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Mutual Funds, छोटी बचत योजनाओं को पीछे छोड़ रही है!

वित्तीय वर्ष 2017-18 के पहले आठ वर्षों के दौरान, छोटी बचत योजनाओं के लिए 40,429 करोड़ रुपये के रसीद निकाले गए थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2016-17 की इसी अवधि के दौरान छोटी बचत योजनाओं के लिए 2,75,682 करोड़ रुपये तक की राशि दर्ज की गई थी.

Published: June 14, 2018 4:12 PM
पब्लिक प्रोविडेंट फण्ड के मामले में, अप्रैल और नवंबर 2017 के बीच आठ महीने की अवधि के दौरान रसीदों की रकम 1,775 करोड़ रुपये थी.

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक छोटी बचत योजनाएं मासिक रसीदों की तुलना में अपनी लोकप्रियता खोती जा रही है, इंडियन एक्सप्रेस ने अपने एक रिपोर्ट में लिखा है. इसे एक चिंताजनक स्थिति कही जा सकती है. वित्तीय वर्ष 2017-18 के पहले आठ वर्षों के दौरान, छोटी बचत योजनाओं के लिए 40,429 करोड़ रुपये के रसीद निकाले गए थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2016-17 की इसी अवधि के दौरान छोटी बचत योजनाओं के लिए 2,75,682 करोड़ रुपये तक की राशि दर्ज की गई थी. पब्लिक प्रोविडेंट फण्ड के मामले में, अप्रैल और नवंबर 2017 के बीच आठ महीने की अवधि के दौरान रसीदों की रकम 1,775 करोड़ रुपये थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस राशि में 5,722 करोड़ रुपये की गिरावट आई थी, जो पिछले साल की इसी अवधि में पीपीएफ रसीदी राशि थी.

रिपोर्ट के अनुसार छोटी बचत योजनाओं के लिए रसीदी में गिरावट स्पष्ट थी लेकिन म्यूचुअल फंड तेजी से अधिक निवेश प्राप्त कर रहे हैं. इस अवधि में केंद्र ने 1 अप्रैल, 2016 से त्रैमासिक आधार पर छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में भी संशोधन किया है क्योंकि सरकार यहां गवर्नमेंट सिक्योरिटीज के ब्याज दरों की तर्ज पर इन छोटी बचत योजनाओं के ब्याज दरों को समान करना चाहती थी. डाक विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ब्याज दर एक ऐसा कारक है जो निवेशकों को दूर रखता है, हालांकि और भी कारक हैं.

मार्च 2016 में 1-5 साल की टर्म डिपाजिट पर ब्याज दरें 8.4 प्रतिशत थीं. हालांकि, वर्तमान में वह दरें 1 साल की जमा के लिए 6.6 फीसदी और 5 साल की जमा के लिए 7.4 फीसदी पर हैं. राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्रों के लिए, इसी अवधि में ब्याज की पेशकश 8.5 प्रतिशत से घटकर 7.6 प्रतिशत हो गई है, जबकि किसान विकास पत्र के लिए यह 8.7 प्रतिशत से घटाकर 7.3 प्रतिशत हो गया है. पीपीएफ पर ब्याज दरें मार्च 2016 में 8.7 प्रतिशत से घटकर 7.6 प्रतिशत हो गई है.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान एक टैक्स अधिकारी ने बताया कि “इक्विटी मार्किट रिटर्न पिछले कुछ सालों में अच्छा रहा है और म्यूचुअल फंड कई खुदरा निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं. इसके अलावा, कुछ योजना-स्तर के मुद्दे हैं जिन्हें सुकन्या समृद्धि योजना के मामले में संबोधित करने की आवश्यकता है, जहां लॉक-इन अवधि बहुत अधिक है और ब्याज दरें घट गई हैं. म्यूचुअल फंड बड़े ड्रॉ बन गए हैं और इन योजनाओं पर कम ब्याज की पेशकश उनकी मदद नहीं कर रही है. हालांकि, दिल्ली स्थित वित्तीय सलाहकार फर्म एसेट मैनेजर्स ने कहा, “डाकघर योजनाओं पर आय पहले टीडीएस के अधीन नहीं थी, इन योजनाओं में से कई से आय पर टीडीएस का प्रावधान निवेशकों का मोहभंग कर रहा है.”

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