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एनपीए की पहचान के लिए RBI का नया सर्कुलर जारी, पहले वाले को सुप्रीम कोर्ट ने किया था रद्द

आरबीआई ने बैड लोन्स की समस्या को सुलझाने के लिए 12 फरवरी को एक सर्कुलर जारी किया जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2 अप्रैल को रद्द कर दिया था.

June 7, 2019 8:31 PM
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बैड लोन्स के रिजॉल्यूशन के लिए केंद्रीय बैंक RBI ने शुक्रवार को नया फ्रेमवर्क जारी किया है. यह उस पुराने सर्कुलर का स्थान लेगा जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2 अप्रैल को रद्द कर दिया था. पुराने फ्रेमवर्क के तहत लोन के रीपेमेंट में एक दिन की भी देरी होने पर बैंकों को रिजॉल्यूशन प्रॉसेस या रिस्ट्रक्चिरिंग ऑफ लोन्स हर हाल में शुरू करने को कहा गया था. अब नए सर्कुलर के तहत इस प्रकार के लोन के रीपेमेंट में देरी होने पर 30 दिनों के भीतर अकाउंट की समीक्षा करनी होगी और लोन डिफॉल्ट होने से पहले रिजॉल्यूशन प्रक्रिया शुरू करनी होगी. आरबीआई का नया सर्कुलर तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है.

स्ट्रेस खाते का एसएमए के तहत होगा वर्गीकरण

आरबीआई के नए सर्कुलर के तहत बैड लोन्स की जल्द पहचान कर उसकी रिपोर्टिंग करनी होगी और एक समय के भीतर उसका रिजॉल्यूशन करना होगा. आरबीआई ने कहा है कि लेंडर्स को लोन खाते में किसी भी प्रकार का स्ट्रेस की आशंका लगे तो उसे तुरंत स्पेशल मेंशन अकाउंटस (SMA) के तहत वर्गीकृत करे.

लेंडर्स को कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार

आरबीआई ने कहा है कि अगर किसी भी लेंडर्स, फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशंस, स्माल फाइनेंस बैंक या एनबीएफसी ने कर्जदार को डिफॉल्ट घोषित कर दिया है तो कर्जदार के खाते का डिफॉल्ट होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर ही रिव्यू करना अनिवार्य होगा. लेंडर्स रिजॉल्यूशन स्ट्रेटजी, रिजॉल्यूशन प्लान की प्रकृति और उसे लागू करने के तरीके के बारे में निर्णय ले सकेंगे. इसके अलावा रिजॉल्यूशन प्रॉसेस को लागू करने से पहले सभी लेंडर्स को रिव्यू पीरियड के भीतर ही इंटर-क्रेडिटर एग्रीमेंट (आईसीए) पर साइन करने होंगे. इसके अलावा लेंडर्स को इनसॉल्वेंसी या रिकवरी की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का पूरा अधिकार दिया गया है.

12 फरवरी को जारी हुआ था पुराना सर्कुलर

आरबीआई ने इससे पहले बैड लोन्स की समस्या को सुलझाने के लिए 12 फरवरी को एक सर्कुलर जारी किया था. इसके तहत लोन के रीपेमेंट में एक दिन की भी देरी होने पर बैंकों को 180 दिनों के भीतर समाधान खोजने को कहा गया था. इसके अलावा बैंकों को बैंकरप्सी कोर्ट्स जाने का भी विकल्प दिया गया था. इसे सुप्रीम कोर्ट ने 2 अप्रैल को रद्द कर दिया था.

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