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काम दोबारा शुरू करने के लिए मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को फॉलो करनी होंगी ये गाइडलाइंस, गृह मंत्रालय का आदेश

गृह मंत्रालय ने लॉकडाउन के बाद मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज खोलने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं.

May 10, 2020 1:05 PM
Ministry of Home Affairs (MHA) issues guidelines for restarting manufacturing industries after lockdownImage: PTI

विशाखापटनम में एक फैक्ट्री में गैस रिसाव की घटना के बाद गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) ने लॉकडाउन के बाद मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज खोलने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं. इन ​निर्देशों में वर्कर्स के मामले में सुरक्षा उपायों को अपनाते हुए काम को कैसे जारी किया जाए यह तो शामिल है ही, साथ ही कुछ अन्य निर्देश भी शामिल हैं जो मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में किसी अनहोनी से बचने के लिए हैं. मंत्रालय ने साफ कहा है कि शुरुआती दिनों में उच्च उत्पादन क्षमता की इच्छा मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां न रखें. गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशा निर्देशों में से कुछ इस तरह हैं-

वर्कर्स के लिए गाइडलाइंस

  • फैक्ट्री में 24 घंटे सैनिटाइजेशन की व्यवस्था हो.
  • हर दो-तीन घंटे में सैनिटाइजेशन किया जाए.
  • खास कर उस जगह का, जहां ज्यादा लोग इकट्ठा होते हैं, जैसे लंच रूम, कॉमन टेबल्स आदि.
  • कामगारों और मजदूरों का का दिन भर में दो बार टेम्प्रेचर चेक किया जाए.
  • जिनमें कोविड19 के लक्षण हों, वे कर्मचारी काम पर ना आएं.
  • सभी फैक्ट्रियों और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में हैंड सैनिटाइजर्स, मास्क और ग्लव्स का इंतजाम हो.
  • तैयार सामान को आइसोलेट और सैनिटाइज किया जाए.
  • फैक्ट्री में लाए जाने वाले बॉक्सेज को स्टरलाइज किया जाए.
  • शिफ्ट्स में माल की डिलीवरी हो.
  • वर्क फ्लोर और डाइनिंग एरिया में फिजिकल बैरियर्स लगाए जाएं ताकि फिजिकल डिस्टेंसिंग फॉलो हो सके.
  • मास्क और PPEs के अलावा फेस प्रोटेक्शन शील्ड भी उपलब्ध कराई जाएं.
  • फुल प्रॉडक्शन कैपेसिटी के साथ 24 घंटे काम करने वाली फैक्ट्रियां शिफ्ट्स के बीच में एक घंटे का गैप दें. इसमें लगातार ऑपरेशन की जरूरत वाली फैक्ट्री/प्लांट शामिल नहीं हैं.
  • मैने​जर लेवल और एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ एक​ शिफ्ट में 33 फीसदी क्षमता के साथ काम करे.
  • जहां तक संभव हो टूल्स और वर्कस्टेशन की शेयरिंग न हो.
  • अगर फैक्ट्री में कोई COVID19 पॉजिटिव केस मिलता है तो वर्कर्स को आइसोलेट करने की व्यवस्था होनी चाहिए.

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कुछ अन्य गाइडलाइंस

1. मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को रिस्टार्ट करते हुए पहले सप्ताह को ट्रायल या टेस्ट की अवधि मानें, सुरक्षा व प्रोटोकॉल्स सुनिश्चित करें और उच्च उत्पादन लक्ष्यों को प्राप्त करने की कोशिश न करें.
2. जोखिम कम करने के लिए इक्विपमेंट्स को सैनिटाइज किया जाए.
3. सभी इक्विपमेंट्स का इंस्पेक्शन हो. खुले तारों, वाइब्रेशंस, आवाज या दुर्गंध, लीकेज, धुंआ आदि संकेतों पर तुरंत ध्यान दिया जाए. इन्हें तुरंत ठीक किया जाए या फिर जरूरी हो तो यूनिट बंद कर दी जाए.
4. खुले हुए स्टोरेज वेसल्स/कंटेनर्स/बैग्स आदि को चेक किया जाए कि कहीं ऑक्सीडेशन/केमिकल रिएक्शन/जंग/रूटिंग आदि का इश्यू तो नहीं है.
5. स्टोरेज में रखे HAZMAT केमिकल्स को इस्तेमाल करने से पहले उसकी केमिकल स्टेबिलिटी की जांच जरूर करें.
6. सप्लाई पाइपलाइंस/वॉल्व/कन्वेयर बेल्ट्स आदि की जांच करें कि डैमेज इत्यादि तो नहीं है.
7. पूरी यूनिट का सेफ्टी ऑडिट करें.

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