिटर्न निराशाजनक रहा है फंड हाउस मैनेजमेंट NFO लॉन्च कर रहे हैं.

October 13, 2020 4:19 PM
NFONew Fund Offer: ऐसे समय में जब अधिकांश इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स से रिटर्न निराशाजनक रहा है फंड हाउस मैनेजमेंट NFO लॉन्च कर रहे हैं.

New Fund Offer: ऐसे समय में जब अधिकांश इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स से रिटर्न निराशाजनक रहा है और मार्केट वैल्यूएशन बढ़ा है, फंड हाउस मैनेजमेंट ओपन-एंडेड न्यू फंड ऑफर (NFO) लॉन्च कर रहे हैं. इस साल जनवरी से अबतक म्यूचुअल फंड हाउसों ने 39 ओपन एंडेड NFO से 39,121 करोड़ रुपये जुटाए हैं. स्टॉक में प्रारंभिक सार्वजनिक ऑफर (आईपीओ) की तरह, परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियां (एएमसी) ने निवेशकों से पैसे जुटाने के लिए एनएफओ लॉन्च करती हैं.

हाल में आए कई NFO सेक्टोरल/ थीमैटिक कटेगिरी, इंटरनेशनल इक्विटीज, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड, मल्टी-एसेट थीम हैं. क्योंकि एएमसी इन सेक्टर्स/कटेगिरीज में ग्रोथ पोटेंशियल का का लाभ लेना चाहते हैं. निवेशक स्कीम की यूनिट्स को 10 रुपये प्रति यूनिट की निर्धारित दर पर खरीदते हैं. एनएफओ विंडो बंद होने के बाद, योजनाएं वर्तमान दिन की नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) पर निरंतर सेल और रीपरचेज यानी बिक्री और पुनर्खरीद के लिए उपलब्ध होते हैं.

कब लाती हैं कंपनियां NFO

MyWealthGrowth के सह-संस्थापक हर्षद चेतनवाला का कहना है कि आईपीओ की तरह, अधिकांश एनएफओ को तब लाया जाता है, जब शेयर बाजार में तेजी का रुख रहता है. यह एक तरह से निवेशकों की भावनाओं से जुड़ा होता है. निवेशक इस दौरान निवेश करने में अधिक विश्वास रखते हैं और इसलिए एएमसी को लगता है कि वे इसे भुनाने में सक्षम हो सकते हैं.

NFO में निवेश के पहले इन बातों पर ध्यान दें

एनएफओ में निवेश करने से पहले, एक निवेशक को यूनिक इन्वेस्टमेंट स्टाइल और थीम को देखना चाहिए. एक नई योजना जो स्पष्ट रूप से अपनी निवेश प्रक्रिया को आउटलाइंस करती है, पर विचार किया जाना चाहिए. हालांकि, अगर योजना इससे भटकती है, तो निवेशकों को इसे निवेश शैली में कमजोरी के संकेत के रूप में देखना चाहिए.

निवेशकों को इस विश्लेषण करना चाहिए कि क्या एनएफओ केवल एक विशेष थीम को कैश कराने के लिए है, जो वर्तमान में प्रचलित है, लेकिन लंबे समय में विषय टिकाऊ नहीं है. उन्हें इस तरह के फंड से बचना चाहिए. फंड हाउस की अन्य योजनाओं में निवेशकों को ट्रैक रिकॉर्ड को भी देखना होगा. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निवेशकों को एनएफओ में निवेश करने से पहले अपनी रिस्क प्रोफाइल और तरलता की जरूरतों का विश्लेषण करना चाहिए.

क्या कहना है एक्सपर्ट का

MyWealthGrowth के चेतनवाला का कहना है कि किसी भी फंड में निवेश निवेशकों की जरूरत और प्रोफाइल पर आधारित होना चाहिए. आमतौर पर, एनएफओ के बजाय ऑन-गोइंग फंड में निवेश करना बेहतर होता है जब तक कि नया फंड निवेश करने का कोई ऐसा अनूठा अवसर प्रदान करें जो कि मौजूदा उत्पादों में नहीे हो.

BellWether Advisors LLP के फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर बृजेश दामोदरन का कहना है कि अगर एनएफओ पूरी तरह से नई श्रेणी या सेक्टर या जियोग्राफी में निवेश कर रहा है तो निवेशक इसमें पैसा लगाने पर विचार कर सकते हैं. यह पूरी तरह से नया होना चाहिए और इस तरह की कोई अन्य प्रचलित योजना नहीं होनी चाहिए. इस साल, दो ऐसे NFO ने ध्यान आकर्षित किया है मसलन S & P 500 स्कीम (S & P 500 में यूएस स्टॉक को लक्षित करना) और एक हेल्थकेयर इंडेक्स फंड.

मौजूदा योजनाओं में निवेश करना बेहतर

हालांकि NFO में निवेश आकर्षक लग सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का सुझाव है कि मौजूदा योजनाओं में निवेश करना चाहिए. क्योंकि उनकी इन्वेस्टिंग स्टाइल, एसेट अंडर मैनेजमेंटख्शौ पोर्टफोलियो और पूर्व में रिटर्न के बारे में अच्छे से पता होता है. यह हमेशा बेहतर होता है कि किसी नए फंड के बजाय किसी ऐसी स्कीम में पैसा डाला जाए, जिसका ट्रैक रिकॉर्ड बेहतर हो. नए फंड के लिए ये इनपुट उपलब्ध नहीं होते हैं.

ट्रैक रिकॉर्ड जरूर देख लें

मौजूदा फंड जिसने बुल और बियर मार्केट साइकिल को देखा है, वे लंबे समय में बेहतर रिटर्न देने के लिए बेहतर हैं. दामोदरन कहते हैं कि निवेशकों को आमतौर पर दो-तीन साल के ट्रैक रिकॉर्ड के साथ स्कीमों पर टिकना चाहिए. एसआईपी मार्ग के माध्यम से NFO में निवेश करने से बचें. लंबे समय तक निवेश करना स्कीम के ट्रैक रिकॉर्ड पर आधारित होना चाहिए. एनएफओ में निवेश करने के बाद भी, फंड के प्रदर्शन की नियमित रूप से समीक्षा करें और निगरानी करें कि फंड अपने बेंचमार्क पर अल्फा उत्पन्न करने में सक्षम है या नहीं.

(लेखक: Saikat Neogi)

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