मुख्य समाचार:

Mutual Fund Tips in Hindi: म्यूचुअल फंड में आप कैसे कर सकते हैं निवेश, A to Z हर डिटेल

Mutual Fund Investment Tips: म्यूचुअल फंड में आप कैसे कर सकते हैं निवेश

Updated: Jul 31, 2020 8:12 AM
mutual fund,mutual fund tips,mutual funds tips for beginners,tips for mutual fund investment in india,mutual fund investment techniques,mutual funds tips and tricks,how to invest in mutual funds,best mutual funds,mutual fund in hindi,mutual fund definition,mutual fund india,mutual fund types,mutual fund sip,mutual fund news,mutual fund appMutual Fund Investment Tips: म्यूचुअल फंड में आप कैसे कर सकते हैं निवेश

Mutual Fund Tips in Hindi, How to invest in Mutual Funds: आप भी जानकारों से ऐसा सुनते होंगे कि निवेश के लिए म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) अच्छा विकल्प है, जहां रिटर्न भी अच्छा मिलता है. वहीं शेयर बाजार की तुलना में जोखिम कम रहता है. लेकिन जरूरी नहीं है कि म्यूचुअल फंड बाजार की समझ सभी को हो. इसलिए निवेश करने से पहले म्यूचुअल फंड को जान लेना बहुत जरूरी है. इससे आपको निवेश के फैसले लेने में मदद मिलेगी. आइए जानते हैं क्या है म्यूचुअल फंड, इसकी कितनी कटेगिरी है, कितना रिटर्न मिल सकता है. साथ ही यह भी जानिए कि म्यूचुअल फंड में कैसे निवेश कर सकते हैं.

क्या है म्यूचुअल फंड?

म्यूचुअल फंड कंपनियां निवेशकों से पैसे जुटाती हैं. इस पैसे को वे शेयर बाजार, बांड और गवर्नमेंट सिक्युरिटीज जैसे एसेट्स में निवेश करती हैं. इसके बदले म्यूचुअल फंड निवेशकों से फीस भी लेती हैं. देश में अलग-अलग कई म्यूचुअल फंड हाउसेज हैं जो निवेश करने के लिए फंड मैनेजर नियुक्त करती है. फंड मैनेजर को मार्केट की अच्छी जानकारी होती है, जो अपनी समझ से ऐसे फंड में निवेश करते हैं जिसमें अधिकतम मुनाफा हो. म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए ये कंपनियां निवेशकों से कमीशन लेकर कमाई करती हैं. जो लोग शेयर बाजार में निवेश के बारे में बहुत नहीं जानते, उनके लिए म्यूचुअल फंड निवेश का अच्छा विकल्प है. निवेशक अपने वित्तीय लक्ष्य के हिसाब से स्कीम चुन सकते हैं.

म्यूचुअल फंड में कैसे करें निवेश

  • आप किसी म्यूचुअल फंड की वेबसाइट से सीधे निवेश कर सकते हैं. अगर आप चाहें तो किसी म्यूचुअल फंड एडवाइजर की सेवा भी ले सकते हैं.
  • अगर आप सीधे निवेश करते हैं तो आप म्यूचुअल फंड स्कीम के डायरेक्ट प्लान में निवेश कर सकते हैं. अगर आप किसी एडवाइजर की मदद से निवेश कर रहे हैं तो आप रेगुलर प्लान में निवेश करते हैं.
  • अगर आप सीधे निवेश करना चाहते हैं तो आपको उस म्यूचुअल फंड की वेबसाइट पर जाना पड़ेगा. आप उसके दफ्तर में भी अपने दस्तावेज के साथ जा सकते हैं.
  • डायरेक्ट प्लान में निवेश करने का फायदा यह है कि आपको कमीशन नहीं देना पड़ता है. इसलिए लंबी अवधि के निवेश में आपका रिटर्न बहुत बढ़ जाता है.

एक मुश्त और SIP की सुविधा

जैसे शेयर मार्केट में निवेश करने वाले को शेयर होल्डर कहते हैं, उसी तरह से म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को यूनिट होल्डर कहा जाता है. म्यूचुअल फंड कंपनियां फंड जमा करने के लिए ‘न्यू फंड ऑफर’ जारी करती हैं. म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को यूनिट दी जाती है. यहां डिस्काउंट या प्रीमियम पर नहीं बल्कि प्रति यूनिट की कुछ रकम तय की जाती है. आप एक बार में सारा पैसा निवेश कर सकते हैं या SIP के जरिए भी निवेश कर सकते हैं. SIP का मतलब है कि आप हर महीने या तय समय में एक तय रकम म्यूचुअल फंड में निवेश करें.

