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निवेशकों के लिए SEBI की नई पहल, नई एजेंसी रखेगी शिकायतों का लेखा-जोखा

SEBI ने कहा है कि इच्छुक एजेंसी 5 अक्टूबर तक नियामक के पास अपने आवेदन जमा कर सकती हैं.

Updated: Sep 17, 2020 5:35 PM
Sebi plans to rope in an agency to process and maintain records of investor complaints received by the regulator, invites applicationImage: Reuters

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने निवेशकों से मिलने वाली शिकायतों के रिकॉर्ड मेंटेन करने और उनकी प्रॉसेस को लेकर एक एजेंसी नियुक्त करने की योजना बनाई है. एजेंसी का काम निवेशकों से फिजिकल या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से शिकायतें प्राप्त करना और उन्हें कैटेगराइज करना होगा. यह एजेंसी शिकायतों का स्टेटस ऑनलाइन ट्रैक करने की जिम्मेदारी भी संभालेगी और फॉलो अप भी करेगी. इसके अलावा एजेंसी एक्शन टेकन रिपोर्ट्स (ATRs) भी तैयार करेगी और शिकायतों का स्टेटस सेबी के प्लेटफॉर्म ‘SCORES’ पर भी अपडेट करेगी.

सेबी का SCORES एक शिकायत निवारण प्रणाली है. यह लिस्टेड एंटिटीज या इंटरमीडियरीज के खिलाफ निवेशकों की शिकायतों को रजिस्टर और ट्रैक करता है. सेबी ने एक नोटिस में ​गठित की जाने वाली एजेंसी के प्री क्वालिफिकेशन को लेकर आवेदन आमंत्रित किए हैं. एजेंसी के काम में शिकायतों को इंटरमीडियरीज या कंपनियों तक पहुंचाना और एक्नॉलेजमेंट लेटर्स को निवेशकों को भेजना भी शामिल रहेगा.

ये भी रहेगी जिम्मेदारी

इंट्रेस्टेड एजेंसी 5 अक्टूबर तक अपने आवेदन जमा कर सकती हैं. इसके अलावा चुनी गई एजेंसी, सेबी को प्राप्त होने वाली शिकायतों और ATRs को दो साल के लिए सुरक्षित रखने के लिए एक उचित स्टोरेज फैसिलिटी के लिए भी जिम्मेदार होगी. इसके अलावा उसकी जिम्मेदारी में निवेशक जागरुकता, शिक्षण और निवेशक की शिकायत निवारण से संबंधित कोई भी अन्य काम आएगा.

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कौन कर सकता है अप्लाई?

एजेंसी के लिए पात्रता मापदंड को लेकर सेबी ने कहा है कि एजेंसी के पास रजिस्ट्रार हैंडलिंग व ट्रान्सफर एक्टिविटीज या डिपॉजिटरी सर्विसेज के क्षेत्र में विशेषज्ञता होनी चाहिए या फिर निवेशकों के मामलों को संभालने का अनुभव होना चाहिए. एजेंसी ने पहले इस तरह की सेवाएं पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, पब्लिक सेक्टर बैंकों, वित्तीय संस्थानों, लिस्टेड कंपनियों आदि को उपलब्ध कराई हों. सेबी का यह भी कहना है कि कॉन्ट्रैक्टर का सालाना औसत टर्नओवर पिछले 3 सालों में कम से कम 55 लाख रुपये का होना चाहिए. साथ ही उसे मार्च 2020 तक पिछले 5 सालों में से लगातार दो साल उसे कोई नुकसान न हुआ हो.

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