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Mutual Funds 2020: इस साल स्मालकैप फंड ने दिए सबसे ज्यादा रिटर्न, कैसा रहा म्यूचुअल फंड बाजार का हाल

Mutual Fund/Share Market in 2020: म्यूचुअल फंड बाजार में स्मालकैप फंड कटेगिरी का रिटर्न लॉर्जेकैप से ज्यादा रहा.

December 21, 2020 4:45 PM
Mutual Funds Market in 2020Mutual Funds Market in 2020: म्यूचुअल फंड बाजार में स्मालकैप फंड कटेगिरी का रिटर्न लॉर्जेकैप से ज्यादा रहा.

Year-end 2020 Mutual Fund: मौजूदा साल कैपिटल मार्केट के लिए बेहद उतार चढ़ाव भरा रहा है. साल के पहले 2 महीनों में जहां म्यूचुअल फंड बाजार में जमकर रिटर्न मिल रहा था, कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन की वजह से साल के मिड तक ज्यादातर फंड का 1 से 3 साल का रिटर्न निगेटिव में चला गया. हालांकि बाजार में जुलाई के बाद से जो रैली शुरू हुई, वह नवंबर तक आते आते पीक पर चली गई. इक्विटी मार्केट में तेजी आई तो डेट फंडों के इक्विटी सेग्मेंट में एक दो को छोड़कर हर कटेगिरी का रिटर्न डबल डिजिट में चला गया. लॉर्जकैप के मुकाबले स्मालकैप फंड ने इस साल आउटपरफॉर्म किया. वहीं सेक्टोरल बात करें तो फार्मा और टेक्नोलॉजी फंडों ने निवेशकों की जेब भर दी.

किस कटेगिरी में कितना रिटर्न

इक्विटी स्मालकैप फंड: 30 फीसदी
इक्विटी मिडकैप फंड: 25 फीसदी
इक्विटी लॉर्जकैप फंड: 14 फीसदी
इक्विटी मल्टीकैप फंड: 14 फीसदी
इक्विटी लॉर्ज एंड मिडकैप फंड: 16 फीसदी
इक्विटी वैल्यू ओरिएंटेड फंड: 16 फीसदी
इक्विटी ELSS: 15 फीसदी

सेक्टोरल कटेगिरी में

इक्विटी फार्मा: 65 फीसदी
इक्विटी टेक्नोलॉजी: 50 फीसदी
इक्विटी बैंकिंग: -6 फीसदी
सेक्टोरल इंफ्रा: 9 फीसदी
सेक्टोरल थीमैटिक: 19 फीसदी
सेक्टोरल एनर्जी: 22 फीसदी
सेक्टोरल पीएसयू: -2 फीसदी
सेक्टोरल कंजम्पशन: 19 फीसदी
सेक्टोरल इंटरनेशनल: 20 फीसदी

सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले फंड

DSP हेल्थकेयर फंड: 81 फीसदी
PGIM इंडिया ग्लोबल इक्विटी फंड: 76 फीसदी
क्वांट स्मालकैप फंड: 76 फीसदी
मिराए एसेट हेल्थकेयर फंड: 75 फीसदी
ICICI प्रू फार्मा हेल्थकेयर फंड: 72 फीसदी
BOI AXA स्मालकैप फंड: 57 फीसदी
फ्रैंकलिन टेक्नोलॉजी फंड: 54 फीसदी
ABSL डिजिटल इंडिया फंड: 53 फीसदी
PGIM इंडिया मिडकैप Opp: 52 फीसदी
क्वांट कंजम्पशन फंड: 48 फीसदी

म्यूचुअल फंड के नियमों में बदलाव

जोखिम की अच्छे से पहचान: निवेशक म्यूचुअल फंड के जोखिम को ठीक तरह से पहचान सकें इसके लिए बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने बाजार नियामक सेबी ने निवेशकों को चेतावनी देने के लिए “very high risk” कटेगिरी की शुरुआत की है. सभी म्यूचुअल फंड्स को अब रिस्क-ओ-मीटर में 5 के बदले 6 संकेत दिखाने होंगे. यह बदलाव 1 जनवरी 2021 से लागू होगा.

मल्टीकैप फंड में निवेश के नियम: सेबी ने मल्टीकैप म्यूचुअल फंड के लिए एसेट अलोकेशन के नियमों में बदलाव किया है. नए नियमों के मुताबिक अब फंड्स का 75 फीसदी हिस्सा इक्विटी में निवेश करना जरूरी होगा, जो कि अभी न्यूनतम 65 फीसदी है. फंडों को लॉर्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप में 25-25 फीसदी निवेश करना जरूरी होगा. पहले फंड मैनेजर्स अपनी मनमर्जी के हिसाब से आवंटन करते थे.

पोर्टफोलियो का खुलासा: डेट म्यूचुअल फंड को 30 दिनों के बजाय हर 15 दिनों में अपने पोर्टफोलियो का खुलासा करना होगा. यह कदम किसी भी जोखिम को समझने में भी मदद करेगा.

लिक्विड फंड में बदलाव: सेबी ने लिक्विड फंडों को अपने पोर्टफोलियो का कम से कम 20 फीसदी हिस्सा लिक्विड एसेट्स जैसे कैश, टी बिल, सरकारी प्रतिभूतियां और हर समय सरकारी प्रतिभूतियों पर रेपो दर में रखना अनिवार्य कर दिया है.

अनलिस्टेड एनसीडी में निवेश: सेबी ने म्यूचुअल फंड को नॉन कन्वर्टिबल डिबेंचर (एनसीडी) में निवेश करने की अनुमति दी थी, जो किसी स्कीम के डेट पोर्टफोलियो का अधिकतम 10 फीसदी तक होता है. इसका उद्देश्य म्युचुअल फंडों द्वारा ऋण और मुद्रा बाजार के साधनों में निवेश के लिए पारदर्शिता लाना है.

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