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आरबीआई ने एक बार फिर दिया निर्देश, पेमेंट डेटा देश में ही रखे जाएं

अगर भारतीयों से संबंधित कोई पेमेंट प्रॉसेस विदेशों में होता है तो भुगतान से जुड़े हुए डेटा को भी 24 घंटे के भीतर भारत वापस लाना होगा.

June 26, 2019 8:10 PM
data, data flow, data localisation, data protection rule, data protection bill india, data localisation bill, ravishankar prasad, it minister, rbi, rbi payment dataअप्रैल 2018 में इससे जुड़े निर्देश जारी हुए थे.

रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को कहा कि देश के भुगतान से संबंधित सभी आंकड़ों को केवल भारत में ही रखना होगा. आरबीआई का कहना है कि अगर भारतीयों से संबंधित कोई पेमेंट प्रॉसेस विदेशों में होता है तो भुगतान से जुड़े हुए डेटा को भी 24 घंटे के भीतर भारत वापस लाना होगा. केंद्रीय बैंक ने भुगतान प्रणाली परिचालकों (PSO) की तरफ से क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों पर बार-बार उठने सवालों के संदर्भ में तय स्पष्टीकरण में कहा है, ‘‘धन के भुगतान का पूरा आंकड़ा केवल भारत में रखा जाएगा.’’

अप्रैल 2018 में इससे जुड़े निर्देश हुए थे जारी

आरबीआई ने ‘भुगतान प्रणाली डेटा रखे जाने’ को लेकर अप्रैल 2018 में निर्देश जारी किया था. उसमें केंद्रीय बैंक ने सभी पीएसओ को यह सुनिश्चित करने का था कि छह महीने के भीतर भुगतान प्रणाली से जुड़े सभी डेटा केवल भारत में ही स्थित सिस्टम्स में रखे जायें. बार-बार पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) में यह भी कहा गया है कि अगर पीएसओ चाहता है तो भारत के बाहर भुगतान सौदे को लेकर कोई पाबंदी नहीं है. आरबीआई ने कहा, ‘‘यदि भुगतान की प्रक्रिया विदेश में होती है तो वहां उससे संबंधित डेटा को हटा दिया जाए और उसे भुगतान प्रक्रिया पूरी होने के एक कारोबारी दिवस या 24 घंटे के भीतर, जो भी पहले हो, भारत वापस लाया जाए.’’

डेटा विदेश ले जाने की छूट देने के पक्ष में सरकार

उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक में डेटा को देश में ही रखे जाने के मुद्दे को कई ई-वाणिज्य कंपनियों ने उठाया था. इससे पहले सूचना प्रौद्यागिकी (आईटी) एवं दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक प्रश्न के जवाब में कहा था कि केंद्र सरकार ने व्यक्तिगत सूचनाओं के संरक्षण से संबंधित कानून का मसौदा तैयार कर लिया है और इसके तहत परस्पर आदान-प्रदान के आधार पर सूचनाओं को देश से बाहर ले जाने की मंजूरी दी जा सकती है. उनका कहना था कि डिजिटल दुनिया में डेटा को एक देश से दूसरे देश ले जाने की कुछ हद तक छूट होनी चाहिये लेकिन यह परस्पर आदान-प्रदान और समझ पर आधारित होना चाहिये.
स्थानीय डेटा को विदेश ले जाने की मिल सकती है मंजूरी

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