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कोरोना संकट में कैसे कमाएं मुनाफा? लार्जकैप Vs मिडकैप Vs मल्टीकैप, क्या है बेस्ट विकल्प

कोरोना के दूसरी लहर की आशंका के चलते अभी भी निवेशकों के मन में डर बना हुआ है.

Updated: Jun 24, 2020 10:31 AM
large cap Vs mid cap Vs multi cap, what is assessment of stock market present, how should investors follow a strategy, what strategy in SIP, mutual fund, COVID-19 challenges, coronavirus crisis, market fallकोरोना के दूसरी लहर की आशंका के चलते अभी भी निवेशकों के मन में डर बना हुआ है.

कोरोनावायरस महामारी के चलते देशव्यापी लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है. लॉकडाउन में आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप होने से प्रोडक्शन और मांग दोनों निचले स्तरों पर आ गया. इसका नतीजा यह हुआ कि वित्तीय बाजारों पर भी इसका बड़ा असर पड़ा है. शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली, वहीं म्यूचूअल फंड में ज्यादातर स्कीमों में रिटर्न निगेटिव चला गया. हालांकि अप्रैल और मई की शुरूआत की तुलना में अब बाजार में कुछ रिकवरी आ रही है, लेकिन कोरोना के दूसरी लहर की आशंका के चलते अभी भी निवेशकों के मन में डर बना हुआ है. मौजूदा हालात में एक निवेशक के तौर पर क्या स्ट्रैटेजी होनी चाहिए, इसे लेकर बहुत से लोग कनफ्यूज हैं. इस बारे में फाइनेंशियल एक्सप्रेस हिंदी ऑनलाइन से UTI AMC लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एवं फंड मैनेजर-इक्विटी, अमित प्रेमचंदानी ने ईमेल इंटरैक्शन में बताया कि मौजूदा समय में निवेशकों को अपना ज्यादा निवेश डाइवर्सिफाई फंड में रखना चाहिए. पेश है इस बातचीत के प्रमुख अंश:

Q1- क्या बाजार के लिए कोरोना संकट अब डिस्काउंट हो रहा है. या कोरोना संकट की दूसरी लहर की आशंका से एक बार फिर बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने की आशंका है.

कोरोना संकट के चलते देशभर में लॉकडाउन करने से आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप पड़ गई थीं. इससे वित्तीय बाजारों की हालत खराब हुई. हालांकि ऐसा लग रहा है कि लॉकडाउन और आर्थिक गतिविधियां रुकने से जितना नुकसान होना था, हो चुका है. अब आर्थिक गतिविधियां दोबारा से शुरू हो रही हैं. अनलॉक एक चरण से दूसरे चरण में जा रहा है. ऐसे में जिन सेक्टर में फिर से काम शुरू हो गया है, वहीं बढ़ रही मांग से स्थितियां धीरे धीरे सामान्य हो रही हैं. आने वाले दिनों में आर्थिक डाटा कमजोर रहने की आशंका है, लेकिन बाजार सकाराज्त्मक ढंग से आगे बए़ेगा. हालांकि कोरोना वायरस की दूसरी लहर देखी जा रही है, जिसे लेकर बाजार में अभी निवेशकों में एक अनिश्चितता जैसा माहौल दिख रहा है.

Q2- मौजूदा समय में शेयर बाजार को लेकर क्या आकलन है? निवेशकों को किस तरह स्ट्रैटजी पर चलना चाहिए, स्टॉक स्पेशिफिक या सेक्टर स्पेशिफिक?

मौजूदा समय की बात करें तो अभी पूरी दुनिया में रिस्क फ्री रेट्स में कमी आई है, जो इक्विटी बाजारों के लिए सकारात्मक है. लेकिन इसी समय पर कैश फ्लो और ग्रोथ पर रिस्क बढ़ा है. डाइवर्सिफाई फंड के मुकाबले सेक्टर फंड में निवेश के विकल्प सीमित हैं. ऐसे में मौजूदा समय में निवेशकों को अपना ज्यादा निवेश डाइवर्सिफाई फंड में रखना चाहिए.

