सर्वाधिक पढ़ी गईं

Mustard Prices: सरसों और बिगाड़ेगा रसोई का बजट, इन वजहों से भाव में तेजी आने का अनुमान

सरसों के भाव में गिरावट से लोगों को राहत मिलने लगी है लेकिन दो-तीन महीने बाद इसके भाव एक बार फिर ऊपर जा सकते हैं.

Updated: Mar 21, 2021 11:34 AM
mustard price is down currently but may rise soon due to aggressive demand and more factors affecting mustard priceउत्तर भारत के लगभग हर रसोई में सरसों के तेल का इस्तेमाल सामान्य है.

Mustard Prices Outlook: पिछले कुछ दिनों से सरसों के भाव में आई तेजी से किचन का बजट प्रभावित हुआ है. लॉकडाउन की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने से सरसों की डिमांड बढ़ती रही, जिसके चलते इसके भाव मजबूत हुए. पिछले एक साल में सरसों के भाव में 31 फीसदी का उछाल आया है. इस समय कमोडिटी एक्सचेंज NCDEX पर 18 जून 2021 के फ्यूचर कांट्रैंक्ट सरसों के भाव 5600 के करीब चल रहे हैं. हालांकि कुछ महीने बाद फेस्टिव सीजन और शादियों का सीजन आने के चलते इसके भाव को सपोर्ट मिलेगा और यह जुलाई-अगस्त तक 6200 का लेवल दिखा सकता है.
स्पॉट प्राइस की बात करें तो इसके भाव कुछ टूटे हैं क्योंकि इसकी आवक शुरू हो लगी है. फरवरी में इसके हाजिर भाव 6500 तक चले गए थे जो अब 5600 तक आ गए हैं. हालांकि यह स्थिति अधिक समय तक नहीं बनी रहेगी और जल्द ही इसके भाव ऊपर चढ़ेंगे क्योंकि वैश्विक स्तर पर इसकी मांग बहुत अधिक है.

सर्दियां लंबी खिंचने से भाव पर असर

मांग के मुताबिक सप्लाई न होने और अन्य एडिबल्स ऑयल्स के भाव में तेजी के चलते सरसों के भाव में तेजी आई. इसके अलावा ठंडी का मौसम कुछ अधिक दिनों तक रहा जिससे इसके भाव पर असर पड़ा. पिछले साल 2020 में कोरोना महामारी के चलते सरसों की मांग पर असर पड़ा था, लेकिन भाव ज्यादा नहीं टूटा. मई के बाद बॉयोफ्यूल ऑयल के रूप में क्रूड पॉम ऑयल के भाव चढ़े तो सरसों के भाव भी चढ़ने लगे. बता दें कि तेल के दाम आपस में लगभग जुड़े रहते हैं यानी कि एक तेल के दाम चढ़ते हैं तो अन्य तेलों के दाम भी बढ़ेंगे क्योंकि खपत सस्ते तेल की तरफ शिफ्ट होने लगती है और फिर उसके भाव भी बढ़ने लगते हैं. पिछले साल 1 जनवरी को सरसों के भाव 4700 के करीब थे जो इस समय 5600 के करीब चल रहे हैं.

इन कारणों से महंगा हो सकता है सरसों

  • सरसों की आवक शुरू हो चुकी है, लेकिन मांग के मुताबिक सप्लाई टाइट रहने का अनुमान है.
  • गर्मियों का सीजन इस साल 2021 में कुछ जल्दी ही शुरू हो गया है जिसके चलते यील्ड में गिरावट आ सकती है.
  • भारत में रमजान और शादियों का सीजन आने वाला है जिसके चलत सरसों की मांग में इजाफा हो सकता है.
  • सरसों के भाव को इससे भी मजबूती मिलेगी कि कनाडा में कनोला (सरसों का एक प्रकार) के स्टॉक 24 फीसदी कम रहकर 1.21 करोड़ टन रह गया है.
  • ब्राजील और अर्जेंटीना में ला निना इफेक्ट के चलते सोयाबीन की फसल प्रभावित हुई है.
  • इसके अलावा रूस और यूक्रेन में सूरजमुखी की फसल प्रभावित हुई और यूरोप में सूखे के चलते सरसों की बुवाई प्रभावित हुई. ऐसे में वैश्विक स्तर पर सरसों की मांग बनी रहने वाली है.

14% बढ़ा है सरसों का उत्पादन

इस बार सरसों के उत्पादन में 14 फीसदी की बढ़ोत्तरी रहने का अनुमान है. मिनिस्ट्री ऑफ एग्रीकल्चर एंड फार्मर्स वेलफेयर के सेकंड एडवांस्ड एस्टीमेट के मुताबिक इस बार 1.04 करोड़ टन सरसों का उत्पादन होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 91.2 लाख टन था. ट्रेड एस्टीमेट्स के मुताबिक इस बार फसल पिछले साल के 75 लाख टन के मुकाबले 85-90 लाख टन रह सकता है. 2020-21 रबी सत्र में सरसों की बुवाई एरिया 5 लाख हेक्टेअर बढ़कर 74 लाख हेक्टेअर हो गया जिसके चलते उत्पादन बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है.
(इनपुट: केडिया एडवायजरी रिपोर्ट और आईआईएफएल सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट-कमोडिटीज एंड रिसर्च- अनुज गुप्ता से बातचीत पर आधारित)

Get Business News in Hindi, latest India News in Hindi, and other breaking news on share market, investment scheme and much more on Financial Express Hindi. Like us on Facebook, Follow us on Twitter for latest financial news and share market updates.

  1. बिज़नस न्यूज़
  2. कारोबार बाजार
  3. Mustard Prices: सरसों और बिगाड़ेगा रसोई का बजट, इन वजहों से भाव में तेजी आने का अनुमान

Go to Top