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सार्वजनिक कर्ज को अगले 4-5 साल में कम करने की जरूरत: एस एच गर्ग

गर्ग ने यह भी कहा कि अगर कुछ चिंताओं को दूर कर दिया जाए तो भारत 2030 तक 10,000 अरब डालर की इकॉनमी बन सकता है.

December 15, 2018 6:15 PM
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आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने शनिवार को कहा कि सार्वजनिक कर्ज पहले से ऊंचा बना हुआ है और अगले चार-पांच साल में इसे कम करने की आवश्यकता है.

राजकोषीय घाटा GDP के तीन फीसदी के अनुकूल स्तर की ओर बढ़ने और इन्फ्लेशन नरम होने को रेखांकित करते हुए गर्ग ने यह भी कहा कि मैक्रोइकॉनोमिक स्टैंडर्ड्स पर देश की इकॉनमी मजबूत बनी हुई है और इस मामले में भारत दुनिया सबसे अच्छी इकॉनमी में है.

इंडस्ट्रीज बोर्ड फिक्की के सालाना आम बैठक को संबोधित करते हुए गर्ग ने कहा, ‘‘हमारे ऊपर अभी भी पब्लिक डेब्ट अधिक है…हो सकता है अगले 4-5 साल में हमें इस पर ध्यान देना होगा,’’ साख निर्धारण करने वाली एजेंसियों ने सार्वजनिक कर्ज के बढ़ते स्तर को लेकर चिंता जताई और देश की साख उन्नत करने से दूर रहे.

उन्होंने कहा, ‘‘ज्यादातर क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां कर्ज-GDP अनुपात को अधिक महत्व देते हैं. फिलहाल हम राजकोषीय घाटे पर ध्यान दे रहे हैं. लेकिन आने वाले समय में यह क्षेत्र हैं जहां हमें ध्यान देना होगा.’’

इन्फ्लेशन को लेकर गर्ग ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हमने कमोबेश मैदान जीत लिया है. मैं यह नहीं कहूंगा कि अब कोई मुश्किल हो ही नहीं सकती…तेल की कीमत जैसे कुछ फैक्टर हैं जो हमारे नियंत्रण से बाहर हैं. लेकिन मुझे लगता है कि हम इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि इन्फ्लेशन को लेकर चिंता कम हुई है.’’

मेजर इन्फ्लेशन नवंबर में घटकर 2.33 फीसदी पर आ गई जो 17 महीने का न्यूनतम स्तर है. इसका मुख्य कारण अनुकूल तुलनात्मक आधार और सब्जी और अनाज के दाम में कमी है.

सचिव ने यह भी कहा कि अगर कुछ चिंताओं को दूर कर दिया जाए तो भारत 2030 तक 10,000 अरब डालर की इकॉनमी बन सकता है. उन्होंने इंडस्ट्री से बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश करने को कहां जहां अभी भी काफी कमी है. गर्ग ने कहा कि ढांचागत क्षेत्र ऐसा क्षेत्र हैं जहां और कोष की जरूरत है और यह कंपनियों को निवेश का अवसर भी उपलब्ध कराता है.

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