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मक्का अगले 2-3 महीने में छू सकता है 2500 रुपये/क्विंटल का भाव, सरकार का अनुमान- बेहतर रहेगा उत्पादन

इस साल अब तक मक्के के भाव में 31.70 फीसदी की तेजी आई है और यह 455 रुपये तक चढ़ चुका है.

May 5, 2019 8:22 AM
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मक्के (Maize) में इस साल तेजी दिखाई दे रही है. अब तक मक्के के भाव में 31.70 फीसदी का उछाल आ चुका है. यह 455 रुपये प्रति क्विंटल तक चढ़ चुका है. पिछले सत्र में कम स्टॉक और उत्पादन के चलते मक्के की आपूर्ति प्रभावित हो रही है. एक्सपर्ट मान रहे हैं कि आगे भी भाव में तेजी बनी रह सकती है. अगले दो से तीन महीने में मक्के का भाव 2500 रुपये ​क्विंटल तक पहुंच सकता है.

केडिया कमोडिटी के प्रेसिडेंट अजय केडिया का अनुमान है कि मक्के की कीमत जल्द ही 2275 रुपये प्रति 100 किग्रा के स्तर को पार कर सकती है. वहीं अगले दो-तीन महीनों के भीतर ही मक्का 2500 रुपये प्रति क्विंटल के भी रिकॉर्ड स्तर को पार कर सकता है. केडिया का कहना है कि पिछले सत्र के कम स्टॉक और कम उत्पादन की वजह से इसकी आपूर्ति प्रभावित हो रही है जिसके कारण मक्के के भाव में रिकॉर्ड तेजी का अनुमान है.

कर्नाटक से कम आवक के कारण बढ़े Maize के भाव

दो महीने से भी कम समय पूर्व मक्के की कीमत रिकॉर्ड 2300 रुपये प्रति 100 किग्रा के स्तर को छुआ था. इसकी मुख्य वजह खरीफ आउटपुट का कम और इसकी तुलना में फीड सेक्टर से अधिक डिमांड का होना था. आमतौर पर इस पीरियड में कर्नाटक से पर्याप्त मात्रा में इस खरीफ फसल की आवक रहती है लेकिन इस बार स्टॉक्स नहीं उपलब्ध हो पाया जिसके कारण कीमतों में तेजी आई. कीटों ने भी कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में मक्के की पैदावार को भारी नुकसान पहुंचाया.

सरकार के दावे के विपरीत ट्रेड ऑफिसियल का अनुमान

कृषि मंत्रालय (फार्म मिनिस्ट्री) के सेंकड एडवांस्ड एस्टीमेट में 2018-19 (जुलाई-जून) में 2.78 करोड़ टन मक्के के उत्पादन का अनुमान लगाया गया है. सालाना आधार पर यह 2 फीसदी अधिक है. हालांकि ट्रेड ऑफिसियल के मुताबिक वास्तविक उत्पादन इससे बहुत कम हो सकता है. ट्रेड ऑफिसियल के मुताबिक 2018-19 में 2 करोड़ टन मक्का का उत्पादन हो सकता है. बाजार के जानकारों का कहना है कि 2018-19 में खराब मानसून और कर्नाटक व महाराष्ट्र जैसे प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों में सूखे के कारण मक्के के उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है.

गेहूं के प्रति आकर्षण से बिहार में उत्पादन प्रभावित

रबी सीजन में मक्के के सबसे बड़े उत्पादक राज्य बिहार में भी 5 फीसदी कम मक्का उत्पादित हो सकता है. बिहार में मक्का का उत्पादन कम होने की मुख्य वजह गेहूं है. इस सत्र में किसानों ने मक्के की बजाय गेहूं की खेतो को अधिक फायदेमंद माना क्योंकि पिछले सत्र में गेहूं पर बेहतर रिटर्न मिला था.

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