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एनसीएलएटी में अभी फैसला पेंडिंग, आरबीआई ने फिर भी जारी कर दिया सर्कुलर

आरबीआई ने सभी बैंकों को पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के परिणामों में आईएलएफएस को दिए गए कर्ज का उल्लेख करने का निर्देश दिया है.

April 24, 2019 10:01 PM
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आरबीआई ने सभी बैंकों को पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के परिणामों में आईएलएफएस को दिए गए कर्ज का उल्लेख करने का निर्देश दिया है. केंद्रीय बैंक ने यह निर्देश ऐसे समय में दिया है जब नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एलसीएलएटी) में आईएलएफएस को दिए गए कर्ज पर एक पुनर्विचार याचिका पर फैसला आना अभी बाकी है. एनसीएलएटी ने अपने फैसले में बैंकों से वित्तीय संकट से जूझ रही इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंसियल सर्विसेज (आईएलएंडएफएस) समूह को दिए गए कर्ज को एनपीए के तौर पर दिखाने से मना किया था. एनसीएलएटी ने 25 फरवरी को एक सर्कुलर जारी कर कहा था कि बिना उसकी अनुमति के आईएलएफएस ग्रुप को दिए गए कर्ज को एनपीए में नहीं दिखाया जा सकता है.

एनसीएलएटी के फैसले पर आरबीआई की रिव्यू पिटीशन

आरबीआई ने एनसीएलएटी के इस फैसले के खिलाफ 19 मार्च को रिव्यू पिटीशन दाखिल किया था. ट्रिब्यूनल आरबीआई की इस मांग को लेकर कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री से सुझाव मांगा है. एनसीएलएटी के आदेश पर आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस महीने की शुरुआत में बताया था कि उसने इस आदेश में संशोधन के लिए याचिका दायर किया है.

आईएलएंडएफएस के ऊपर करीब 94 हजार करोड़ का कर्ज

इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंसियल सर्विसेज (आईएलएंडएफएस) और उसके समूह की 348 कंपनियों पर 94 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है. इसमें से 54 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बैंकों का है. पिछले साल अगस्त से यह समूह भुगतान में डिफॉल्ट करने लगा. इसके बाद अक्टूबर में सरकार ने इसके बोर्ड को अपने हाथ में ले लिया और उदय कोटक की अध्यक्षता में नए बोर्ड का गठन किया. आईएलएंडएफएस समूह

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