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Mentha Oil: मेंथा ऑयल टूटकर 943 रु पर, क्या निचले स्तरों से करनी चाहिए खरीददारी

Mentha Oil Price Today, Mentha Oil Rate in India: सोमवार को मेंथा में गिरावट है.

November 9, 2020 1:08 PM
Mentha Oil PriceMentha Oil Price Today: सोमवार को मेंथा में गिरावट है.

Mentha Oil Rate Today: मेंथा ऑयल में 2 दिनों से फिर गिरावट देखने को मिल रही है. मेंथा आज 9 रुपये के करीब कमजोर होकर 943 रुपये प्रति किलो के भाव पर आ गया है. इसके पहले शुक्रवार को मेंथा 0.29 फीसदी की गिरावट के साथ 952.3 रुपये प्रति किलो के भाव पर सेटल हुआ था. इसके पहले गुरूवार को मेंथा में आधे फीसदी के करीब तेजी रही और यह 955.1 रुपये के आस पास बंद हुआ था. नवंबर में मेंथा 940 से 955 रुपये के दायरे में घूम रहा है. मेंथा के सेंटीमेंट अभी कमजेार हैं, इसलिए अगर तेजी आ भी रही है तो मुनाफा वसूली हो जा रही है. हालांकि आने वाले दिनों में सर्दियां बढ़ने पर मेंथा की इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ने की उम्मीद है. ऐसे में कुछ और गिरावट आए तो खरीददारी की जा सकती है. जनवरी में उम्मीद है कि मेंथा 1000 रुपये का भाव पार कर सकता है.

अभी भी सेंटीमेंट में सुधार नहीं

केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि कोरोना वायरस की वजह से मेंथा के सेंटीमेंट जो बिगड़ा है, वह अभी पटरी पर नहीं आ पाया है. फार्मा, कास्मेटिक और अन्य इंडस्ट्री से डिमांड पहले की तरह नहीं है. लॉकडाउन में परफ्यूम की डिमांड कमजोर हुई है, जिसमें मेंथा का इस्तेमाल होता है. हालांकि आने वाले महीनों में एक बार फिर फार्मा, कास्मेटिक और टॉयलेटरीज इंडस्ट्री से मांग बढ़ने की उम्मीद है. आज की बात करें तो मेंथा में अगर गिरावट बढ़ती है तो 940 रुपये के आस पास अगले 3 से 4 सेशन में 960 रुपये का लक्ष्य बनाकर खरीददारी की जा सकती है. अभी मेंथा को 954.4 रुपये पर रेजिस्टेंस है. यह भाव टूटता है तो मेंथा 960 रुपये तक पहुंच सकता है.

मेंथा का कहां होता है इस्तेमाल

मेंथा ऑयल का इस्तेमाल फार्मा इंडस्ट्री, कास्मेटिक इंडस्ट्री, एफएमसीजी सेक्टर के साथ ही कंफेक्शनरी उत्पादों में सबसे ज्यादा होता है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा मेंथा ऑयल उत्पादक और निर्यातक है. मेंथा ऑयल की सबसे ज्यादा पैदावार यूपी में होती है. देश में होने वाले कुल मेंथा ऑयल के उत्पादन में यूपी की हिस्सेदारी करीब 80 फीसदी है.

पिछले सीजन में मेंथा ऑयल का उत्पादन काफी ज्यादा रहा था. बाजार सूत्रों के अनुसार इस साल पैदावार 40 फीसदी ज्यादा रहकर 52,000-56,000 टन के बीच रह सकती है. इस वजह से मेंथा की उपलब्धता बहुत ज्यादा रही और कीमतों में ज्यादा तेजी नहीं आ सकी. देश में पैदा होने वाला लगभग 75 फीसदी मेंथा ऑयल का निर्यात किया जाता है. इसलिए घरेलू से ज्यादा विदेशी मांग कीमतों को तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है.

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