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FY21 की पहली छमाही में 70% बढ़ा चावल का निर्यात, चीन और अफ्रीकी देशों से रही जोरदार डिमांड

महामारी के बीच भारत से चावल के निर्यात में 70 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इस बढ़ोतरी के साथ चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 75 लाख टन चावल का निर्यात हुआ.

November 26, 2020 7:55 AM
rice exports increased amid pandemic non basmati rice demand shipment demand highचीन ने भी पिछले महीने भारत से चावल खरीद बढ़ा दिया.

महामारी के बीच भारत से चावल के निर्यात में 70 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इस बढ़ोतरी के साथ चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 75 लाख टन चावल का निर्यात हुआ. चावल के निर्यात में बढ़ोतरी की प्रमुख वजह पश्चिम अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया देशों से मजबूत मांग के कारण गैर-बासमती का दोगुना शिपमेंट रहा. चावल के निर्यात में बढ़ोतरी को मौद्रिक तौर पर देखें तो डॉलर के रूप में निर्यात 36 फीसदी बढ़कर 108 करोड़ डॉलर हो गया. हालांकि रुपये में यह बढ़ोतरी अधिक रही. रुपये के रूप में चावल निर्यात 43 फीसदी बढ़कर 30,609 करोड़ रुपये पहुंच गया.

निर्यातकों का कहना है कि निर्यात का यह आंकड़ा और भी अधिक होता, अगर माल की आवाजाही बाधारहित जारी रहती. इस वित्त वर्ष में चावल के निर्यात में 60 फीसदी की बढ़ोतरी यानी 1.55 करोड़ चावल के निर्यात का अनुमान है.

गैर-बासमती चावल के शिपमेंट में बढ़ोतरी

राइस एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट बीवी कृष्णा राव का कहना है कि जिस तरह से चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में गैर-बासमती चावल के शिपमेंट में बढ़ोतरी रही है, उससे अनुमान है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में इनका निर्यात 1 करोड़ टन हो सकता है. यह एक रिकॉर्ड होगा. इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में गैर-बासमती का शिपमेंट 50.8 लाख टन रहा जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही में 50.4 लाख टन का निर्यात हुआ था. इससे पहले वित्त वर्ष 2017-18 में 86 लाख गैर-बासमती चावल का निर्यात हुआ था.

अफ्रीकी देशों ने बढ़ाई खरीद

पश्चिम अफ्रीका के बेनिन, केप वेर्डे, घाना, नाइजीरिया, सेनेगल और सिएरा लियोन जैसे देश पारंपरिक तौर पर भारत से गैर-बासमती चावल खरीदते रहे हैं. राव का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान डॉलर के मुकाबले यूरो मजबूत हुआ जिसके कारण इन देशों ने भारत के साथ खरीद बढ़ा दी. ये देश वेस्ट अफ्रीकन सीएफए फ्रैंक मुद्रा में भुगतान करते हैं. वेस्ट अफ्रीकन करेंसी 23 मई को डॉलर के मुकाबले 626 के भाव पर था जो इस समय 553 पर है.

चीन ने भी बढ़ाई खरीदारी

चीन ने भी पिछले महीने भारत से चावल खरीद बढ़ा दिया है. उसने 100 फीसदी टूटे गैर-बासमती चावल का ऑर्डर किया क्योंकि यह वैश्विक बाजार में सबसे सस्ता है. इस साल अप्रैल से सितंबर के बीच चीन को सिर्फ 84 टन चावल का निर्यात हुआ था. चीन दुनिया का सबसे बडा़ चावल का उत्पादक और आयातक देश है और उसने भारत से चावल के आयात पर प्रतिबंध लगाया हुआ था जिसे कुछ साल पहले यह प्रतिबंध हटाया था लेकिन इसके मानक कड़े कर दिए.

कोरोना महामारी ने खत्म की प्रतिद्वंद्विता

थाइलैंड में चावल के कम उत्पादन और कोरोना महामारी के बीच उन्होंने अपने देश की खाद्य सुरक्षा निर्यात के लिए जो नीतियां बनाईं, उससे भारत को चावल का निर्यात बढ़ाने में मदद मिली. राव के मुताबिक Parboiled Rice (धान को आंशिक रूप से उबालकर सुखाने के बाद इस से निकाला हुआ चावल) के मामले में भारत का एकमात्र प्रतिद्वंद्वी थाइलैंड था और उसके हटने के बाद यह भारत के लिए फायदेमंद रहा. इसके अलावा इस चावल की इंडोनेशिया और मलेशिया से भी मांग रहती है और वे इसे पहले थाइलैंड से खरीदते थे. गैर-बासमती शिपमेंट में इस चावल की हिस्सेदारी 30-40 फीसदी हिस्सेदारी है.

मध्य-पूर्व देशों से बासमती चावल की मांग

बासमती चावल के भी निर्यातकों को उम्मीद है इस वित्त वर्ष में पिछली बार के मुकाबले शिपमेंट 15-20 फीसदी अधिक रहेगा. पिछले वित्त वर्ष में 45 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था. इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में इनका निर्यात 28 फीसदी बढ़कर 24 लाख टन रहा. एक निर्यातक का कहना है कि अगर अब इस वित्त की दूसरी छमाही में पिछली बार की समान अवधि के बराबर ही बासमती चावल का निर्यात हुआ तो भी पूरे वित्त वर्ष में निर्यात पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 12 फीसदी अधिक रहेगा. मध्य-पूर्व देशों से बढ़ती मांग को लेकर निर्यातक आश्वस्त हैं कि अगले चार-पांच महीनों में इसका निर्यात बेहतर रहेगा.

इस साल कम भाव पर निर्यात हुए चावल

रेलवे ने हाल ही में चावल के निर्यातकों को बहुत समस्या हुई थी क्योंकि लॉकडाउन पीरियड के दौरान एफसीआई को अनाज के ट्रांसपोर्टेशन में प्रायोरिटी दी जा रही थी. निर्यात का आंकड़ा जरूर बढ़ा है लेकिन प्रत्येक टन की कीमत इस साल कम हुई है. इसकी वजह यह रही कि कई निर्यातकों ने अधिक से अधिक ऑर्डर पाने के लिए इसके भाव कम किए. बासमती चावल के भाव चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान 1064 डॉलर (78,808 रुपये) प्रति टन से गिरकर 890 डॉलर (65,920 रुपये) प्रति टन रह गया. गैर बासमती का चावल 403 डॉलर (29,849 रुपये) प्रति टन से गिरकर 385 डॉलर (28,516 रुपये) प्रति टन रह गया.
(Article: Prabhudatta Mishra)

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