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SIP या एकमुश्त निवेश? म्यूचुअल फंड में शुरुआत के लिए क्या है बेहतर विकल्प

Mutual Fund Investment: निवेश से पहले अपनी जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन जरूर कर लेना चाहिए.

March 13, 2021 9:46 AM
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Lump sum investment or SIP: भारत में नई पीढ़ी या कहें मिलेनियल्स अपने सपने को पूरा करने के लिए शुरुआती दिनों में निवेश को लेकर उत्साहित है. इंटरनेट के विस्तार और मार्केट के बारे में जागरूकता की वजह से कैपिटल मार्केट नए निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. अधिकांश भारतीय म्यूचुअल फंड को शुरुआती निवेश का जरिया बना रहे हैं. इसमें वह सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) और एकमुश्त दोनों तरह से निवेश कर रहे हैं. बावजूद इसके उन्हें एक बेहतर पोर्टफोलियो के लिए उचित परामर्श की जरूरत है. यदि निवेशक अपने म्यूचुअल फंड निवेश विकल्पों के बारे में निश्चित नहीं है, तो बाजार में मौजूद विकल्पों के चलते निर्णय लेना मुश्किल हो सकता है.

नए और शुरुआती निवेशकों के लिए हमेशा से एक सवाल रहता है कि निवेश की शुरुआत किस टूल से करना चाहिए. कई निवेशकों में भ्रम रहता है कि एकमुश्त निवेश करना बेहतर है या एसआईपी के विकल्प को चुनना? हकीकत यह है कि दोनों कई लक्ष्यों को पूरा करते हैं. इसलिए लक्ष्यों को ध्यान में रखकर ही निवेश के विकल्प का फैसला करना चाहिए.

किसके लिए एकमुश्त निवेश बेहतर?

ऐसे निवेशक जो मंथली, तिमाही, छमाही या सालाना कंट्रीब्यूशन को लेकर निश्चित नहीं होते हैं, वे अमूमन एकमुश्त निवेश का रास्ता चुनते हैं. इस तरह के निवेश के लिए बड़ी रकम की जरूरत होती है, जिससे कि बाजार से रिटर्न भी अच्छा मिल सके.

एकमुश्त विकल्प आमतौर पर ऐसे निवेशक चुनते हैं जो जोखिम से बचना चाहते हैं. क्योंकि उनका मानना है कि बाजार से उन्हें अधिक से अधिक रिटर्न मिलेगा. सिस्टम की डायनेमिक्स को समझने के लिए एक स्तर की जानकारी होनी चाहिए, क्योंकि शेयर बाजार जब गिरावट का दौर रहने पर लोग अपने एकमुश्त पैसे को म्यूचुअल फंड में डालना पसंद करते हैं. यह उन निवेशकों के लिए एक आदर्श विकल्प माना जाता है जो हाई लेकिन अनियमित आय प्राप्त करते हैं. बिजनेस और कंसल्टेंसी मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स को अकसर फीस और कॉन्ट्रैक्ट के मामले में एकबार में ही भुगतान मिल जाता है. जबकि, एसआईपी में ऐसा नहीं है. नतीजतन, इस तरह के अनियमित साइकिल वालों के लिए एकमुश्त निवेश अधिक उपयुक्त हैं.

SIP क्यों चुनें?

एसआईपी में मामले में इंक्रीमेंटल इन्वेस्टमेंट प्रॉसेस चलता है, जो निवेशक की एवरेज कैपेसिटी को ध्यान में रखता है. मासिक आय वाले व्यक्ति नियमित रूप से निर्धारित अवधि में एसआईपी में योगदान करने का निर्णय ले सकते हैं. यह 500 रुपये की बेस राशि से शुरू होकर दैनिक, साप्ताहिक और मासिक आधार पर हजारों रुपये तक हो सकती है. यह प्रक्रिया एक बैंकिंग सर्विस चुनने की तरह है, जहां लोग जानते हैं कि वह सर्विस में कितना योगदान दे रहे हैं. वे पहले से तय अवधि के लिए स्कीम से जुड़ते हैं.

पहली बार निवेशकों में ज्यादातर युवा पेशेवर और ग्रेजुएट करके आए छात्र रहते हैं. उनके लिए एसआईपी एक बढ़िया विकल्प है. उनके पास अपने खर्चे काफी बेसिक स्तर के रहते हैं और निवेश कम रहता है. इसके अलावा वे बाजार में उतार-चढ़ाव की चिंता किए बिना निवेश के लिए एक टारगेट-ओरिएंटेड टाइमफ्रेम निर्धारित कर सकते हैं.

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निवेश से पहले किन बातों का रखें ध्यान

  • निवेशक को लक्ष्य निर्धारित कर निवेश की शुरुआत करनी चाहिए. उदाहरण के लिए, यह इस बात पर निर्भर करता है कि निवेशक कितनी रकम निवेश कर सकता है, उसकी मंथली इनकम कैसी है, उसकी जोखिम उठाने की क्षमता कितनी है और बाजार के डायनामिक्स को समझने में वह कितना समक्ष है.
  • एक स्थिर आय वाले व्यक्तियों के लिए यह माना जाता है कि बाजार के उतार-चढ़ाव में एसआईपी एक अहम रोल अदा करता है. एक निवेशक के तौर पर थोड़ा ध्यान देने की आवश्यकता होती है. रेग्युलर इनकम वाले शुरुआती निवेशकों के लिएि यह बेहतर विकल्प है. क्योंकि वे इसे कभी भी बंद करने का विकल्प चुन सकते हैं.
  • इसके अलावा, बैंक अपने ग्राहकों को डिजिटल केवाईसी और अन्य माध्यमों से प्रक्रिया को तेज करने में मदद कर रहे हैं, और मोबाइल ऐप पर आपकी शुरुआत के जरिए आपके द्वारा चुनी गई योजना के आधार पर व्यवस्थित रूप से निवेश संभव है.
  • दूसरी ओर, बाजार में चढ़ाव के दौरान एकमुश्त निवेश भविष्य के रिटर्न को अच्छा खासा प्रभावित कर सकता है और जोखिम फैक्टर प्रमुख भूमिका निभाता है. चाहे वह एसआईपी हो या एकमुश्त पैसा हो, पोर्टफोलियो में विविधता रिस्क को कम करने में मददगार होती है.

(Article: ज्योति रॉय, डीवीपी, इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट, एंजेल ब्रोकिंग लिमिटेड) 

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