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आलू @ 40 रुपये! खपत बढ़ी, आवक 30% तक घटी; दिवाली के बाद भाव नीचे आने की उम्मीद

अधिमास और नवरात्र के कारण आलू में तेजी बनी हुई है.

Updated: Oct 07, 2020 5:33 PM
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आलू की बढ़ती महंगाई का असर आम आदमी की थाली के बजट पर पड़ रहा है. खुदरा बाजार में भाव 40 रुपये प्रति किलो के आसपास चल रहे हैं. आमतौर पर बारिश के बाद सब्जियों के भाव कम हो जाते हैं लेकिन इस बार उनके भाव भी कम नहीं हुए हैं और आलू भी लगातार ऊंचे भाव पर बना हुआ है. खुदरा दुकानदारों का कहना है कि मंडी में ही आलू की आवक कम हो रही है, जिसके चलते भाव अभी नीचे नहीं आ रहे हैं. वहीं, आलू के थोक व्यापारियों का कहना है कि अधिमास के कारण इस बार आलू की खपत एक महीने और बढ़ गई है, इस वजह से भी आलू के भाव चढ़े हुए हैं. नई फसल आने के साथ ही दिवाली से कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है.

अधिमास और नवरात्र के कारण आलू में तेजी

आजादपुर मंडी पोटैटो ओनियन मर्चेंट एसोसिएशन (POMA) के जनरल सेक्रेटरी राजेंद्र शर्मा का कहना है कि अमूमन श्राद्ध पक्ष के बाद नवरात्र शुरू हो जाता है लेकिन इस बार श्राद्ध और नवरात्र के बीच करीब एक महीने का अंतर है. यह अंतर अधिमास कहलाता है. नवरात्र के दौरान आलू की खपत बढ़ जाती है. शर्मा की मानें तो नवरात्र में आलू की खपत बढ़ती है लेकिन अधिमास के कारण इस बार आलू की खपत एक महीने और बढ़ गई है, इस वजह से भी आलू के भाव चढ़े हुए हैं. नवरात्र इस वर्ष 17 अक्टूबर से शुरू हो रहा है और 25 अक्टूबर को दशहरा आने पर नवरात्र समाप्त हो जाएगा.

आलू के आवक में कमी

खपत में बढ़ोतरी के अतिरिक्त आलू की आवक में भी कमी है. राजेंद्र शर्मा का अनुमान है कि इस बार करीब 25-30 फीसदी आलू कम आ रहा है. इस समय बाजार में अधिकतर आलू दक्षिण भारत और पश्चिमी उत्तर भारत के स्टोर से आ रहा है. पंजाब से आलू बहुत कम आ रहा है. इसकी वजह से आलू की शॉर्टेज हो रही है. कोरोना महामारी के कारण आलू की खपत पर प्रभाव पड़ा है. लॉकडाउन के दौरान आलू की खपत अप्रत्यक्ष रूप से बहुत बढ़ी यानि लोगों ने आलू तो खाया ही, आलू के चिप्स की खपत बेतहाशा बढ़ी. इसका मतलब यह हुआ कि होटल्स बंद होने के बावजूद आलू की खपत में बड़ी गिरावट नहीं दिखी. कोरोना महामारी के कारण आलू चिप्स के कारखानों पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा है क्योंकि इसमें अधिकतर कार्य ऑटोमैटिक हैं, आलू छीलने से लेकर चिप्स की पैकिंग तक.

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दीवाली के बाद मिल सकती है आंशिक राहत

शर्मा का कहना है कि आलू के भाव में नरमी खरीफ आलू के बाजार में आने के बाद आएगी. आलू की वर्ष में दो बार फसल आती है. खरीफ आलू की बुवाई मई से जुलाई के बीच होती है और उसकी फसल सितंबर से नवंबर तक आती है. इसके अलावा रबी आलू की बुवाई सितंबर के अंत से नवंबर तक होती है और इसकी फसल दिसंबर के मार्च के बीच आती है.

कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग की वेबसाइट के मुताबिक 2018-19 सत्र में 491.74 लाख टन रबी आलू उत्पादित हुआ था जबकि इस बार 2019-20 का अनुमान 501.96 लाख टन है. खपत के मुताबिक आलू के उत्पादन में बढ़ोतरी बहुत कम है. इसके अलावा खास बात यह है कि 2018-19 में खरीफ आलू 10.16 लाख टन उत्पादित हुआ था जबकि इस बार का अनुमान 8.45 लाख टन ही है. इसलिए आंकड़ों के मुताबिक खरीफ आलू आने के बाद भी अधिक राहत की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए.

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