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मल्टीकैप म्यूचुअल फंड के बदले नियम, 25% निवेश स्मालकैप व मिडकैप में जरूरी; आप पर क्या होगा असर

Multicap Mutual Funds: मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड आफ इंडिया (SEBI) ने मल्टीकैप म्यूचुअल फंड के लिए एसेट अलोकेशन के नियमों में बदलाव किया है.

Updated: Sep 14, 2020 4:18 PM
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Sebi Multicap Mutual Funds Rule: मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड आफ इंडिया (SEBI) ने मल्टीकैप म्यूचुअल फंड के लिए एसेट अलोकेशन के नियमों में बदलाव किया है. नए नियमों के मुताबिक अब फंड्स का 75 फीसदी हिस्सा इक्विटी में निवेश करना जरूरी होगा, जो कि अभी न्यूनतम 65 फीसदी है. SEBI के नए नियमों के मुताबिक मल्टी कैप फंड्स के स्ट्रक्चर में बदलाव होगा. फंडों को मिडकैप और स्मॉलकैप में 25-25 फीसदी निवेश करना जरूरी होगा. इस तरह कुल रकम का 25 फीसदी लार्ज कैप में लगाना जरूरी होगा. पहले इसे लेकर कोई सीमा निर्धारित नहीं थी. जानते हैं इस फैसले का निवेशकों व फंड हाउस पर क्या असर होगा.

बता दें कि पहले फंड मैनेजर्स अपनी मनमर्जी के हिसाब से आवंटन करते थे. अभी मल्टीकैप में लार्जकैप का वेटेज ज्यादा रहता है. जनवरी 2021 से ये नया नियम लागू होगा. मल्टी कैप फंड का AUM 1.46 लाख करोड़ रुपए है. मल्टीकैप दूसरी सबसे बड़ी इक्विटी MF कैटेगरी है. सेबी के सर्कुलर के मुताबिक सभी मौजूदा मल्‍टीकैप फंडों को नियमों का पालन करना है. म्‍यूचुअल फंड कंपनियों के संगठन एम्‍फी की ओर से जनवरी 2021 में लार्ज, मिड और स्‍मॉलकैप शेयरों की नई लिस्‍ट जारी होने के एक महीने में स्‍कीमों को रेगुलेटर के नियमों का पालन करना है.

सेबी ने क्यों बदले मल्टीकैप के नियम

सेबी का कहना है कि उसका मकसद है कि मल्टीकैप फंड्स सिर्फ नाम के मल्टीकैप न रहें. दरअसल अभी मल्टीकैप फंड्स में लार्जकैप शेयरों का ही वेअेज ज्यादा रहता है. कुछ मल्टीकैप में 80 फीसदी तक निवेश लार्ज कैप में था, कुछ स्कीम में स्मॉल कैप में निवेश शून्य या फिर बेहद कम था. ऐसे में ये स्कीम मल्टी कैप स्कीम किसी लिहाज से सही नहीं कही जा सकती है. इन वजहों से छोटी कंपनियों को बाजार से पूंजी जुटाने में दिक्कत होती है, सेबी चाहती है कि छोटी कंपनियों को भी बड़ी कंपनियों की तरह मौके मिलें.

हालांकि ये रहेगी सुविधा

हालांकि SEBI की ओर से कहा गया है कि म्यूचुअल फंड मल्टी कैप फंड को रीबैलेंस कर सकते हैं. उनके पास दूसरी स्कीम में स्विच करने का विकल्प भी होगा. वे यूनिट होल्डर्स को ये विकल्प दे सकते हैं. म्यूचुअल फंड मल्टीकैप को लार्ज कैप स्कीम से मर्ज कर सकते हैं. मल्टीकैप फंड को दूसरी कैटेगरी में बदल भी सकते हैं.

फंड हाउसेज पर क्या असर

अभी मल्‍टीकैप स्‍कीमों को सेक्‍टर और मार्केट कैप को चुनने में आजादी है. मल्टीकैप स्कीमों में फंड मैनेजर के पास विकल्प रहता है और वे जरूरत के अनुसार पोर्टफोलियो में लार्ज, मिड और स्मॉलकैप शेयरों में निवेश घटाते-बढ़ाते रहते हैं. नए नियमों के अमल में आने के बाद यह फ्लेक्सिबिलिटी खत्‍म हो जाएगी. इससे फंड मैनेजरों को एक खास तरह के मार्केट कैप के शेयरों में निवेश को बनाए रखना होगा. फिर चाहे वे प्रदर्शन कर रहे हों या नहीं.

एसेट अलोकेशन पर क्या होगा असर

अभी मल्टीकैप फंड्स के करीब 1.46 लाख करोड़ के कुल एसेट्स हैं. इसमें से लार्ज कैप में 69 फीसदी और अन्य में 31 फीसदी निवेश है. नए नियम के लागू होने से लार्ज कैप में 40,500 करोड़ रुपए के आस पास बिकवाली होगी. मिडकैप में 12,959 करोड़ रुपए आएंगे. स्मॉल कैप में भी 27,689 करोड़ रुपए आएंगे. यानी कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी बढ़ेगी और ये महंगे भी हो सकते हैं.

निवेशक क्या करें

निवेयाकों को एक्सपर्ट द्वारा इंतजार करने की सलाह दी जा रही है. उनका कहना है कि इस नियम के बाद एसेट अलोकेशन बदल जाएगा. मिडकैप और स्मालकैप में एक्सपोजर बढ़ेगा. ज्यादातर फंड हाउस को मिडकैप और स्मालकैप में खरीददारी करनी होगी. ऐसे में मिडकैप व स्मालकैप में तो तेजी आएगी, लेकिन रिस्क पहले से बढ़ेगा. हालांकि निवेयाकों को जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने की बजाए इंतजार करना चाहिए.

(BPN फिनकैप कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्‍टर एके निगम से भी बातचीत पर भी इनपुट)

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