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13 साल पुराने मामले में SAT के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी रिलायंस इंडस्ट्रीज

तेरह साल पुराने एक मामले में सेबी ने रिलायंस के खिलाफ 2017 में एक आदेश जारी किया था.

Updated: Nov 05, 2020 3:36 PM
Currently, new gas fields (those other than the nominated fields) make up for less than fifth of the natural gas produced in the country, but these are expected to increase their share significantly in the coming years.Currently, new gas fields (those other than the nominated fields) make up for less than fifth of the natural gas produced in the country, but these are expected to increase their share significantly in the coming years.

रिलायंस इंडस्ट्रीज सिक्योरिटी अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) द्वारा अपनी याचिका खारिज किए जाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी. रिलायंस ने ट्रिब्यूनल में सेबी के एक फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी. बाजार नियामक सेबी ने गलत कारोबारी गतिविधियों के कारण रिलायंस और उसकी 12 प्रमोटर ग्रुप एंटिटीज को इक्विटी डेरिवेटिव में सिक्योरिटी बाजार से संबंधित कोई सौदा करने पर रोक लगा दिया था.

2:1 से एसएटी ने खारिज किया याचिका

सेबी के आदेश के खिलाफ रिलायंस की याचिका को एसएटी ने 2:1 के बहुमत आदेश से खारिज किया है. सेबी का यह आदेश 24 मार्च 2017 का है. यह नवंबर 2007 में रिलायंस पेट्रोलियम लिमिटेड (आरपीएल) के शेयरों की बिक्री से जुड़ा मामला है. यह जानकारी मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने स्टॉक एक्सचेंज को नियामकीय फाइलिंग के दौरान दी है.

यह है आरपीएल के शेयरों की बिक्री का मामला

सेबी ने 24 मार्च 2017 एक आदेश के जरिए न सिर्फ रिलायंस और उसकी 12 प्रमोटर ग्रुप एंटिटीज को इक्विटी डेरिवेटिव्स में कारोबार पर रोक लगा दिया था बल्कि रिलायंस को 447 करोड़ रुपये ब्याज के साथ जमा करने के निर्देश भी जारी किए थे. रिलायंस ने मार्च 2007 में रिलायंस पेट्रोलियम लिमिटेड में अपनी 4.1 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया था. यह एक लिस्टेड सब्सिडियरी थी जिसका आगे चलकर 2009 में रिलायंस में विलय हो गया. आरपीएल के शेयर भाव को नीचे गिरने से बचाने के लिए इक्विटी की बिक्री पहले फ्यूचर मार्केट में हुई और उसके बाद स्पॉट मार्केट में इसकी बिक्री हुई.

कानूनी सलाह लेकर जाएगी सुप्रीम कोर्ट

रिलायंस का कहना है कि उसने जो भी सौदे किए हैं, वे सभी जेनुइन और बोना फाइड (भरोसे वाले मतलब बिना किसी फर्जीवाड़े के) हैं. इन सौदौं में किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है. रिलायंस ने कहा कि 2007 में आरपीएल के शेयरों की बिक्री के दौरान किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है. रिलायंस ने कहा है कि वह एसएटी द्वारा दिए गए फैसले का अभी अध्ययन करेगा. उचित रूप से कानूनी सलाह लेकर कंपनी सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी. रिलायंस को भरोसा है कि वहां उसकी बात सही साबित होगी.

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