निवेश के फायदे

म्यूचुअल फंड का फायदा यह है कि यहां आपका निवेश फंड मैनेजर द्वारा मैनेज किया जाता है, जिसे बाजार की अच्छी समझ होती है. ऐसे में वह आपका पैसा सोच समझकर निवेश करता है, जहां रिटर्न बेहतर रहने की उम्मीद हो. वहीं म्यूचुअल फंड के जरिए आपका पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाई हो जाता है. क्योंकि यहां सिर्फ एक शेयर की बजाए अलग अलग शेयर में या एसेट क्लास में पैसा लगाया जाता है. इससे एक में अगर जोखिम है तो दूसरे में यह कवर हो जाता है. आपका पैसा डेट फंड्स मे भी निवेश किया जाता है, जिससे अगर मार्केट में अस्थिरता भी आती है, तब भी पैसा सुरक्षित रहता है. ईएलएसस कटेगिरी में निवेश कर आप टैक्स भी बचा सकते हैं.

म्यूचुअल फंड के प्रकार

ग्रोथ/ इक्विटी म्यूचुअल फंड: इक्विटी म्यूचुअल फंड में रकम का ज्यादा हिस्सा इक्विटी में निवेश किया जाता है. इसी वजह से इसमें रिस्क भी ज्यादा होता है. इस स्कीम में निवेशकों को दो विकल्प दिए जाते हैं, या तो वो डिविडेंड स्कीम चुनें या कैपिटल ग्रोथ. इस ऑप्शन को वो बाद में बदल भी सकते हैं. लंबे समय के लिए निवेश करने के लिए ये अच्छा ऑप्शन है. इन फंडों में 10 साल का औसत रिटर्न 12 से 15 फीसदी हो सकता है.

कटेगिरी: लॉर्जकैप फंड, मल्टीकैप फंड, लॉर्ज एंड मिडकैप फंड, मिडकैप फंड, स्मालकैप फंड, ईएलएसएस, सेकटोरल फंड

डेट/इनकम स्कीम: डेट फंड उनके लिए अच्छा विकल्प है जो ज्यादा रिस्क नहीं लेना चाहते हैं और एक नियमित और स्थिर आय चाहते हैं. इस स्कीम में ज्यादातर रकम बॉन्ड्स, कंपनियों के डिबेंचर और सरकारी सेक्युरिटी में निवेश किया जाता है. क्योंकि ये सब डेट की तरह होते हैं, इसलिए मार्केट की अस्थिरता का इसपर कोई असर नहीं होता. इन सभी विकल्पों से निवेशकों को एक नियमित आय मिलती है. इसमें इक्विटी के मुकाबले आय कम होती है लेकिन रिस्क भी कम होता है. इन फंडों में 10 साल का औसत रिटर्न 8 से 10 फीसदी हो सकता है.

कटेगिरी: अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन फंड, शॉर्ट ड्यूरेशन फंड, मीडियम ड्यूरेशन फंड, लांग ड्यूरेशन फंड, लिक्विड फंड

बैलेंस्ड फंड/ हाइब्रिड स्कीम: जैसा नाम से ही पता चल रहा है, ये फंड्स बैलेंस्ड होते हैं. इन फंड्स में इक्विटी और डेट्, दोनों में निवेश किया जाता है. ताकि निवेशकों की इनकम बढ़ने के साथ-साथ उन्हें नियमित आय भी मिलती रहे. ये डॉक्युमेंट में पहले ही बता दिया जाता है कि, आपका कितना पैसा किस स्कीम में निवेश किया जाएगा. ये आमतौर पर 40:60 का रेश्यो होता है. इस सेग्मेंट की बात करें तो पिछले 10 साल में औसत रिटर्न डबनल डिजिट में हो सकता है.

सॉल्यूशन ओरिएंटेड स्कीम: इस स्कीम किसी खास लक्ष्य या समाधान के हिसाब से बनी होती हैं. इनमें रिटायरमेंट स्कीम या बच्चे की शिक्षा जैसे लक्ष्य हो सकते हैं. इन स्कीम में आपको कम से कम पांच साल के लिए निवेश करना जरूरी होता है.

Get Business News in Hindi, latest India News in Hindi, and other breaking news on share market, investment scheme and much more on Financial Express Hindi. Like us on Facebook, Follow us on Twitter for latest financial news and share market updates.

  1. बिज़नस न्यूज़
  2. कारोबार बाजार
  3. Mutual Fund Tips in Hindi: म्यूचुअल फंड में आप कैसे कर सकते हैं निवेश, A to Z हर डिटेल

Go to Top