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आम्रपाली ग्रुप पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा एक्शन, 3 डायरेक्टर्स को भेजा पुलिस हिरासत में

ये डायरेक्टर्स अनिल शर्मा, शिव प्रिय और अजय कुमार हैं.

October 9, 2018 7:24 PM
SC sends 3 directors of Amrapali group to police custody;says they are playing 'hide and seek'Image: PTI

रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स पूरा न कर पाने के मामले में डॉक्युमेंट्स उपलब्ध न कराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया है. कोर्ट ने आम्रपाली समूह के तीन डायरेक्टर्स को पुलिस हिरासत में भेज दिया है. ये डायरेक्टर्स अनिल शर्मा, शिव प्रिय और अजय कुमार हैं. साथ ही उन्हें समूह की 46 कंपनियों के सारे दस्तावेज फॉरेंसिक आडिटर को सौंपने का निर्देश भी दिया है. बता दें कि आम्रपाली ग्रुप पर खरीदारों को फ्लैट वक्त पर न दिए जाने का मुकदमा चल रहा है.

जस्टिस अरूण मिश्रा और ​जस्टिस उदय यू ललित की पीठ ने आम्रपाली समूह द्वारा सारे दस्तावेज फारेंसिक आॅडिटर को नहीं सौंपे जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि ये दस्तावेज सौंपे जाने तक वे पुलिस हिरासत में ही रहेंगे.

कोर्ट का गुमराह करने की कर रहे कोशिश

पीठ ने समूह के इस रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते हुये कहा, ‘‘आप न्यायालय के साथ लुका छिपी खेल रहे हैं. आप न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं.’’ शीर्ष अदालत ने आम्रपाली समूह के मकान खरीदारों की याचिकाओं पर यह आदेश दिया. आम्रपाली समूह में मकान बुक कराने वाले खरीदार करीब 42,000 फ्लैट का कब्जा चाहते हैं.

पीठ ने कहा कि डायरेक्टर्स का आचरण न्यायालय के आदेशों का घोर उल्लंघन है. पीठ ने दिल्ली पुलिस को आम्रपाली समूह के सारे दस्तावेज जब्त करने और उन्हें फारेंसिक आॅडिटर को सौंपने का निर्देश दिया है. न्यायालय ने कहा कि इन कंपनियों का एक भी दस्तावेज समूह के पास नहीं रहना चाहिए.

एनबीसीसी को दिया था रुके प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए बिल्डर चुनने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम लि (एनबीसीसी) को आम्रपाली समूह की अधर में अटकी परियोजनाओं को पूरा करने के लिये बिल्डर का चयन करने हेतु निविदा आमंत्रित करने की अनुमति दी थी. कोर्ट ने एनबीसीसी से कहा था कि वह 60 दिन के भीतर लंबित परियोजना के बारे में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करे.

ये भी था आदेश

न्यायालय ने 12 सितंबर को आम्रपाली समूह की रुकी हुई परियोजनाओं को विकसित करने लिये एनबीसीसी को नियुक्त किया था और कर्ज वसूली ट्रिब्यूनल को समूह की बगैर देनदारी वाली वाणिज्यिक संपत्ति बेचने का निर्देश दिया था. इसके अलावा कोर्ट ने एक एस्क्रो खाता खोलने का भी निर्देश दिया था, जिसमें इन संपत्तियों को बेचने से मिलने वाली रकम जमा कराई जाएगी और बाद में इसे समूह ‘ए’ और ‘बी’ श्रेणी की लंबित परियोजनाओं का निर्माण शुरू करने के लिये एनबीसीसी को दिया जाएगा. साथ ही कोर्ट ने इन सभी 46 कंपनियों और जोतिन्द्र स्टील के 2008 से बैंक खाते, इनकी बैलेंस शीट और दूसरे दस्तावेज फारेंसिक आडिटर्स को देने का निर्देश दिया था.

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