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Low या Very High Risk: म्यूचुअल फंड में अब 6 तरह के होंगे रिस्क, हर निवेशक के लिए जानना है जरूरी

Very High Risk: म्यूचुअल फंड निवेशकों को अब इसमें मौजूद लो से बेरी हाई रिस्क तक को पहचानना आसान हो जाएगा.

October 6, 2020 3:53 PM
mutual fundVery High Risk: म्यूचुअल फंड निवेशकों को अब इसमें मौजूद लो से बेरी हाई रिस्क तक को पहचानना आसान हो जाएगा.

Very High Risk: पिछले कुछ साल में म्यूचुअल फंड के पति निवेशकों का आकर्षण बढ़ा है. म्यूचुअल फंड स्कीम में लगातार निवेश बढ़ रहा है. लेकिन कई बार निवेशक इसमें मौजूद जोखिम को नहीं पहचान पाते हैं और नुकसान उठा बैठते हैं. निवेशक म्यूचुअल फंड के जोखिम को ठीक तरह से पहचान सकें इसके लिए बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने बाजार नियामक सेबी ने निवेशकों को चेतावनी देने के लिए “very high risk” कटेगिरी की शुरुआत की है.

सेबी की ओर से जारी सर्कुलर के मुताबिक सभी म्यूचुअल फंड्स को अब रिस्क-ओ-मीटर में 5 के बदले 6 संकेत दिखाने होंगे. सेबी के सर्कुलर के मुताबिक अब एक संकेत “very high risk” का भी होगा. नई स्कीम के साथ साथ पुरानी स्कीमों के लिए भी ऐसा करना जरूरी होगा. बता दें कि अभी तक रिस्क को मापने के लिए मौजूदा 5 श्रेणियां हैं. लो, मॉडरेटरी लो, मॉडरेट, मॉडेटरी हाई और हाई. अब इसमें वेरी हाई भी जोड़ा जाएगा.

1 जनवरी से लागू होगा

सभी म्यूचुअल फंड्स के लिए हर महीने इस रिस्क-ओ-मीटर की समीक्षा करनी होगी. बदलाव की जानकारी ई-मेल या SMS के ज़रिए सभी यूनिटहोल्डर्स को देना होगा. पोर्टफोलियो का ब्योरा भी महीना पूरा होने के 10 दिन के भीतर अपनी और AMFI वेबसाइट पर बताना होगा. AMFI म्यूचुअल फंड्स का संगठन है. साथ ही कारोबारी साल खत्म होने के बाद भी इसका ब्योरा शेयर करना होगा. जिसमें ये बताना होगा कि कारोबारी साल की शुरुआत में क्या था और कारोबारी साल के अंत में रिस्क-ओ-मीटर में क्या बदलाव हुआ और कितनी बार हुआ.

डेट कटेगिरी में क्या होगा

रिस्क-ओ-मीटर में जोखिम किस आधार पर तय होंगे सेबी ने इस बारे में जानकारी दी है. अगर कोई डेट सिक्योरिटी है तो उसके लिए क्रेडिट रिस्क वैल्यू, इंटरेस्ट रेट रिस्क वैल्यू और लिक्विडिटी रिस्क वैल्यू अहम पैमाना होगा. क्रेडिट रिस्क में क्रेडिट रेटिंग के आधार पर जोखिम तय होगा. जबकि इंटरेस्ट रेट रिस्क के लिए पोर्टफोलियो का मैकाले ड्यूरेशन को आधार बनाया जाएगा. मैकाले ड्यूरेशन से किसी बॉन्ड के कैश फ्लो की मेच्योरिटी निकाली जाती है. जबकि लिक्विडिटी रिस्क निकालने के लिए क्रेडिट रेटिंग के अलावा लिस्टिंग की स्थिति और डेट के स्ट्रक्चर को आधार बनाया जाएगा.

इक्विटी में क्या होगा

इसी तरह इक्विटी सेगमेंट में मार्केट कैपिटलाइजेशन, वोलाटिलिटी और इंपैक्ट कॉस्ट को पैमाना बनाया गया है. मार्केट कैपिटलाइजेशन डेटा AMFI की छमाही रिपोर्ट से तय होगी. जबकि वोलाटिलिटी के लिए सिक्योरिटी की कीमत में रोजाना उतार-चढ़ाव आधार होगा. हालांकि इसके लिए दो साल के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा. जबकि इंपैक्ट कॉस्ट इससे तय होगा कि शेयर को बेचने और खरीदने की लागत कितनी आती है. ये शेयर की लिक्विटी पर आधारित होती है.

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