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रिजर्व बैंक ने 2018-19 की पहली छमाही के लिये मुद्रास्फीति लक्ष्य घटाया

रिजर्व बैंक ने खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी तथा इस साल मानसून सामान्य रहने के आसार के बीच चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के लिये खुदरा मुद्रास्फीति का अपना अनुमान पिछली बार की तुलना में घटा कर 4.7 - 5.1 प्रतिशत कर दिया है।

Updated: Apr 05, 2018 5:19 PM
भारतीय रिजर्व बैंक, आरबीआई बैंक, मुद्रास्फीति, ब्याज दर, मौद्रिक नीति समिति, रेपो दरफरवरी में मौद्रिक नीति समीक्षा में इसके 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था।

रिजर्व बैंक ने खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी तथा इस साल मानसून सामान्य रहने के आसार के बीच चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के लिये खुदरा मुद्रास्फीति का अपना अनुमान पिछली बार की तुलना में घटा कर 4.7 – 5.1  प्रतिशत कर दिया है। फरवरी की द्वै मासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में 2018-19  की पहली छमाही में मुद्रास्फीति 5.1  से 5.6  प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। चालू वित्त वर्ष की अपनी पहली मौद्रिक नीति समीक्षा में रिजर्व बैंक ने रेपो दर में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया और इसे 6  प्रतिशत पर बरबरार रखा।

रेपो दर वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। रिजर्व बैंक ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति ( एमपीसी)  का निर्णय तटस्थ मौद्रिक नीति के रुख के अनुरूप है। यह वृद्धि को समर्थन देने के साथ मध्यम अवधि में दो प्रतिशत घट- बढ़ के साथ उपभोक्ता मूल्य सूचकांक( सीपीआई)  आधारित मुद्रास्फीति 4  प्रतिशत के लक्ष्य के अनुकूल है। इसके अलावा उसने 31  मार्च को समाप्त पिछले वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही के लिये भी मुद्रास्फीति परिदृश्य को कम कर 4.5  प्रतिशत कर दिया है। फरवरी में मौद्रिक नीति समीक्षा में इसके 5.1  प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था।

वित्त वर्ष2018-19  की दूसरी छमाही में मुद्रास्फीति परिदृश्य 4.4  प्रतिशत रहने का अनुमान रखा गया है जो पिछले अनुमान 4.5  से 4.6  प्रतिशत से कम है।आरबीआई ने कहा, ‘‘ जनवरी- फरवरी में वास्तविक मुद्रास्फीति औसतन4.8  प्रतिशत रही। यह सब्जियों की कीमतों में उल्लेखनीय नरमी तथा ईंधन समूह की मुद्रास्फीति में कमी का नतीजा है। उपलब्ध सूचना के अनुसार सब्जियों के दाम में मार्च में भी गिरावट दर्ज की गयी है।’’ केंद्रीय बैंक के अनुसार कई कारक मुद्रास्फीति परिदृश्य को प्रभावित कर रहे हैं। उसने कहा, ‘‘ फरवरी- मार्च में खाद्य वस्तुओं के दाम में तीव्र गिरावट से2018-19  की पहली छमाही में मुद्रास्फीति फरवरी के अनुमान से कम रहने की संभावना है। हालांकि पहली छमाही में खाद्य वस्तुओं के दाम में तेजी की आशंका है।’’

रिजर्व बैंक के अनुसार उसे उम्मीद है कि कुल मिलाकर मानसून सामान्य रहने के अनुमान तथा सरकार के प्रभावी आपूर्ति प्रबंधन से खाद्य मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहना चाहिए। हाल की अवधि में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम में उतार- चढ़ाव देखे गये।  मार्च के दूसरे पखवाड़े में इसमें और तेजी आयी। यह स्थिति तब है जब शेल उत्पादन उम्मीद से अधिक है। इससे कच्चे तेल की कीमतों का परिदृश्य प्रभावित हुआ है। रिजर्व बैंक ने कहा, ‘‘ चालू आकलन में घरेलू मांग आने वाले समय में मजबूत होने की संभावना है। इन कारकों को गौर करने पर2018-19  की पहली छमाही में खुदरा मुद्रास्फीति लक्ष्य संशोधित कर4.7  से5.1  प्रतिशत तथा दूसरी छमाही में4.4  प्रतिशत किया जाता है। इस आकलन में केंद्र सरकार के कर्मचारियों का एचआरए( मकान किराया भत्ता) प्रभाव शामिल है जिसके ऊपर जाने का जोखिम है।’’

 

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