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ONGC के सबसे अहम फील्ड को निजी करने के प्रस्ताव पर मोदी सरकार पर निशाना, घाटे वाली कंपनी खरीदने और अधिक डिविडेंड ने पहले ही बिगाड़ी सेहत

पूर्व नौकरशाह द्वारा पीएम मोदी को लिखे पत्र के मुताबिक ONGC को कर्ज में डूबी कंपनी को खरीदने और मुनाफे का बड़ा हिस्सा डिविडेंड के रूप में दिए से इसकी वित्तीय सेहत पर असर पड़ा है.

November 25, 2021 11:24 AM
Ministry proposal to give Mumbai High field to private sector systematic weakening of ONGC says E A S Sarmaपूर्व नौकरशाह के मुताबिक विनिवेश नीति का तरीका ये है कि पीएसयू को पहले कमजोर किया जाए और फिर इसे निजी हाथों में सौंप दिया जाए.

तेल मंत्रालय ने पिछले महीने ओएनजीसी (ONGC) के मुंबई हाई व बेसिन के तेल व गैस उत्पादक फील्ड को निजी हाथों में सौंपने का प्रस्ताव रखा था. अब इस पर पूर्व नौकरशाह ईएएस शर्मा ने पीएम मोदी (PM Modi) को पत्र लिखा है और इस फैसले को सरकारी कंपनी ओएनजीसी को सिस्टमैटिक तरीके से कमजोरी करने की कोशिश कहा है. अपने पत्र में उन्होंने कहा कि ओएनजीसी को कमजोर करने की बजाय इसकी क्षमता को मजबूत करने की रणनीति अपनानी चाहिए. उन्होंने कहा कि ओएनजीसी को कार्य करने की पर्याप्त स्वायत्ता दी जानी चाहिए बजाय इसे कर्ज में डूबी कंपनियों या मुनाफे का बड़ा हिस्सा डिविडेंड के रूप में देने से.

पेट्रोलियम मिनिस्ट्री ने 22 नवंबर को स्पष्टीकरण दिया था कि ओएनजीसी को वर्तमान फील्ड से उत्पादन को बढ़ाना है, चाहे यह तकनीक के जरिए हो या पारदर्शी तरीके से निजी कंपनियों को हिस्सेदारी देकर किया जाए. मंत्रालय ने कहा कि सरकार तेल व गैस के घरेलू उत्पादन को एक्सपोनेंशियली बढाना चाहती है और लीडिंग संस्थान के रूप में ओएनजीसी की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है. बता दें कि ओएनजीसी के प्रमुख फील्ड को निजी हाथों में सौंपने के प्रस्ताव पर ओएनजीसी यूनियनों ने भी विरोध जताया है.

विनिवेश नीति पर उठाए सवाल

नाथ ने 23 नवंबर को पीएम मोदी को लिखे पत्र में शिकायत की कि हाइड्रोकॉर्बन के मामले में यह भारत की आत्म-निर्भरता को कम करने की कोशिश होगी. उन्होंने निशाना साधा है कि विनिवेश नीति का तरीका ये है कि पीएसयू को पहले कमजोर किया जाए और फिर इसे निजी हाथों में सौंप दिया जाए. जिस फील्ड को निजी हाथों में सौंपने का प्रस्ताव है, उससे ओएनजीसी का करीब 63 फीसदी हाइड्रोकॉर्बन उत्पादन होता है और देश का 40 फीसदी से अधिक हाइड्रोकॉर्बन इसी फील्ड से उत्पादित होता है. नाथ ने कहा कि उत्पादन बढ़ाने के लिए विदेशी कंपनियों को हिस्सेदारी देने की बजाय तकनीकी साझेदारी की जा सकती है.

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इन फैसलों से ओएनजीसी के हित हुए प्रभावित

नाथ ने ओएनजीसी को कर्ज में डूबी कंपनियों को जबरन खरीदने और अधिक डिविडेंड देने के लिए बाध्य करने पर निशाना साधा है. पत्र के मुताबिक वर्ष 2016 में ओएनजीसी को भारी कर्ज में डूबी हुई गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के केजी ब्लॉक एसेट्स में 80 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए बाध्य किया गया. इसके अलावा वर्ष 2014 से वर्ष 2021 के बीच ओएनजीसी को अपने 27 फीसदी शुद्ध मुनाफे को डिविडेंड के रूप में घोषित करने के लिए बाध्य किया गया. इन सबके चलते कंपनी की वित्तीय सेहत पर बुरा असर पड़ा और 2014–2021 के बीच पूंजी निवेश नेट प्रॉफिट के 24 फीसदी तक गिर गया. इसके अलावा सरकार ने ओएनजीसी के 149 खोजे गए ऑयल फील्ड को निजी कंपनियों को नीलामी किए जाने का ऐलान किया था जिससे इस सरकारी कंपनी के हित प्रभावित होंगे.

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60% हिस्सेदारी विदेशी कंपनी को देने का प्रस्ताव

मिनिस्ट्री ऑफ पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस के एडीशनल सेक्रेटरी (एक्सप्लोरेशन) अमर नाथ ने पिछले महीने (28 अक्टूबर) ओएनजीसी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर सुभाष कुमार को पत्र लिखा था. अमर नाथ ने कुमार को पत्र में लिखा था कि ओएनजीसी के मुबंई हाई एंड बेसिन एंड सैटेलाइट (B&S) ऑफशोर एसेट्स से उत्पादकता कम हुई है तो ऐसे में इंटरनेशनल पार्टनर्स को बुलाना चाहिए और उन्हें 60 फीसदी हिस्सेदारी देनी चाहिए. इसके अलावा मंत्रालय ने फील्ड्स में ऑपरेटरशिप में भी निजी कंपनी को हिस्सेदारी देने को कहा है.

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