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सऊदी अरामको के साथ डील लटकने से निवेशक निराश! AGM के बाद RIL का शेयर ऊपरी स्तरों से 137 रुपये टूटा

रिलायंस इंडस्ट्रीज के 43वें एजीएम के बाद आरआईएल का शेयर ऊपरी स्तरों से 8 फीसदी टूटकर बंद हुआ.

Updated: Jul 15, 2020 4:39 PM
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रिलायंस इंडस्ट्रीज के 43वें एजीएम यानी सालाना मीटिंग से पहले आज कंपनी के शेयरों में शानदार तेजी आई. कारोबार के दौरान शेयर 3 फीसदी से ज्यादा मजबूत होकर 1979 रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया. लेकिन एजीएम के बाद निवेशकों ने इसमें जमकर मुनाफा वसूली की. कारोबार के अंत में शेयर अपने ऊपरी स्तरों से 8 फीसदी टूटकर बंद हुआ. एजीएम में मुकेश अंबानी ने एलान किया कि कोरोना महामारी के चलते व्यवधान आने से आरआईएल के आयल टू केमिकल बिजनेस के लिए सऊदी अरामको के साथ डील नहीं हो पाई. इससे भी निवेशकों को निराशा हुई है.

23 मार्च के बाद 126% चढ़ा था शेयर

23 मार्च को शेयर 867 रुपये के भाव पर चला गया था. कोविड 19 की वजह से बाजार में जो गिरावट आई, उसमें आरआईएल की भी पिटाई हुई. उसके बाद से आज के रिकॉर्ड हाई 1979 रुपये तक देखें तो 4 महीने से कम समय में शेयर में 126 फीसदी से ज्यादा तेजी आई.

अरामको डील पर थी नजर

बता दें कि आरआईएल के एजीएम के पहले बाजार को उम्मीद थी कि मुकेश अंबानी इस सालाना मीटिंग में सऊदी अरामको के साथ डील को लेकर बड़ा एलान कर सकते हैं. एक्सपर्ट ने भी ऐसी ही उम्मीद लगाई थी. एक्सपर्ट का मानना था कि पिछले कुछ महीनों से आरआईएल ने अपने टेलिकॉम आर्म जियो और रिटेल बिजनेस पर जमकर फोकस किया था. दोनों बिजनेस में मजबूती आने के बाद अब आरआईएल का फोकस अपने आयल टु केमिकल बिजनेस पर होगा और इसमें अरामको के साथ डील बड़ी भूमिका निभा सकती है. आरआईएल ने अपनी एनुअल रिपोर्ट में भी कहा है कि सऊदी अरामको के साथ डील पर बात चीत चल रही है. डील होने के बाद सऊदी अरामको की एडवासंमेंट टेक्नोलॉजी का लाभ आरआईएल को मिलेगा.

क्या थी योजना

पहले दोनों कंपनियों में जो बात चल रही थी, उसके अनुसार सऊदी अरब की कंपनी सऊदी अरामको, रिलायंस इंडस्ट्रीज के रिफायनरी और केमिकल कारोबार में 20 फीसदी हिस्सेदारी खरीद सकती है. इसके लिए अरामको 75 अरब डॉलर (करीब 5,32,466 करोड़ रुपए) का निवेश करना होगा. आरआईएल की 42वीं सालाना आम बैठक में मुकेश अंबानी ने कहा था कि यह रिलायंस के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) होगा.

इस निवेश के तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज की गुजरात के जामनगर स्थित दो रिफायनरियों में सऊदी अरामको को रोजाना 5 लाख बैरल या सालाना 2.5 करोड़ टन कच्चे तेल की आपूर्ति करनी थी. जामनगर की इन दो रिफायनरियों की कुल उत्पादन क्षमता सालाना 6.82 करोड़ टन है.

पहले भी डील लटकने की आई थी खबर

पहले भी दोनों कंपनियों में डील लटकने की खबर आ चुकी है. ऐसी रिपोर्ट आई थी कि डील स्ट्रक्चर और वैल्युएशन को लेकर दोनों कंपनियों में बात नहीं बनी है. सूत्रों से खबर आई थी कि वैल्युएशन को लेकर सहमति नहीं बन पाने की वजह से बातचीत रुकी है. रिलायंस समूह के 2,88,243 करोड़ रुपये के कर्ज में से कुछ हिस्से को एसपीवी में ट्रांसफर किए जाने की बात से भी सउदी कंपनी सहमत नहीं हुई. हालांकि तब दोनों कंपनियों की ओर से कोई बयान नहीं आया था.

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