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चीन से कारोबार समेट भारत आ रही है ये मोबाइल कंपनी, 800 करोड़ रुपये का करेगी निवेश

भारत में हाल में किए गए नीतिगत बदलावों के बाद कंपनी ने यह कदम उठाने का फैसला किया है.

May 16, 2020 11:04 AM
lava international to shift its business in India from china plans to invest 800 crore rupees in 5 yearsभारत में हाल में किए गए नीतिगत बदलावों के बाद कंपनी ने यह कदम उठाने का फैसला किया है.

मोबाइल उपकरण बनाने वाली घरेलू कंपनी लावा इंटरनेशनल ने शुक्रवार को कहा कि वह चीन से अपना कारोबार समेट कर भारत ला रही है. भारत में हाल में किए गए नीतिगत बदलावों के बाद कंपनी ने यह कदम उठाने का फैसला किया है. कंपनी ने अपने मोबाइल फोन डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने के लिये अगले पांच साल के दौरान 800 करोड़ रुपये निवेश की योजना बनाई है.

LAVA अब भारत से करेगी दुनिया में निर्यात

लावा इंटरनेशनल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक हरी ओम राय ने बताया, ‘‘उत्पाद डिजाइन के क्षेत्र में चीन में हमारे कम से कम 600 से 650 कर्मचारी हैं. हमने अब डिजाइनिंग का काम भारत में स्थानांतरित कर दिया है. भारत में हमारी बिक्री जरूरत को स्थानीय कारखाने से पूरा किया जा रहा है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम चीन के अपने कारखाने से कुछ मोबाइल फोनों का निर्यात दुनियाभर में करते रहे हैं, यह काम अब भारत से किया जाएगा.’’

लॉकडाउन में निर्यात मांग चीन से पूरा किया

लावा इंटरनेशनल के सीएमडी हरी ओम राय ने बताया कि भारत में लॉकडाउन अवधि के दौरान लावा ने अपनी निर्यात मांग को चीन से पूरा किया. राय ने कहा, ‘‘मेरा सपना है कि चीन को मोबाइल उपकरण निर्यात किए जाएं. भारतीय कंपनियां मोबाइल चार्जर पहले ही चीन को निर्यात कर रही हैं. उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना से हमारी स्थिति में सुधार आएगा. इसलिये अब पूरा कारोबार भारत से ही किया जाएगा.’’

भारत में 1000 अमेरिकी कंपनियां आएंगी!

भारत अमेरिकी कंपनियों को अपने यहां लाने की कोशिशें कर रहा है. सरकार ने अप्रैल में 1,000 से अधिक अमेरिकी मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों से संपर्क किया और उन्हें चीन से कारोबारी गतिविधियों को हटाकर भारत लाने का ऑफर दिया है. ये कंपनियां 550 से अधिक उत्पाद बनाती हैं. सरकार का मुख्य ध्यान मेडिकल इक्विपमेंट आपूर्तिकर्ता, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, टेक्सटाइल्स, लेदर और ऑटो पार्ट्स निर्माता कंपनियों को आकर्षित करने पर है. ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि चीन ठीक तरह से इस वायसर से नहीं निपटा है.

अमेरिका के आरोप से वैश्विक व्यापार पर और बुरा असर पड़ने की आशंका है. जापान ने कंपनियों को चीन से बाहर निकलने में मदद करने के लिए 2.2 अरब डॉलर की राशि निश्चित की है. वहीं, यूरोपीय संघ के सदस्य भी चीन के आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने की योजना पर काम कर रहे हैं.

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