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BUDGET 2018: इस आम बजट से लोगों को हैं ये उम्मीदें !

वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए इस बार की केंद्र की बजट, जिसे 1 फरवरी को पेश किया जाएगा।

January 19, 2018 5:24 PM
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हर बजट के साथ लोगों की इच्छाएं और उम्मीदें जुड़ी होती हैं। कुल मिलाकर एक बजट में, अर्थ व्यवस्था की एक विस्तृत वित्तीय रणनीति शामिल होने के बावजूद, हम में से अधिकांश लोग, इस इंतजार में रहते हैं कि वित्त मंत्री इस बार बजट में टैक्स से जुड़ी कौन-कौन सी घोषणाएं करेंगे।

वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए इस बार की केंद्र की बजट, जिसे 1 फरवरी को पेश किया जाएगा, वह 2019 में होने वाले आम चुनावों से पहले होने वाला आखिरी रेगुलर बजट होगा, जिससे यह एक महत्वपूर्ण बजट बन जाता है। स्वाभाविक है कि हर टैक्स दाता, कुछ टैक्स लाभ की उम्मीद कर रहा होगा जो उनकी जिंदगी को ज्यादा आसान और टैक्सेशन को ज्यादा सरल बना दे।

तो चलिए, टैक्स दाताओं की कुछ इच्छाओं पर नजर डालते हैं:

टैक्स सीमा में कमी और छूट सीमा में वृद्धि

वर्तमान में हर साल 2.5 लाख रुपये तक कमाने वाले लोगों को कोई टैक्स देना नहीं पड़ता है। लेकिन जहाँ एक तरफ लोगों के जीवनयापन का खर्च इतना बढ़ गया है वहीं दूसरी तरफ लोगों की आमदनी में इतनी वृद्धि नहीं हुई है। इसलिए वर्तमान टैक्स सीमा ढाँचे में बदलाव होने और जीवनयापन के खर्च के अनुसार टैक्सेबल वार्षिक आय सीमा में वृद्धि होने की उम्मीद की जा रही है।

खास तौर पर मध्यम आय वर्ग के लोगों को राहत देने की जरूरत है जो अपनी टैक्सेबल आमदनी पर 20% टैक्स भर रहे हैं। नीचे वर्तमान टैक्स सीमा की तुलना में प्रत्याशित टैक्स सीमा का एक चार्ट दिया गया है।

आयकर सीमा

आय समूह (रुपये में)वर्तमान टैक्स सीमा (% में)
0 – 2,50,000शून्य
2,50,000 – 5,00,0005%
5,00,000 – 10, 00,00020%
10,00,000 से अधिक30%

 

आय समूह (रुपये में)वांछित टैक्स सीमा (% में)
0 – 3,00,000शून्य
3,00,000 – 7,00,0005%
7,00,000 – 12, 00,00020%
12, 00,000 से अधिक30%

 

एक बहुत बड़ी जनसंख्या को टैक्स से पूरी तरह बाहर रखना, सरकार के लिए आमदनी की दृष्टि से काफी हानिकारक है, लेकिन टैक्स बचाने में लोगों की मदद करने के लिए विभिन्न धाराओं के तहत छूट की सीमा को बढ़ाया जा सकता है। वर्तमान में, एक टैक्स दाता, आयकर अधिनियम की धारा 80 CCE के अनुसार धारा 80C, 80CCC और 80 CCD(1) के तहत हर साल 1.5 लाख रुपये तक टैक्स कटौती का लाभ उठा सकता है। इस सीमा को बढ़ाकर 2 से 3 लाख रुपये के आसपास कर देना चाहिए और महिलाओं के लिए यह सीमा और अधिक होनी चाहिए ताकि वे सोने या नकद पैसे की जमाखोरी करने के बजाय टैक्स बचाने वाली योजनाओं में निवेश कर सकें।

धारा 80 D में छूट सम्बन्धी संशोधन

हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम भरने वाले लोगों के लिए 25,000 की छूट सीमा को बढ़ाए जाने की सम्भावना नहीं है। लेकिन जब माता-पिता का हेल्थ इंश्योरेंस किया जाता है, ख़ास तौर पर यदि वे एक निश्चित आयु सीमा को पार कर जाते हैं, तब बहुत ज्यादा प्रीमियम देना पड़ता है। यदि आप अपने माता-पिता के लिए हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम भरते हैं यदि उनकी उम्र 60 साल से ज्यादा है तो आपको 30,000 रुपये की अतिरिक्त छूट मिलती है। इस सीमा को बढ़ाकर संभवतः 35,000 रुपये या 40,000 रुपये करने की जरूरत है।

इसके अलावा, वयोवृद्ध नागरिकों (80 साल से अधिक) के लिए बढ़ाए गए लाभ का फायदा उठाने वाले टैक्स दाताओं की संख्या बहुत कम है जिन्होंने उस आयु सीमा को पार कर लिया है और इसलिए वे धारा 80 D के तहत 30,000 रुपये तक मेडिकल इलाज के लिए किए गए खर्च को क्लेम करने का लाभ उठा सकते हैं। इसलिए, यह लाभ, कई वरिष्ठ नागरिकों के लिए किसी काम का नहीं है जिनकी उम्र 60 से 80 साल के बीच है। सरकार को उन सभी नागरिकों को भी यह लाभ प्रदान करना चाहिए जो 60 साल के हो गए हैं ताकि उन्हें अधिक आर्थिक सुरक्षा मिल सके और उनके हाथ में थोड़े और पैसे रह सके।

