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इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड: यहां 5 साल में 4 गुना तक बढ़ी दौलत, निवेश के पहले जान लें फायदे-नुकसान

International Equity MF: इंटरनेशनल फंड या ओवरसीज फंड फंड अंतरराष्ट्रीय इक्विटी बाजारों में निवेश करते हैं.

February 15, 2021 12:21 PM
Overseas Mutual FundsOverseas Mutual Funds: इंटरनेशनल फंड या ओवरसीज फंड फंड अंतरराष्ट्रीय इक्विटी बाजारों में निवेश करते हैं.

International Equity MF: इंटरनेशनल फंड या ओवरसीज फंड फंड अंतरराष्ट्रीय इक्विटी बाजारों में निवेश करते हैं. इन फंडों का निवेश मुख्य तौर पर इक्विटी में होता है. ये डेट और अन्य एसेट क्लास में मसलन कमोडिटीज, रियल एस्टेट आदि में भी निवेश करते हैं. सेबी के नियमों के अनुसार जो म्यूचुअल फंड दूसरे देशों की इक्विटी या इक्विटी रिलेटेड इक्यूपमेंट में 80 फीसदी से अधिक निवेश करते हैं, वे इंटरनेशनल फंड की कटेगिरी में आते हैं. ग्लोबल मार्केट में निवेश करने का अवसर देने के अलावा ये फंड्स लोगों को जियोग्राफिकल डाइवर्सिफिकेशन हासिल करने में भी मदद करते हैं और कई बार अगर घरेलू करंसी में गिरावट हो तो एक हेज के रूप में काम करते हैं. पिछले 5 साल की बात करें तो इंटरनेशनल म्यूचुअल फंडों ने 32 फीसदी तक रिटर्न दिया है.

5 साल में 4 गुना तक बढ़ा पैसा

इडेलवाइस ग्रेटर चाइना इक्विटी आफ शोर फंड

5 साल का रिटर्न: 32 फीसदी
1 लाख की 5 साल में वैल्यू: 4 लाख
कम से कम निवेश: 5000 रुपये
एसेट्स: 1033 करोड़ (31 जनवरी, 2021)

PGIM इंडिया ग्लोबल इक्विटी अपॉर्चुनिटी फंड

5 साल का रिटर्न: 27 फीसदी
1 लाख की 5 साल में वैल्यू: 3.28 लाख
कम से कम निवेश: 5000 रुपये
एसेट्स: 769 करोड़ (31 जनवरी, 2021)

फ्रैंकलिन इंडिया फीडर फ्रैंकलिन US अपॉर्चुनिटी फंड

5 साल का रिटर्न: 25 फीसदी
1 लाख की 5 साल में वैल्यू: 3.08 लाख
कम से कम निवेश: 5000 रुपये
एसेट्स: 2733 करोड़ (31 जनवरी, 2021)

ICICI प्रू US ब्लूचिप इक्विटी फंड

5 साल का रिटर्न: 19 फीसदी
1 लाख की 5 साल में वैल्यू: 2.40 लाख
कम से कम निवेश: 5000 रुपये
एसेट्स: 1075 करोड़ (31 जनवरी, 2021)

(source: value research)

भारत से कई गुना बाजार

भारत भले ही टॉप 5 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो, लेकिन भारत की जीडीपी दुनिया की जीडीपी की सिर्फ 3 फीसदी के ही आस पास है. यानी हम करीब 97 फीसदी बाजार को अनदेखा करते हैं. इंटरनेशनल म्यूचुअल फंडों के जरिए निवेशक भारत से कई गुना बाजार का फायदा उठा सकते हैं. इसके जरिए सीधे ग्लोबल इक्विटीज में निवेश कर सकते हैं. इनमें निवेश से किसी भी निवेशक का पोर्टफोलियो डायवर्सिफाई हो जाता है, जिससे जेखिम कम करने में मदद मिलती है. कई बार अगर घरेलू करंसी में गिरावट हो तो एक हेज के रूप में काम करते हैं. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेश का आकर्षण बढ़ रहा है. इन फंडों में निवेश को उसी तरह से देखा जाता है जैसा किसी घरेलू फंड में निवेश करना. इन पर लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) लागू नहीं होता.

लेकिन ध्यान रहें ये बातें

अगर आपने किसी देश के इक्विटी बाजार में पैसा लगाया है तो उस देश में किसी निगेटिव इश्यू के चलते आपके निवेश पर असर पड़ सकता है. इसलिए पैसा लगाने के पहले फंड से जुड़े देश के साथ जुड़े रिस्क की जानकारी जुटा लें. करंसी में होने वाले मूवमेंट का इनके रिटर्न पर असर पड़ता है. मसलन अगर रुपया मजबूत होता है तो इन फंड का रिटर्न घट सकता है. वहीं रुपये के कमजोर होने से इनका रिटर्न बढ़ सकता है. लागू एनएवी एक दिन बाद आता है, मुद्रा का जोखिम होता है, तीन साल से कम रखने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लग जाता है.

निवेश का तरीका

कुछ इंटरनेशनल फंड सीधे इंटरनेशनल इक्विटी में निवेश करते हैं. वहीं कुछ फंड हैं जो इंटरनेशनल इंडेक्स मसलन नैसडैक या एसएंडपी 500 में निवेश करते हैं. कुछ ऐसे भी हैं जो फीडर फंड के रूप में काम करते हैं और इंटरानेशनल मार्केट में एक आइडेंटिफाई म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं. फिर फंड ऑफ फंड्स हैं जो इंटरनेशनल फंड की यूनिट में निवेश करते हैं.

(नोट: BPN फिनकैप के डायरेक्टर एके निगम से बात चीत पर आधारित)

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