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इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड: SEBI का बड़ा फैसला, फंड हाउस विदेश में कर सकेंगे दोगुना निवेश

Mutual Fund: मार्केट रेगुलेटर सेबी ने म्यूचुअल फंड में ओवरसीज इन्वेस्टमेंट की लिमिट बढ़ा दी है.

November 6, 2020 2:08 PM
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International Mutual Fund: ग्लोबल इक्विटीज में निवेश भी जोखिम के अधीन है लेकिन इसे डायवर्सिफिकेशन के द्वारा कम जरूर किया जा सकता है. इसका बेहतर तरीका है इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड में निवेश करना. अगर आप भी ऐसा करने की सोच रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है. मार्केट रेगुलेटर सेबी ने म्यूचुअल फंड में ओवरसीज इन्वेस्टमेंट की लिमिट बढ़ा दी है. इनडिविजुअल फंड हाउस के लिए यह लिमिट अब 30 करोड़ डॉलर से बढ़कर 60 करोड़ डॉलर हो गई है. इसके अलावा डोमेसिटक म्यूचुअल फंड द्वारा ओवरसीज ईटीएफ (ETF) में भी निवेश की लिमिट 5 करोड़ डॉलर से बढ़ाकर 20 करोड़ डॉलर कर दिया है.

अब क्या होगा नियम

सेबी ने कहा कि जो म्यूचुअल फंड हाउस विदेशी निवेश से जुड़ी नई स्कीमें या ईटीएफ पेश करने का विचार कर रहे हैं, उन्हें सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि स्कीम दस्तावेजों में उनके द्वारा निवेश की गई राशि भी बताई जाना चाहिए. एनएफओ की अंतिम तारीख से छह महीने तक इन दस्तावेजों की मान्यता होती है.

जारी सर्कुलर में सेबी ने कहा कि इसके बाद म्यूचुअल फंडों के पास विदेश बाजारों की सिक्योरिटीज या ईटीएफ में अनुपयोगी सीमा की शेष राशि का निवेश करने का अवसर नहीं होगा और इसके बाद वे इंडस्ट्री की सीमा में शामिल होंगी. नियामक ने कहा कि विदेशी बाजार या ईटीएफ में निवेश करने वाली या अनुमति प्राप्त कर चुकी स्कीमों अपने बीते तीन महीने की औसत एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) का 20 फीसदी तक का निवेश विदेशी बाजार में कर सकते हैं. फंड हाउसेज को निवेश सीमा उपयोग की मासिक रिपोर्ट सेबी को सौंपनी होगी.

इंटरनेशनल फंड का निवेशकों के लिए मायने

इंटरनेशनल फंड में निवेश कर विदेशी कंपनियों के शेयरों में ग्रोथ का फायदा ले सकते हैं. इससे पोर्अफोलियों को डाइवर्सिफाई करने में मदद मिलती है. ग्लोबल फंडों/शेयरों में निवेश से आपको रुपये में गिरावट का फायदा उठाने में भी मदद मिलती है. पिछले 35 साल में रुपया हर साल औसतन 6 फीसदी की दर से कमजोर हुआ है. इन फंडों में निवेश को उसी तरह से देखा जाता है जैसा किसी घरेलू फंड में निवेश करना. इनके लिए कोई अतिरिक्त नियम-कायदा नहीं है, जैसा कि शेयरों में निवेश के मामले में होता है.

इन फंडों का भी प्रबंधन विशेषज्ञों के द्वारा होता है, जिनके पास शेयरों और पोर्टफोलियो की पहचान, विश्लेषण और उन पर निगरानी रखने की विशेषता, टेक्नोलॉजी और वैश्विक पहुंच होती है. हालांकि, म्यूचुअल फंडों के द्वारा निवेश के कई नुकसान भी हैं, जैसे-लागू एनएवी एक दिन बाद आता है, मुद्रा का जोखिम होता है, 3 साल से कम रखने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लग जाता है.

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