Q3- मिडकैप या स्माल कैप पर भरोसा करें या लॉर्जकैप के जरिए सुरक्षित विकल्प पर ध्यान दें.

P/BV पर अभी भी हम चीप टेरेटरी में हैं लेकिन FY21 अर्निंग के बेस पर वैल्युएशन निचले स्तरों से उपर चला गया है. निफ्टी में 21x ट्रेलिंग अर्निंग एएमपी पर ट्रेडिंग हो रही है. वहीं, मिडकैप 100 में 17.5x 12 एम फारवर्ड अर्निंग मार्जिनल डिस्काउंट पर है. वैल्युएशन में यह अंतर इतना बड़ा नहीं है कि हम किसी एक को दूसरे पर ज्यादा तरजीह दें. मल्टीकैप में यह फ्लेक्सिबिलिटी होती है कि वह बाजार के अवसरों के अनुसार पोर्टफोलियो को अलग अलग मार्केट कैप वाली कंपनियों में मूव कर सकते हैं. ऐसे में मिडकैप या स्मालकैप के मुकाबले मल्टी कैप बेहतर विकल्प है.

Q4- पिछले 1 महीने के दौरान इक्विटी और डेट सेग्मेंट में ज्यादातर कटेगिरी का रिटर्न पॉजिटिव दिख रहा है. ऐसे में क्या SIP को टॉपअप कराने का मौका है.

किसी निवेशक के लिए अपना अलोकेशन बदलने के लिए 1 महीने का समय बेहद कम हो सकता है. ऐसे में निवेशकों को एसेट अलोकेशन पर फोकस करना चाहिए. क्योंकि पिछले 1 साल में बाजार अर्थपूर्ण ढंग से करेक्ट हुआ है. हालांकि निवेश से पहले यह जरूर देखना चाहिए कि निवेशक बाजार के जोखिम को लेने के लिए कितना तैयार है.

Q5- कोरोनावायरस महामारी के दौर में सरकार के 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज जारी किया है. इसका म्यूचुअल फंड मार्केट और निवेशकों पर आप क्या असर देखते हैं?

सरकार ने कमजोर वर्ग और रूरल सेक्टर पर फोकस किया हैन नरेगा का पैसा बढ़ाया गया है. खेती के क्षेत्र में रिफॉर्म किए गए हैं. वहीं कोविड 19 से पहले सुस्त गति से चल रहे एमएसएमई सेक्टर के लिए गारंटी स्कीम के जरिए अप्रत्यक्ष ढंग से लिक्विडिटी सपोर्ट दिया गया है. इन उपायों से मौजूदा मंदी से निपटने में जरूर मदद मिलेगी. लेकिप इस राहत पैकेज का मांग पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि इसमें सप्लाई पर जोर ज्यादा दिया गया है.

Q6- कोरोना महामारी के बाद अर्थव्यवस्था, बाजार, निवेश और निवेशकों को लेकर आप किस तरह का बदलाव देखते हैं?

पिछले 3 महीने के ट्रेंड के आधार पर एक निश्चित राय बनाना मुश्किल है. पर यह तय है कि कोविड 19 के चलते सर्विसेज सेक्टर मसलन एविएशन सेक्टर पर ज्यादा चोट पहुंची हैं. इन्हें रिकवरी में ज्यादा समय लग सकता है. जबकि वे कंपनियां जिनके पास पर्याप्त कैया है, वे इस चुनौती से उबर जाएंगी. टेलिकॉम सेक्टर की बात करें तो लॉकडाउन में डाटा आदि की मांग बढ़ी है. वहीं लॉकडाउन के बाद आटो सेक्टर में तेज डिमांड आ सकती है. क्योंकि अभी आने वाले कई महीनों तक बहुत से लोग सोशल डिस्टेंसिंग के लिए निजी वाहन का उपयोग करेंगे.

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