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हाइब्रिड म्यूचुअल फंड: कम रिस्क के साथ मिलेगा बेहतर रिटर्न, किसे करना चाहिए निवेश?

Hybrid Mutual Funds: म्यूचुअल फंडों की अलग अलग कैटेगिरी में एक हाइब्रिड फंड भी है. ऐसी स्कीमें इक्विटी और डेट दोनों तरह के एसेट क्‍लास में निवेश करती हैं.

Updated: May 19, 2021 8:45 AM
Hybrid Mutual FundsHybrid Mutual Funds: म्यूचुअल फंडों की अलग अलग कैटेगिरी में एक हाइब्रिड फंड भी है. ऐसी स्कीमें इक्विटी और डेट दोनों तरह के एसेट क्‍लास में निवेश करती हैं.

Hybrid Mutual Funds: म्यूचुअल फंडों की अलग अलग कैटेगिरी में एक हाइब्रिड फंड भी है. ऐसी स्कीमें इक्विटी और डेट दोनों तरह के एसेट क्‍लास में निवेश करती हैं. अगर आप कन्जर्वेटिव इन्वेस्टर हैं यानी बाजार का जोखिम नहीं लेना चाहते हैं तो आपके लिए हाइब्रिड म्यूचुअल फंड अच्छे विकल्प हैं. इनमें जहां दूसरे कैटेगिरी के मुकाबले रिस्क कम है, वहीं रिटर्न भी बेहतर मिल रहा है. पिछले 3 से 5 साल के दौरान कई ऐसे फंड हैं, जिन्होंने डबल डिजिट में यानी 10 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया है. एक्सपर्ट का कहना है कि कोविड 19 संकट में अगर बाजार में अनिश्चितता को लेकर निवेशक कन्फ्यूज हैं तो, हाइब्रिड फंड में जोखिम से सुरक्षा मिल सकती है.

बेहतर मिल रहा है रिटर्न

इनमें भी अलग अलग स्कीम हैं. एग्रेसिव हाइब्रिड, कंजर्वेटिव हाइब्रिड, बैलेंस्ड हाइब्रिड, डायनेमिक एसेट एलोकेशन या बैलेंस्ड एडवांटेज, मल्टी एसेट एलोकेशन, आर्बिट्राज और इक्विटी सेविंग स्कीम इनमें शामिल हैं. बीते 5 साल की बात करें तो एग्रेसिव हाइब्रिड फंडों का औसत रिटर्न 10.50 फीसदी रहा है. बैलेंस्ड हाइब्रिड सेग्मेंट का औसत रिटर्न 5 साल में करीब 8 फीसदी रहा है. कंजर्वेटिव हाइब्रिड में 5 साल का औसत रिटर्न 7 फीसदी रहा है. हाइब्रिड इक्विटी सेविंग में 5 साल का औसत रिटर्न 7 फीसदी से ज्यादा रहा है.

हाइब्रिड फंडों की खासियत

हाइब्रिड म्यूचुअल फंड एक से अधिक एसेट क्लास में निवेश करते हैं. इनमें इक्विटी और डेट एसेट शामिल हैं. कई बार ये स्कीमें सोने में भी पैसा लगाती हैं. यानी एक ही प्रोडक्ट में इक्विटी, डेट और सोने में पैसा लगाने का मौका मिलता है. इस तरह से इनका निवेश काफी डायवर्सिफाइड होता है. इसका फायदा यह है कि अगर इक्विटी में रिटर्न बिगड़ता है तो डेट या सोने का रिटर्न ओवरआल रिटर्न बैलेंस कर सकता है. उसी तरह से डेट या सोने में रिटर्न कमजोर पड़े तो इक्विटी का रिटर्न इसे बैलेंस कर देता है.

