Repo Rate Hike Effect: RBI के फैसले से महंगा होगा कर्ज, लेकिन कुछ लोगों के हाथों में बढ़ेगी नगदी

Repo Rate Hike Effect: रेपो रेट में बढ़ोतरी से लोन लेने वालों पर बोझ बढ़ेगा, लेकिन कुछ लोगों को डिपॉजिट रेट बढ़ने से फायदा भी होगा.

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रेट हाइक का फैसला ऐसे समय में आया है जब देश में महंगाई चरम पर है.

Repo Rate Hike Effect: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने आज रेपो रेट में 40 बेसिस प्वाइंट्स (0.40 फीसदी) की बढ़ोतरी का ऐलान किया है. रेट में इस बढ़ोतरी का आम लोगों पर अलग-अलग तरह से असर पड़ेगा. कुछ लोगों के लिए यह जेब ढीली करने वाला फैसला है, लेकिन कुछ लोगों के हाथों में इस रेट बढ़ोतरी की वजह से ज्यादा नगदी भी आ सकती है. पिछले दो सालों में न सिर्फ होम लोन या कार लोन पर वसूली जाने वाली ब्याज दरें बेहद कम हो गईं, बल्कि बैंकों की तरफ से दी जाने वाली एफडी-आरडी की ब्याज दरें भी काफी घट चुकी हैं. आरबीआई के फैसले से इस स्थिति में बदलाव आने की उम्मीद है.

रिजर्व बैंक ने अगस्त 2018 के बाद पहली बार नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की है. रेपो रेट को 4% से बढ़ाकर 4.40% करने का यह फैसला मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की अचानक हुई बैठक में लिया गया. रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज इसकी घोषणा की. आरबीआई का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश में महंगाई चरम पर है. कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) पिछले तीन महीनों से आरबीआई द्वारा तय सीमा से ऊपर है. सरकार ने रिजर्व बैंक को महंगाई दर 2 से 6 फीसदी के दायरे में रखने का लक्ष्य दिया हुआ है.

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RBI के रेट हाइक का ऐसे होगा असर

  • रेपो रेट में बढ़ोतरी के चलते आम लोगों के लिए कर्ज महंगा हो जाएगा क्योंकि बैंकों की कर्ज की लागत बढ़ेगी. रेपो रेट वह दर होती है जिस पर बैंक आरबीआई से पैसे उधार लेते हैं. जब यह दर बढ़ गई है तो बैंकों को कर्ज ऊंचे रेट पर मिलेगा. लिहाजा वे भी अपने ग्राहकों से ज्यादा दर से ब्याज वसूलेंगे. आरबीआई के इस फैसले से आने वाले समय में होम लोन, ऑटो लोन या पर्सनल लोन लेना महंगे हो जाएंगे. इसके अलावा जिन लोगों ने फ्लेक्सी दरों पर पहले से लोन लिया हुआ है, उनकी ईएमआई भी बढ़ जाएगी.
  • दूसरी तरफ बैंक ग्राहकों को एफडी-आरडी जैसी डिपॉजिट्स के लिए पहले से अधिक ब्याज ऑफर कर सकते हैं. कोरोना काल में बैंकों द्वारा डिपॉजिट पर दी जाने वाली ज्यादातर ब्याज दरें इतनी कम हो चुकी हैं कि ऊंचे इंफ्लेशन के कारण उनका रियल रेट ऑफ रिटर्न निगेटिव हो चुका है. आरबीआई के रेट बढ़ाने के फैसले के बाद अब बैंक अपने डिपॉजिट रेट बढ़ा सकते हैं, जिससे बचत करने वालों के लिए रिटर्न बढ़ने की उम्मीद की जा सकती है.

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करीब चार साल बाद बढ़ी दरें

रिजर्व बैंक ने अगस्त, 2018 के बाद पहली बार नीतिगत दर में बढ़ोतरी की है. इससे पहले पिछले महीने अप्रैल में लगातार दसवीं बार एमपीसी की बैठक में दरों को स्थिर रखने का फैसला किया गया था. रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि महंगाई दर छह प्रतिशत के दायरे से ऊपर बनी हुई है. अप्रैल महीने में भी इसके ऊंचे रहने की संभावना है. मार्च महीने में खुदरा मुद्रास्फीति 6.9 प्रतिशत रही.

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