विदेशी कंपनियों में निवेश के लिए भारतीय कनेक्शन की बाध्यता खत्म, सेबी ने AIF और VCF से जुड़े प्रावधानों में किया बदलाव

SEBI ने आज विदेशों में निवेश के लिए अल्टरनेटिव इंवेस्टमेंट फंड्स (AIFs) और वेंचर कैपिटल फंड्स (VCFs) से जुड़े प्रावधानों में अहम बदलाव किया है.

विदेशी कंपनियों में निवेश के लिए भारतीय कनेक्शन की बाध्यता खत्म, सेबी ने AIF और VCF से जुड़े प्रावधानों में किया बदलाव
अब विदेशी निवेश कंपनियों को भारतीय संपर्क की जरूरत खत्म कर दी गई है.

बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने आज 18 अगस्त को विदेशों में निवेश के लिए अल्टरनेटिव इंवेस्टमेंट फंड्स (AIFs) और वेंचर कैपिटल फंड्स (VCFs) से जुड़े प्रावधानों में अहम बदलाव किया है. अब निवेश के लिए विदेशी कंपनियों के भारतीय संपर्क की जरूरत खत्म कर दी गई है. नए नियमों के तहत एआईएफ देश से बाहर की कंपनियों के शेयरों में भी पैसे लगा सकते हैं. इके अलावा वीसीएफ भी कुछ शर्तों के साथ ऑफ-शोर वेंचर कैपिटल अंडरटेकिंग में निवेश कर सकते हैं.

एआईएफ ऐसे भारतीय फंड हैं जो देशी-विदेशी निवेशकों से पैसे जुटाता है और इसे पूर्व निर्धारित नीति से निवेश करता है. वहीं वीसीएफ ऐसा एआईएफ है जो मुख्य रूप से स्टार्टअप के अनलिस्टेड शेयरों; नए प्रोडक्ट्स, सर्विसेज, तकनीक, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट आधारित गतिविधियों में शामिल या एक नए बिजनेस मॉडल की नई वेंचर कैपिटल अंडरटेकिंग्स में निवेश करती है.

विदेशी कंपनियों में निवेश के लिए भारतीय कनेक्शन की बाध्यता खत्म, सेबी ने AIF और VCF से जुड़े प्रावधानों में किया बदलाव

पहले और अब में क्या हुआ है बदलाव

अभी तक के नियमों के मुताबिक एआईएफ और वीसीएफ विदेशी कंपनियों में निवेश तभी कर सकती थी, जब उन कंपनियों का कोई भारतीय कनेक्शन हो. जैसे कि किसी कंपनी का विदेशों में फ्रंट ऑफिस हो और इसका बैक ऑफिस ऑपरेशन भारत में हो. सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के नए सर्कुलर के मुताबिक अब ऐसे निवेश के लिए विदेशी कंपनियों के भारतीय कनेक्शन की बाध्यता को खत्म कर दिया गया है.

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ये सीमाएं भी हैं तय

  • नई गाइडलाइंस के मुताबिक एआईएफ या वीसीएफ को सिर्फ उन्ही विदेशी कंपनियों में निवेश की इजाजत होगी, जो ऐसे देश की होगी जिसके सिक्योरिटीज मार्केट रेगुलेटर ने इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ सिक्यरिटीज कमीशन के मल्टीलैटर मेमोरेंडम ऑफ अंडरटेकिंग पर साइन किया होगा या सेबी के साथ द्विपक्षीय एमओयू पर साइन किया हो.
  • ऐसी कंपनियों में नहीं निवेश होगा जिसका गठन ऐसे देश में हुआ हो जिसे फाइनेंशियल टास्क फोर्स (FATF) ने मनी-लांड्रिंग के हिसाब से संवेदनशील माना हो या जहां से आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग होती हो.
  • ऐसे देशों में गठित कंपनियों में भी निवेश नहीं हो सकेगा जिसने एफएटीएफ द्वारा उजागर खामियों को दूर करने में खास प्रगति नहीं की हो.

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  • एआईएफ या वीसीएफ को विदेशी निवेश की सीमा को लेकर सेबी के पास आवेदन करना होगा.
  • अगर एआईएफ/वीसीएफ पहले के निवेश को लिक्विडेट करते हैं यानी कि पैसे निकालते हैं तो इस पैसे को एलिजिबिल विदेशी कंपनियों में ही लगा सकेंगे.
  • एआईएफ या वीसीएफ को विदेशी कंपनियों से निकासी की जानकारी सेबी को तीन वर्किंग डेज में तय फॉर्मेट में देनी होगी ताकि उनकी ओवरऑल निवेश लिमिट को अपडेट किया जा सके.
  • विदेशी कंपनियों में अब तक के सभी निकासी की जानकारी सेबी को तीस दिनों के भीतर देनी होगी.

(Input: PTI)

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