विदेशी बाजारों में भी निवेश का मौका

हाल ही में पीजीआईएम इंडिया म्यूचुअल फंड ने निवेशकों को बेहतर रिटर्न के लिए इंटरनेशनल इक्विटी में निवेश शुरू किया है. पीजीआईएम इंडिया हाइब्रिड इक्विटी फंड ने पीजीआईएम जेनिसन ग्लोबल इक्विटी अपॉर्च्युनिटी फंड के माध्यम से इंटरनेशनल इक्विटीज में निवेश करना शुरू किया है. फंड 3 अलग-अलग एसेट क्लास जैसे डोमेस्टिक इक्विटी, डोमेस्टिक डेट और इंटरनेशनल इक्विटीज में निवेश करता है, जिससे पोर्टफोलियो की अस्थिरता को कम करने में मदद मिलती है.

इससे फंड उन निवेशकों के लिए आकर्षक हो जाता है जो स्टडी कंपाउंडर्स और वैश्विक दिग्गज कंपनियों में निवेश करके इन्वेस्टमेंट ग्रोथ की संभावनाएं तलाशते हैं. वहीं उनके लिए भी जो फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट और हाई क्वालिटी लो ड्यूरेशन निवेश से से पोर्टफोलियो में स्थिरता चाहते हैं.

किसे करना चाहिए निवेश

एसेट एलोकेशन और डायवर्सिफिकेशन पर फोकस कर म्यूचुअल फंड की ये स्कीमें तमाम एसेट क्लास में निवेश करती हैं. इनमें वे निवेशक भी पैसा लगा सकते हैं जो न के बराबर जोखिम ले सकते हैं. थोड़ा जोखिम लेने की क्षमता रखने वालों के लिए भी ये सही हैं. हालांकि एग्रसिव इन्वेस्टर्स भी इनमें पैसा लगा सकते हैं. अगर आप म्यूचुअल फंड के नए निवेशक हैं तो ये स्कीम बेहतर हो सकती है.

हाइब्रिड फंड की अलग-अलग ​कटेगिरी

एग्रेसिव हाइब्रिड फंड: म्यूचुअल फंड की इस कटेगिरी में 65 से 80 फीसदी निवेश इक्विटी में होता है. वहीं, 20 से 35 फीसदी निवेश डेट में किया जाता है.

बैलेंस्ड हाइब्रिड फंड और एग्रेसिव हाइब्रिड फंड: बैलेंस्ड हाइब्रिड फंड अपने कुल एसेट का करीब 40 से 60 फीसदी इक्विटी या डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हें. ये स्कीम आर्बिट्राज में निवेश नहीं कर सकती हैं.

डायनेमिक एलोकेशन या बैलेंस्ड एडवांटेज फंड: म्यूचुअल फंड की ये स्कीम कुल निवेश का 100 फीसदी इक्विटी या डेट में निवेश कर सकती है. यह अपने निवेश का प्रबंधन डायनेमिक तरीके से करती है.

मल्टी एसेट एलोकेशन फंड: म्यूचुअल फंड की इस कटेगिरी में इक्विटी, डेट और गोल्ड तीनों तरह के एसेट क्लास में निवेश किया जा सकता है. इसमें 65 फीसदी निवेश इक्विटी में, 20 से 25 फीसदी निवेश डेट में और 10 से 15 फीसदी निवेश गोल्ड में किया जाता है.

आर्बिट्राज फंड्स: इन्हें अपने कुल एसेट का कम से कम 65 फीसदी इक्विटी या इक्विटी से जुड़े साधनों में निवेश करना होता है.

इक्विटी सेविंग्स फंड्स: म्यूचुअल फंड की ये स्कीम इक्विटी, डेट और आर्ब्रिट्राज में निवेश करती है. कुल एसेट का कम से कम 65 फीसदी शेयरों में निवेश करना होगा. इसी तरह कम से कम 10 फीसदी निवेश डेट में करना होता है.

(नोट: यहां हमने हाइब्रिड म्यूचुअल फंड के बारे में जानकारी दी है. यह निवेश की सलाह नहीं है. बाजार के जोखिम को देखते हुए निवेश के पहले एक्सपर्ट की राय लें.)

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