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इंडेक्स फंड vs डायरेक्ट प्लान: म्यूचुअल फंड में करना है निवेश, ज्यादा फायदे के लिए क्या चुनें

Mutual Fund: मौजूदा समय में कोरोना वायरस महामारी के चलते म्यूचुअल फंड की तमाम कटेगिरी में 1 से 3 साल का रिटर्न बिगड़ गया है.

Published: July 24, 2020 8:16 AM
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मौजूदा समय में कोरोना वायरस महामारी के चलते म्यूचुअल फंड की तमाम कटेगिरी में 1 से 3 साल का रिटर्न बिगड़ गया है. देखें तो इक्विटी म्यूचुअल फंड की अधिकांश श्रेणियों में 1 से 3 साल का रिटर्न निगेटिव दिख रहा है. वहीं 5 साल की अवधि में यह रिर्ट 3 फीसदी से 5 फीसदी के बीच हो गया है. ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे अपने म्यूचुअल फंड में निवेश का आंकलन करें. निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को इंडेक्स फंड और एक्टिवली मैनेज्ड फंड के मिश्रण के लिए रीस्ट्रक्चर करना चाहिए. वहीं, डायरेक्ट प्लान पर भी ध्यान देना चाहिए, जिनकी नियमित योजनाओं की तुलना में कुल एक्सपेंस रेश्यो कम है.

डायरेक्ट प्लान

2013 में सिक्युरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड आफ इंडिया ने परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) को निर्देश दिया कि वे डायरेक्ट प्लान पेश करें, ताकि निवेशक ऑनलाइन या अधिकृत शाखाओं के माध्यम से म्यूचुअल फंड से सीधे कोई योजना की खरीद कर सकें. ऐसी योजनाओं में डिस्ट्रीब्यूटर या एजेंट की कोई भागीदारी नहीं होती है, इसलिए फंड हाउस द्वारा कमीशन को बचाया जाता है, जिससे एक्सपेंस रेश्यो कम हो जाता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती जागरूकता के साथ निवेशकों को डायरेक्ट प्लान का विकल्प चुनना चाहिए. अगर किसी के पास कोई विशेषज्ञता नहीं है या अगर वोलेटाइल मार्केट में डिस्ट्रीब्यूटर नियमित रूप से रीबैलेंसिंग का पालन करता है, तो निवेशक रेगुलर प्लान के साथ जारी रख सकते हैं. एक डायरेक्ट प्लान का एनएवी एक रेगुलर प्लान से अधिक होता है. इसलिए, अगर एक लंबी अवधि के लिए निवेश किया जाता है, तो एक रेगुलर और डायरेक्ट प्लान के बीच रिटर्न में अंतर बढ़ेगा।

BellWether एडवाइजर्स के मैनेजिंग पार्टनर बृजेश दामोदरन का कहना है कि अगर निवेश करने में एक्सपर्टीज है और निवेश पोर्टफोलियो का प्रबंधन कर सकते हैं तो डायरेक्ट प्लान चुनने की सलाह दी जाती है. डायरेक्ट प्लान निश्चित रूप से लागत को कम करने में निवेशकों की मदद करती है, लेकिन जल्दबाजी या खुद से निवेश के लिए संभावि करने पर संभावित नुकसान के बारे में भी सोचना चाहिए. इसलिए डायरेक्ट प्लान उनके लिए ही बेहतर है, जिनको अपने निवेश पर पूरी तरह से भरोसा हो. यानी जिसे निवेश की अच्छी समझ हो. निवेशक AMC के रजिस्ट्रार को एक कॉमन ट्रांजैक्शन फॉर्म देकर डायरेक्ट प्लान में स्विच कर सकता है. निवेशक स्विच करने के लिए एएमसी के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का भी उपयोग कर सकता है.

ट्रस्टप्लस वेल्थ मैनेजर्स (इंडिया) के सीईओ और एमडी समीर कौल का कहना है कि फंड हाउस या रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट को स्विच रिक्वेस्ट फॉर्म सबमिट करके रेगुलर से डायरेक्ट प्लान में स्विच किया जा सकता है. एक्सपेंस रेश्यो के अलावा, निवेश करने के लिए किस स्कीम का चयन करते समय म्यूचुअल फंड योजनाओं के दीर्घकालिक प्रदर्शन और जोखिम अनुपात पर विचार करना चाहिए. इसके अलावा डायरेक्ट प्लान में पर स्विच करने के पहले टैक्स इंपेक्ट भी जरूर देख लें

इंडेक्स फंड

एक्सपेंस रेश्यो को कम करने का एक और तरीका इंडेक्स फंड्स में निवेश करना है. इंडेक्स फंड शेयर बाजार के इंडेक्स में एक ही शेयर और एक ही अनुपात में निवेश करते हैं. एएमसी के अन्य एक्टिवली मैनेज्ड फंड की तुलना में इंडेक्स फंड्स का एक्सपेंस रेश्यो कम (10 से 50 बेसिस प्वाइंट) है. इसलिए इन फंड में लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न हासिल होता है.

दामोदरन का कहना है कि इंडेक्स फंड्स की लोकप्रियता बढ़ रही है. यह पैसिव इन्वेस्टमेंट है और अगर कोई इंडेक्स की तरह रिटर्न चाहता है तो इसमें निवेश करना चाहिए. हालांकि इंडेक्स फंड में सिर्फ इसलिए निवेश नहीं करना चाहिए कि इनमें एक्सपेंस रेश्यो कम है. बल्कि आपकी आवश्यकता क्या है, इसे ध्यान में रखना चाहिए.

कौल कहते हैं कि निवेशकों को हमेशा अपने जोखिम लेने की क्षमता के आधार पर एसेट अलोकेशन स्ट्रैटेजी का पालन करना चाहिए. पोर्टफोलियो की रीस्ट्रक्चरिंग ओवरआल एसेट अलोकेशन को ध्यान में रखकर करना चाहिए. हालांकि, म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन कम अवधि में उत्साहजनक नहीं हो सकता है. अगर कोई अपने लांग टर्म रिस्क एडजस्टेड परफार्मेंस के आधार पर म्यूचुअल फंड का चयन करता है, तो कई फंड अभी भी लांग टर्म में बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं.

(स्टोरी: Saikat Neogi)

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