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Mutual Funds Tips : लिक्विड और अल्ट्रा शॉर्ट म्यूचुअल फंड्स में तेजी से क्यों बढ़ रहा है निवेश, जानिए क्या है असली वजह ? 

 एक्सपर्ट्स का मानना है कि डेट फंड में निवेश बढ़ने की एक वजह आरबीआई  की ओर से बैंक दरों पर यथास्थितिवादी रुख बनाए रखना है.

August 12, 2021 2:22 PM
छोटी अवधि के डेट फंड्स में निवेश बढ़ रहा है.

डेट फंड्स में निवेशकों की दिलचस्पी काफी तेजी से बढ़ रही है. खास कर लिक्विड और अल्ट्रा शॉर्ट पीरियड समेत छह महीने में मैच्योर होने वाले फंड्स में. जुलाई में म्यूचुअल फंड्स की इन कैटेगरी में जबरदस्त निवेश हुआ है. यह पिछले तीन महीने का सबसे ज्यादा निवेश है.

जुलाई में शॉर्ट टर्म फंड में 73,700 करोड़ का निवेश

जुलाई महीने में डेट्स फंड्स सबसे ज्यादा निवेश हुआ. लिक्विड और अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन फंड्स में जुलाई में 73,700 करोड़ रुपये का निवेश किया गया. एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स ऑफ इंडिया ( AMFI)  के मुताबिक पिछले तीन महीने का यह सर्वाधिक निवेश  है.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि डेट फंड में निवेश बढ़ने की एक वजह आरबीआई  की ओर से बैंक दरों पर यथास्थितिवादी रुख बनाए रखना है. पिछले सप्ताह आरबीआई की एमपीसी की बैठक में रेपो रेट समेत प्रमुख बैंक दरों में कोई कटौती नहीं की गई. हालांकि पॉलिसी कमेटी के एक सदस्य का मानना था कि इनमें कटौती की जाए. लेकिन आरबीआई पर अभी भी महंगाई का दबाव है.

क्यों बढ़ रहा है छोटी अवधि के फंड में निवेश?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक FundsIndia के रिसर्च हेड अरुण कुमार का कहना है कि निवेशक छोटी अवधि के म्यूचुअल फंड में निवेश कर सुरक्षित दांव खेलना चाहते हैं. निवेशकोंं का मानना है कि ब्याज दरें अगले एक दो साल में  बढ़ेंगी. जब ऐसा होता है तो फंड्स की अवधि जितनी अधिक होती है उस पर उतना ही नकारात्मक असर होता है.

शॉर्ट ड्यूरेशन फंड में निवेश में निवेशकों के पास इससे जल्दी निकलने का विकल्प होता है. खास कर केंद्रीय बैंकों की नीतियों में अनिश्चितता को देखते हुए लंबी अवधि के म्यूचुअल फंड में उनका पैसा ज्यादा दिनों तक लॉक हो जाता है. ऐसे में फंड्स की ओर खरीदारी कम हो जाती है.

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महंगाई के दबाव में निवेशकों ने बदली रणनीति

महंगाई के दबाव और आरबीआई की नीति को देखते हुए तीन महीने में मैच्योर होने वाले म्यूचुअल फंड्स में 31,470 करोड़ का निवेश हुआ. वहीं मनी मार्केट फंड्स में 20,900 करोड़ रुपये का निवेश किया गया. एसोसिएशन ऑफ म्यूचअल फंड्स ऑफ एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक मीडियम से लेकर लॉन्ग टर्म फंड्स से 1,733 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई. दस साल के सरकारी बॉन्ड में 47.2 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई.

 

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