 

एनपीएस को ईईई व्यवस्था के अंतर्गत लाना

नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस), रिटायरमेंट के बाद के लिए एक बहुत अच्छी रिटर्न योजना है लेकिन पैसे निकालने के समय कुल धनराशि का कम से कम 20% हिस्सा टैक्स में चले जाने के कारण यह काफी अनाकर्षक हो जाता है। इसे आकर्षक बनाने के लिए, सरकार को इसका एक बड़ा हिस्सा, टैक्स काटे बिना, निकालने की इजाजत देनी चाहिए और एनपीएस के लिए एन्युटी की दरों में भी वृद्धि करनी चाहिए। चूंकि एनपीएस को पीपीएफ के एक विकल्प के रूप में देखा जाता है जो छूट, छूट, छूट (ईईई) श्रेणी में आता है, इसलिए एनपीएस को भी ईईई व्यवस्था के अंतर्गत लाना बेहतर होगा।

टर्म इंश्योरेंस के लिए अलग टैक्स छूट

टर्म इंश्योरेंस, अधिकांश लोगों के लिए, ख़ास तौर पर नौजवान लोगों के लिए, अनाकर्षक हो गया है, क्योंकि उन्हें इसमें अपने निवेश पर कोई रिटर्न नहीं मिलता है या ऐसी योजनाओं से ज्यादा टैक्स लाभ नहीं मिलता है। लेकिन अच्छी से अच्छी फाइनेंशियल प्लानिंग में भी, कुछ न कुछ खराबी रह सकती है।

टर्म इंश्योरेंस प्रीमियम के लिए आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत तय की गई छूट सीमा (1.5 लाख रुपये) के अलावा और उससे अधिक छूट देने के लिए एक अलग छूट सीमा तय की जानी चाहिए। इससे सिर्फ अधिक से अधिक लोग इस योजना में निवेश करने के लिए आकर्षित ही नहीं होंगे बल्कि इससे लोगों को इस पॉलिसी के माध्यम से अपने परिवार के लोगों के भविष्य को सुरक्षित करने का मौका भी मिलेगा।

होम लोन का मूलधन चुकाने के लिए अलग छूट

वर्तमान में, आप धारा 80 C के तहत आवासीय संपत्ति पर होम लोन पर मूलधन चुकाते समय 1.5 लाख रुपये तक कटौती के लिए क्लेम कर सकते हैं। लेकिन, इस धारा में पहले से ही अन्य कटौतियां शामिल हैं जैसे पीपीएफ में योगदान, एनएससी में निवेश, टैक्स सेविंग फंड, इत्यादि। बीते सालों में, संपत्ति की कीमत काफी बढ़ गई है जिससे होम लोन की ईएमआई भी काफी अधिक हो गई है। इसलिए, सरकार को घर खरीदने वालों को ज्यादा टैक्स राहत देने के लिए ऐसी कटौतियों के लिए एक अलग छूट सीमा तय करनी चाहिए।

मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति की सीमा में वृद्धि

मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति, अपने वेतन का ढांचा तैयार करते समय टैक्स बचाने का एक बहुत बढ़िया तरीका है। लेकिन इसकी वर्तमान सीमा 15,000 रुपये ही है जो पिछले दशक में तेजी से बढ़े अधिक मेडिकल खर्च की दृष्टि से बहुत कम है। यह सीमा कई साल पहले तय की गई थी और अभी के हिसाब से यह उपयुक्त नहीं है। टैक्स भरने वालों को उम्मीद है कि इस सीमा को बढ़ाकर 25,000 से 40,000 रुपये के आसपास कर दिया जाएगा।

एजुकेशन लोन को चुकाने की सीमा में संशोधन

एजुकेशन लोन पर दिए गए ब्याज को धारा 80E के तहत टैक्स कटौती के रूप में क्लेम किया जा सकता है। लेकिन, यह लाभ सिर्फ आठ साल के लिए ही उपलब्ध है। इस बात को ध्यान में रखते हुए कि इस लाभ को 2006 में शुरू किया गया था जब शिक्षा का खर्च अभी के मुकाबले काफी कम था, टैक्स कटौती के लिए इस सीमा को बढ़ा देना चाहिए क्योंकि एक व्यक्ति को यह लोन चुकाने के लिए ज्यादा समय की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा, कई कामकाजी पेशेवर, कार्यकारी शिक्षा का विकल्प चुन रहे हैं जिससे एजुकेशन लोन चुकाने की समय सीमा उनके लिए असुविधाजनक साबित हो रही है क्योंकि वे पहले से ही पारिवारिक खर्च उठा रहे होते हैं।

(आदिल शेट्टी ,इस लेख के लेखक, बैंक बाज़ार के सीईओ हैं।)

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