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नई नौकरियों में लगातार दूसरे साल भारी गिरावट, FY21 में नए रोजगार के बने सिर्फ 44 लाख मौके

New Job Creation: SBI Ecowrap की रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना के चलते नए रोजगार के मौके में गिरावट तो आई है लेकिन यह स्थिति लगातार पिछले दो साल से बनी हुई है.

May 28, 2021 8:57 PM
Therefore, one year after the onset of Covid, India was left with a shortfall of 6.3 million jobs.”Therefore, one year after the onset of Covid, India was left with a shortfall of 6.3 million jobs.”

New Job Creation: पिछले कुछ समय से रोजगार को लेकर कहा जा रहा था कि कोरोना के चलते स्थितियां बिगड़ी हैं और नए रोजगार क्रिएशन में गिरावट आई है. हालांकि SBI Ecowrap की रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना के चलते नए रोजगार के मौके में गिरावट तो आई है लेकिन यह स्थिति लगातार पिछले दो साल से बनी हुई है. एसबीआई इकोरैप की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष में 2020 में 60.8 लाख नए रोजगार के मौके बने थे जबकि वित्त वर्ष 2020-21 में सिर्फ 44 लाख नए मौके बने यानी कि पिछले वित्त वर्ष में 16.9 लाख कम रोजगार के मौके बने.
हालांकि इसकी तुलना उसके भी पिछले वित्त वर्ष से करें तो स्थिति अधिक खराब नजर आती है. वित्त वर्ष 2019 में 89.7 लाख नए रोजगार बने यानी कि वित्त वर्ष 2020 में नए रोजगार के मौकों में 28.9 लाख की गिरावट आई. एसबीआई की इस रिसर्च के मुताबिक इससे इस धारणा की पुष्टि होती है कि इकोनॉमी रोजगार के नए मौके नहीं बना पा रही है. यह रिपोर्ट एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ सौम्य कांति घोष ने तैयार किया है.

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इस तरह किया गया कैलकुलेशन

हाल ही में जारी ईपीएफओ डेटा के मुताबिक वित्त वर्ष 2021 में ईपीएफ के 94.5 लाख नए सब्सक्राइबर्स जुड़े और एनपीएस से 5.82 लाख नए सब्सक्राइबर्स. इसका मतलब हुआ कि पिछले वित्त वर्ष 2021 में 100.4 लाख रोजगार के नए मौके बने जोकि वित्त वर्ष में 102.3 लाख से थोड़ा ही कम है. हालांकि घोष के मुताबिक इसमें वे भी शामिल हैं जो एक जगह जॉब छोड़कर दूसरी जगह जॉब ज्वाइन किए हैं या दोबारा सब्सक्राइब किए हैं. ऐसे लोगों को फ्रेश जॉब क्रिएशन के तहत नहीं लाया जा सकता है. घोष ने अपने कैलकुलेशन में पाया कि वित्त वर्ष में नई नौकिरियां 100.4 नहीं, 44.0 लाख रहीं. इसके अलावा घोष का कहना है कि इसमें से अधिकतर लो क्वॉलिटी जॉब्स हैं.

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ईपीएफओ/एनपीएस डेटा में सामने आई खामी

वित्त वर्ष 2021 में ईपीएफ के 95.4 सब्सक्राइबर्स की बात करें तो इसमें 41.2 लाख सेकंड जॉब्स रहीं, 44 लाख फर्स्ट जॉब्स और 9.3 लाख फॉर्मलाइजेशन के जरिए. सेकंड जॉब (जिन्होंने री-ज्वाइन किया या री-सब्सक्राइब किया) वित्त वर्ष 2021 में 17.9 लाख बढ़ा. रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2021 में 41.2 लाख लोगों की सेकंड जॉब रही और वित्त वर्ष 2020 में 23.3 लाख लोगों की. ईपीएफओ डेटा में कुल एनरोलमेंट में महिला एनरोलमेंट की बात करें तो यह वित्त वर्ष 2020 में यह 23 फीसदी रहा और वित्त वर्ष 2021 में इसमें खास बदलाव नहीं आया. घोष के मुताबिक ईपीएफओ/एनपीएस डेटा की सबसे बड़ी खामी यह है कि इसमें रिटायर होने वालों का आंकड़ा बाहर नहीं किया जाता है.

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