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म्यूचुअल फंड: फंड मैनेजर्स, डीलर्स के लिए सेबी ने जारी किए कोड आफ कंडक्ट; कम होगा रिस्क

SEBI Code of Conduct: मार्केट रेगुलेटर सेबी ने फंड मैनेजर्स और एएमसी के डीलर्स के लिए एक आचार संहिता पेश की है.

Updated: Nov 03, 2020 3:37 PM
SEBI invitsGiven PSEs appoint an executive chairperson, 50% of the board should comprise independent directors under Regulation 17(1) of the Sebi LODR.

SEBI Code of Conduct: मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड आफ इंडिया (सेबी) ने फंड मैनेजर्स और एएमसी के डीलर्स के लिए एक आचार संहिता पेश की है. इसका उद्देश्य उन्हें अधिक जवाबदेह बनाना है. इसके अलावा, एसेट मैनेजमेंट कंपनीज (एएमसी) को अपनी म्यूचुअल फंड योजनाओं की ओर से डेट सेग्मेंट में कारोबार को क्लीयर और सेटल करने के लिए सेल्फ क्लीयरिंग मेंबर बनने की अनुमति दे दी गई है. सितंबर में सेबी ने इस बारे में प्रपोजल दिया था.

29 अक्टूबर को जारी एक अधिसूचना में, सेबी ने कहा कि एएमसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होंगे कि आचार संहिता का पालन फंड मैनेजर्स और डीलर्स द्वारा किया जा रहा है या नहीं. इसके अलावा, यह कहा गया कि आचार संहिता का कोई उल्लंघन एएमसी और ट्रस्टीज के निदेशक मंडल के ध्यान में लाया जाएगा. म्यूचूअल फंड के नियमों के अनुसार वर्तमान में, आचार संहिता का पालन करवाने के लिए एएमसी और ट्रस्टी की जरूरत होती है. साथ ही, सीईओ को कई जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं.

फंड मैनेजर्स, डीलर्स के लिए ये होगा जरूरी

  • अब फंड मैनेजर और डीलर्स ट्रस्टी को तिमाही आधार पर सेल्फ सर्टिफिकेशन प्रस्तुत करेंगे कि उन्होंने आचार संहिता का पालन किया है.
  • फंड मैनेजर के पास निवेश के निर्णय के लिए उचित और पर्याप्त आधार होने चाहिए होंगे और वही अपने द्वारा प्रबंधित फंड में निवेश के लिए जिम्मेदार होंगे.
  • इसके अलावा, फंड मैनेजर सिक्योरिटीज में खरीद और बिक्री के बारे में डिटेल जसिटफिकेशन के साथ लिखित में रिकॉर्ड रखेंगे.
  • उन्हें बताना होगा कि सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने का निर्णय और किसी भी ऐसे अधिनियम में लिप्त नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) की आर्टिफिशियल विंडो ड्रेसिंग होती है.
  • डीलर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि बेस्ट उपलब्ध शर्तों पर आर्डर एग्जीक्यूट किए जाएं.
  • फंड मैनेजर और डीलर को यह सुनिश्चित करना होगा कि यूनिट धारकों के हित में निवेश किया जाए.
  • इसके अलावा मा​र्केट पार्टिसिपेंट से उचित और पारदर्शी तरीके से व्यवहार किया जाए.
  • उन्हें अपनी संस्थाओं की नीतियों के अनुसार मौजूदा या संभावित हितों के टकराव की पहचान करनी होगी.
  • इसके अलावा वैधानिक आवश्यकताओं के अनुसार सिक्योरिटीज में सभी हितों के बारे में डिस्क्लोज करना होगा.
  • उन्हें किसी भी ऐसी काउंटर पार्टीके साथ फंड की ओर से किसी भी लेनदेन को करने की अनुमति नहीं होगी, जो स्पांसर/एएमसी/फंड मैनेजर/डीलर/सीईओ के सहयोगी तौर पर जुड़ा है.
  • वे यूनिटहोल्डर्स के धन के प्रबंधन के मामलों में किसी भी प्रलोभन की पेशकश को स्वीकार नहीं कर सकते हैं.
  • फंड मैनेजर्स और डीलर्स को हमेशा स्पष्ट, पारदर्शी और सटीक तरीके से संवाद करना होगा और केवल दर्ज किए गए मोड और चैनलों के माध्यम से बाजार के घंटों के दौरान सभी संचार का संचालन करना होगा.

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