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कोरोना वायरस: बाजार में पैसे लगाने से लग रहा है डर! म्यूचुअल फंड निवेशक क्‍या करें?

Mutual Fund Strategy: एक्‍सपर्ट का कहना है कि मौजूदा दौर में एसेट अलोकेशन स्‍ट्रैटेजी के अलावा बैलेंस एडवांटेज फंड बेहतर विकल्‍प हैं.

April 26, 2021 12:54 PM
Mutual Fund Investment StrategyMutual Fund Strategy: एक्‍सपर्ट का कहना है कि मौजूदा दौर में एसेट अलोकेशन स्‍ट्रैटेजी के अलावा बैलेंस एडवांटेज फंड बेहतर विकल्‍प हैं.

Best Strategy to Invest in Mutual Funds: शेयर बाजार में इन दिनों जमकर उतार चढ़ाव बना हुआ है. देश में कोरोना वायरस के मामले बेकाबू हो गए हैं. एक दिन में 3.5 लाख से भी ज्‍यादा नए मामले भारत में दर्ज हो रहे हैं. ऐसे में देश के कई राज्‍य लॉकडाउन जैसी सख्‍ती कर रहे हैं. फिलहाल इन सबके बीच कैपिटल मार्केट में पैसे लगाने को लेकर निवेशक या तो डर रहे हैं या कन्फ्यूजन की स्थिति बनी हुई है. खासतौर से इक्विटी में पैसे लगाने को लेकर डर ज्‍यादा है. एक्‍सपर्ट का कहना है कि मौजूदा दौर में एसेट अलोकेशन स्‍ट्रैटेजी के अलावा बैलेंस एडवांटेज फंड बेहतर विकल्‍प हैं. वहीं डेट कटेगिरी की बात करें तो अल्‍ट्रा शॉर्ट टर्म, शॉर्ट टर्म और मिड डयूरेशन फंडों का चुनाव कर सकते हैं.

बता दें कि देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर बेहद खतरनाक दिख रही है. एक दिन में 3.5 लाख के करीब मामले आने लगे हैं. इससे एक्‍सपर्ट बाजार आगे वोलेटाइल रहने की बात कह रहे हैं. वहीं दूसरी ओर रेटिंग एजेंसियां एक बार फिर ग्रोथ अनुमान घटाने लगी हैं. यह बाजार सेंटीमेंट पर असर डाल सकती हैं. निवेशकों को लॉकडाउन का भी डर सता रहा है, ऐसे में इक्विटी का रिटर्न शॉर्ट टर्म में बिगड सकता है. एक्सपर्ट का कहना है कि मौजूदा दौर में निवेशक सीधे इक्विटी में पैसा लगाने की बजाए म्यूचुअल फंड का रास्ता चुन सकते हैं. उनका यह भी कहना है कि लॉर्जकैप या मिडकैप में पैसे लगाने को लेकर अभी इंतजार करना चाहिए.

बैलेंस्ड एडवांटेज फंड

बैलेंस्ड एडवांटेज फंड ऐसा फंड है जो इक्विटी और डेट के सेगमेंट में बैलेंस तरीके से अलोकेशन को मैनेज करता है. यह लॉन्ग टर्म में पैसे बनाने के लिए ‘निचले स्तर पर खरीदो और ऊंचे स्तर पर बेचो’ मॉडल को अपनाता है. इससे टैक्स बचत करते हुए इक्विटी और फिक्‍स्‍ड इनकम के बीच बैलेंस करने में मदद मिलती है. हालांकि बैलेंस्ड एडवांटेज फंड में निवेश करते समय किसी निवेशक को जोखि‍म, रिटर्न, लागत, निवेश सीमा, वित्तीय लक्ष्य, रिटर्न पर टैक्स आदि का ध्यान रखना चाहिए. इसके कुछ फायदे ऐसे हैं……

ऐसे फंड के एसेट इक्व‍िटी और डेट के बीच सक्रियता से मैनेज किए जाते हैं.. बच्चों की शिक्षा, शादी या रिटायरमेंट जरूरतों जैसे लंबी अवधि के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए निवेशक किसी बैलेंस्ड एडवांटेज फंड में निवेश के लिए SIP विकल्प का भी चुनाव कर सकते हैं. यह ऐसे लोगों के लिए भी बेहतर हैं जो बाजार का जोखिम नहीं लेना चाहते हैं और टैक्स बचत वाले निवेश की तलाश में हैं.

ऐसे निवेशक जो कम उतार-चढ़ाव चाहते हैं, अक्सर बैलेंस्ड फंड का चुनाव करते हैं. क्‍योंकि बॉन्ड ज्यादा स्थायी रिटर्न प्रदान करते हैं और आमतौर पर शेयरों जैसे ज्यादा उतार-चढ़ाव का सामना नहीं करते.

एसेट अलोकेशन स्ट्रैटेजी

अगर निवेशक एसेट अलोकेशन स्ट्रैटेजी पर चलते हैं तो उन्हें रिस्क लेने की क्षमता के आधार पर इक्विटी और डेट फंड में निवेश करना चाहिए. अगर रिस्क लेने की क्षमता ज्यादा है तो इक्विटी में 80 फीसदी और डेट में 20 फीसदी अलोकेशन होना चाहिए. वहीं, अगर रिस्क लेने की क्षमता मॉडरेट है तो इक्विटी और डेट में 50:50 फीसदी निवेश करें. लेकिन अगर कन्जर्वेटिव इन्वेस्टर हैं तो यह रेश्यो 30:70 का होना चाहिए.

एसेट अलोकेशन फंड का फायदा यह है कि इसमें निवेशकों को अपनी रकम को इक्विटी, बांड, गोल्ड, कमोडिटी और कैश जैसे एसेट में लगाने का मौका मिलता है. इसमें पोर्टफोलियो अपने आप डाइवर्सिफाई हो जाता है, जिससे जोखिम कम होता है.

डेट कटेगिरी में क्‍या करें निवेशक?

एक्सपर्ट का कहना है कि डेट म्यूचुअल फंड में अगर पैसे लगाना है तो अल्‍ट्रा शॉर्ट टर्म, और शॉर्ट टर्म फंडों का चुनाव कर सकते हैं. कुछ फीसदी पैसा मिड डयूरेशन फंडों में भी लगा सकते हैं. अभी लिक्विड फंडों और लंबी अवधि के डेट फंडों से दूर रहने की सलाह है. इनमें रिटर्न खराब हुए हैं. इसके पीछे वजह है कि 10 साल के बांड यील्ड में तेजी आई है. हालांकि आरबीआई का प्लान एग्रेसिव तरीके से बॉन्ड खरीदने पर है. लेकिन इसे लेकर आगे स्थिति साफ होगी.

SIP निवेशक क्‍या करें

एक्सपर्ट के अनुसार एसआईपी पहले से चल रही है तो इसे जारी रखें. वहीं नए निवेशक अपनी जरूरत के हिसाब से इक्विटी की अलग अलग कटेगिरी में लांग टर्म के लिए एसआाईपी शुरू कर सकते हैं. बाजार में गिरावट पर उसे टॉप अप भी कराया जा सकता है.

(नोट: बीएनपी फिनकैप के डायरेक्टर एके निगम से बात चीत और अनिरुद्ध साहा, सीनियर फंड मैनेजर (इक्विटीज), PGIM इंडिया म्यूचुअल फंड के विचारों पर आधारित)

(Disclaimer: म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है. निवेश से पहले अपने स्तर पर पड़ताल कर लें या अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श कर लें. फाइनेंशियल एक्सप्रेस किसी भी फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है.)

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