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Mutual Fund 2021: म्यूचुअल फंड निवेशक ध्यान दें! 1 जनवरी से ये 4 बदले नियम आप पर डालेंगे असर

Mutual Funds Rules Change From 1 January 2021: 1 जनवरी 2021 से म्यूचुअल फंड में निवेश को लेकर नियमों में कुछ बदलाव होने वाले हैं.

December 28, 2020 2:54 PM
Mutual Funds Rules ChangeMutual Funds Rules Change From 1 January 2021: 1 जनवरी 2021 से म्यूचुअल फंड में निवेश को लेकर नियमों में कुछ बदलाव होने वाले हैं.

Mutual Funds Rules Change From 1 January 2021: अगर आप म्यूचुअल फंड निवेशक हैं तो जरा ध्यान दें. जनवरी 2021 से म्यूचुअल फंड में निवेश को लेकर नियमों में कुछ बदलाव होने वाले हैं. हालांकि ये सभी बदलाव निवेशकों के हितों को ध्यान में रखकर किए गए हैं. इन बदलावों के लागू होने के बाद बाद म्यूचुअल फंड में निवेश का तरीका कुछ बदल जाएगा. मार्केट रेगुलेटर का मानना है कि निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड्स को सेफ और ट्रांसपैरेंट बनाने के लिए ये बदलाव जरूरी थे. इनमें NAV कैल्कुलेशन में बदलाव, म्यूचुअल फंड्स में निवेशकों को सही से जोखिम की पहचान से लेकर मल्टीकैप में निवेश को ज्यादा ट्रांसपैरेंट बनाना शामिल है. इन सारे बदलावों का एलान इसी साल हुआ था, जिसे नए साल से लागू किया जाएगा.

NAV कैलकुलेशन में बदलाव

सेबी ने इस साल 17 सितंबर को जारी सर्कुलर में म्यूचुअल फंड स्कीम में NAV कैलकुलेशन में बदलाव का एलान किया था. नए नियम 1 जनवरी 2021 से प्रभावी होंगे. 1 जनवरी, 2021 से निवेशकों को उस दिन के म्यूचुअल फंड्स का नेट एसेट वैल्यू यानी परचेज NAV एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) के पास पैसे पहुंच जाने के बाद मिलेगा. SEBI के अनुसार लिक्विड और ओवरनाइट म्यूचुअल फंड स्कीम्स को छोड़कर सभी म्यूचुअल फंड्स स्कीम्स में दिन का क्लोजिंग NAV यूटिलाइजेश के लिए उपलब्ध फंड्स के आधार पर तय होगा. मजूदा नियमों के मुताबिक, 2 लाख रुपये से कम की खरीददारी में उसी दिन का NAV लागू होता है और ऑर्डर प्लेस हो जाता है, चाहे पैसे AMC के पास पहुंचा हो या नहीं.

हाई रिस्क को देखकर ले सकेंगे निर्णय

म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम के अधीन होता है. लेकिन कइ्र बार निवेशकों को हाई रिस्क की सही से पहचान नहीं हो पाती है. निवेशक म्यूचुअल फंड के जोखिम को ठीक तरह से पहचान सकें इसके लिए सेबी ने बाजार नियामक सेबी ने 1 जनवरी 2021 से “very high risk” कटेगिरी की शुरुआत करने का एलान किया है. सभी म्यूचुअल फंड्स को अब रिस्क-ओ-मीटर में 5 के बदले 6 संकेत दिखाने होंगे. “very high risk” कटेगिरी के अलावा अन्य 5 श्रेणियां लो, मॉडरेटरी लो, मॉडरेट, मॉडेटरी हाई और हाई हैं.

मल्टीकैप में बदलेगा निवेश का तरीका

सेबी ने मल्टीकैप म्यूचुअल फंड कटेगिरी के लिए एसेट अलोकेशन के नियमों में बदलाव किया है. नए नियम 1 जनवरी 2021 से लागू ​होंगे, हालांकि फंड हाउसेज को इसके लिए 31 जनवरी 2021 तक का समय दिया गया है. नए नियम के मुताबिक अब फंड्स का 75 फीसदी हिस्सा इक्विटी में निवेश करना जरूरी होगा, जो कि अभी न्यूनतम 65 फीसदी है. फंड हाउसेज को लॉर्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप में 25-25 फीसदी निवेश करना जरूरी होगा. बता दें कि पहले फंड मैनेजर्स अपनी सुविधा के हिसाब से आवंटन करते थे, जिससे मल्टीकैप में लार्जकैप का वेटेज ज्यादा रहता है.

इंटर स्कीम ट्रांसफर के बदलेंगे नियम

सेबी ने म्यूचुअल फंड्स निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए इंटर स्‍कीम ट्रांसफर के मानकों को सख्त करने के उपाय किए हैं. 1 जनवरी, 2021 से क्लोज इंडेड फंड्स का इंटर-स्कीम ट्रांसफर निवेशकों को स्कीम की यूनिट एलॉट होने के केवल 3 कारोबारी दिनों के अंदर करना होगा. बाजार नियामक के मुताबिक, एक फंड हाउस की ओर से लिक्विडिटी बढ़ाने की कोशिश करने और खत्‍म होने के बाद ही इंटर-स्कीम ट्रांसफर किया जा सकता है. इनमें योजनाओं में उपलब्ध नकद व कैश इक्विवेलेंट एसेट्स का इस्‍तेमाल और बाजारों में स्‍कीम एसेट्स की बिक्री शामिल होगी.

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