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RBI के उपायों से सिस्टम में 3.74 करोड़ आएगी लिक्विडिटी, क्या बांड मार्केट के लिए सही है समय?

वैश्विक कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया को अव्यवस्था और लॉकडाउन मोड में छोड़ दिया है.

April 7, 2020 8:38 AM
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वैश्विक कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया को अव्यवस्था और लॉकडाउन मोड में छोड़ दिया है. यह एक ऐसा समय है, जब पूरी दुनिया में पैनिक बना हुआ है. कोरोना वायरस के चलते मानवीय पैमाने पर बड़ा असर पड़ ही रहा है, इसकी वजह से विश्व स्तर पर कैपिटल मार्केट की भी हालत खराब हो गई है. जिसके चलते सरकारों और केंद्रीय बैंकों को देश के नागरिकों के भरोसे के साथ साथ कैपिटल मार्केट के सेंटीमेंट को बूस्ट करने के लिए कई कदम उटाने पड़ रहे हैं.

भारत की बात करें तो शेयर बाजारों में उतर चढ़ाव बना हुआ है. इस उतार चढ़ाव के बीच पिछले दिनों डेट मार्केट में भी सेलआफ देखने को मिला. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) द्वारा म्यूचुअल फंड में जमकर बिकवाली देखने को मिली. जिससे बांड यील्ड में भी गिरावट आई.

तरलता लाने के लिए बड़ा कदम

आरबीआई ने फाइनेंशियल कंडीशन को स्टेबल करने और सिस्टम में तरलता लाने के लिए बड़ा कदम उठाया. आरबीआई ने रेपो रेट में 75 अंकों की बड़ी कटौती की. जबकि CRR में 100 बेसिस प्वॉइंट की कटौती हुई. इसके अलावा भी कुछ अन्य उपाय किए गए, जिससे सिस्टम में 3.74 लाख करोड़ आएंगे. सरकार के इन उपायों से डेट मार्केट में भी स्थिरता बढ़ेगी. फंडिंग चैनल आपरेशन को बनाए रखने में मदद मिलेगी और साथ ही वित्तीय अव्यवस्था को कम करने में भी मदद मिलेगी.

बांड मार्केट के लिए पॉजिटिव

सरकार द्वारा लिक्विडिटी के जो उपाय किए गए हैं, वे बांड मार्केट के लिए पॉजिटिव हैं. बाजार की आगे भी आरबीआई से इस तरह के उपायों की उम्मीद हैं. आने वाले दिनों में दरों में और कटौती देखने को मिल सकती है, वहीं आरबीआई द्वारा इस तरह का आश्वासन भी मिल सकता है कि जरूरत हुई तो आगे भी ऐसे उपाय जारी रहेंगे. इसका असर नियर टर्म में बांड यील्ड पर पड़ेगा. आने वाले दिनों में ब्याज दरों में और गिरावट आएगी. इसका फायदा डेट म्यूचुअल फंड्स को पहुंचने की उम्मीद है.

इन उपायों के अलावा सरकार पहले ही 1.7 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा कर चुकी है. सरकार की प्राथमिकता दिखती है कि पहले उन लोगों को सीधे सहायता मिल सके, जो इस लॉकडाउन से सबसे ज्यादा प्रभावित हें. उसके बाद जब स्थिति सामान्य हो तो कोनॉमी को बूस्टर डोज दें.

क्रूड में यह गिरावट सही समय पर नहीं आई

क्रूड की कीमतों में पिछले दिनों भारी गिरावट आई है. लेकिन देखें तो क्रूड में यह गिरावट सही समय पर नहीं आई है. देश में मांग पहले की तरह होती तो क्रूड में 30 डॉलर तक गिरावट से सरकार के पास 2.5 लाख करोड़ अतिरिक्त बचते. हालांकि तेल से यह बचत कुछ हद तक राजकोषीय प्रोत्साहन के बोझ को कम करने में मदद करेगी, लेकिन यह पर्याप्त नहीं हो सकती है. सरकार ने फिस्कल डेफिसिट और महंगाई को कम करने के लिए अपने लिए जो लक्ष्य तय किए हैं, उनके लिए यह पर्याप्त नहीं है. आरबीआई ने भी मौजूदा समय को देखते हुए राजकोषीय घाटे, मुद्रास्फीति और जीडीपी जैसे आर्थिक आंकड़ों को कुछ समय के लिए अलग करते हुए इस बात पर ध्यान केंद्रित किया है कि देश को जल्द से जल्द अपने पैरों पर वापस लाने के लिए वास्तव में क्या महत्वपूर्ण है.

निवेशकों को क्या करना चाहिए

अनिश्चितता के इस माहौल में, जब बाजार के बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है, बेहतर है कि फंडामेंटल्स पर फोकस करें. हमेशा माना जाता है कि क्रेडिट रिस्क स्थायी है जबकि मार्केट रिस्क टेम्परेरी. निवेशकों को उन्हीं बांड में पैसा लगाना चाहिए जिनकी क्रेडिट रेटिंग मजबूत है. जिनका लिक्विडिटी रेश्यो बेहतर हो और कैश फ्लो में मजबूती दिख रही हो. निवेशक मौजूदा स्थिति में एसेट अलोकेशन थीम पर भी चल सकते हैं, जहां उनका पोर्टफोलियो बैलेंस रहता है.

(लेखक: महेंद्र जाजू, CIO-फिक्स्ड इनकम, मिराए एसेट इन्वेस्अमेंट मैनेजर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड)

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