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आॅल टाइम हाई से 4500 अंक टूटा सेंसेक्स, 23 लाख करोड़ घट गया मार्केट कैप; क्या हैं मुख्य वजह?

28 अगस्त को अपने आॅल टाइम हाई से सेंसेक्स करीब 4500 अंक टूट चुका है. इस दौरान बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों का मार्केट कैप भी करीब 23 लाख करोड़ रुपये कम हो गया है.

October 7, 2018 7:51 AM
stock market, history, sensex, nifty, BSE, NSE, market cap, domestic reason, global reason, सेंसेक्स क्यों टूटा 4500 अंक28 अगस्त को अपने आॅल टाइम हाई से सेंसेक्स करीब 4500 अंक टूट चुका है. इस दौरान बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों का मार्केट कैप भी करीब 23 लाख करोड़ रुपये कम हो गया है.

28 अगस्त को अपने आॅल टाइम हाई से सेंसेक्स करीब 4500 अंक टूट चुका है. इस दौरान बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों का मार्केट कैप भी करीब 23 लाख करोड़ रुपये कम हो गया है. वहीं, निफ्टी भी इस दौरान 1422 अंक टूट गया है. 28 अगस्त को सेंसेक्स 38896 के स्तर पर था और निफ्टी 11738 के स्तर पर, जो अब घटकर 34377 और 10316 के स्तर पर आ गए हैं. 28 अगस्त के बाद बीएसई पर करीब 400 शेयर भी अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर पर आ गए हैं. 28 अगस्त के बाद किन वजहों से आई गिरावट, पढ़ें डिटेल….

पिछले 3 ट्रेडिंग सेशन में हालत बिगड़ी

पिछले 3 ट्रेडिंग सेशन यानी बुधवार से शुक्रवार की बात करें तो सेंसेक्स करीब 2150 अंक टूटा है. बुधवार को इसमें 551 अंकों, गुरूवार को 806 अंकों और शुक्रवार को 792 अंकों की गिरावट दर्ज हुई. इस तीन दिनों में 1.72 लाख करोड़, 3.39 लाख करोड़ और 3.16 लाख करोड़ यानी 8.15 लाख करोड़ मार्केट कैप घट गया.

घरेलू और बाहरी कारण

बाजार में गिरावट के पीछे घरेलू और बाहरी दोनों कारण रहे हैं. महंगा क्रूड, IL&FS क्राइसिस, कमजोर रुपया, बैंक मर्जर, आरबीआई पॉलिसी, ट्रेड वार, बॉन्ड यील्ड, आॅयल मार्केटिंग कंपनियों में गिरावट, NBFCs कंसर्न, बाजार के महंगे वैल्युएशन को नजरअंदाज करना और आर्थिक आंकड़े जैसे फैक्टर मार्केट पर हावी रहे हैं.

कुछ प्रमुख कारण

IL&FS क्राइसिस : IL&FS इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को लोन देने वाली कपंनी है. कंपनी पर करीब 91 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है. 21 सितंबर को कंपनी तीसरी बार कमर्शियल पेपर पर ब्याज चुकाने में असफल रही. बस यहीं से मामला बिगड़ गया. जिसके बाद पैनिक बना कि NBFCs की रेटिंग घटाई जा सकती है. DSP म्यूचुअल फंड ने ज्यादा यील्ड पर दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) के कमर्शियल पेपर बेच दिए. बाजार पर डर हावी हो गया और फाइनेंशियल सेक्टर में तेज बिकवाली आ गई. 21 सितंबर को सेंसेक्स एक झटके में 1127 अंक टूट गया.

OMCs पर दबाव : सरकार ने इसी हफ्ते गुरूवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों को कम करने के लिए आॅयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को अपनी ओर से 1 रुपये प्रति लीटर दाम घटाने को कहा, जिसके बाद से मार्जिन को लेकर निगेटिव सेंटीमेंट बन गया. गुरूवार को सेंसेक्स में 806 अंकों की गिरावट आ गई. एक दिन में निवेशकों को 3.39 लाख करोड़ रुपये की चपत लगी.

रुपया और मॉनेटरी पॉलिसी : रुपये में लगातार आ रही गिरावट से मार्केट सेंटीमेंट बिगड़ा हुआ है. सरकार ने इसे लेकर सितंबर में आर्थक समीक्षा भी की थी, जिसमें कोई कारगर हल नहीं निकला. वहीं, आरबीआई ने भी ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी न करने का फैसला लेकर करंसी मार्केट को चौंका दिया. शुक्रवार को आरबीआई के फैसले के बाद रुपया 74 प्रति डॉलर का स्तर पार कर गया. जिसके बाद शेयर बाजार में भी करीब 950 अंकों की गिरावट दर्ज हुई. एक दिन में 3.16 लाख करोड़ मार्केट कैप घट गया.

बाजार का महंगा वैल्युएशन : 29 जनवरी को सेंसेक्स 26.4 गुना पर कारोबार कर रहा था, जबकि 10 साल का पीई 19.40 गुना और पांच साल का पीई 19.90 रहा है. बाजार ने इन बातों को नजरअंदाज किया, जिससे दबाव बढ़ा. हालांकि करेक्शन के बाद से वैल्यूएशन को लेकर रिस्क कुछ कम हुआ है.

ट्रेड वॉर, क्रूड : यूएस और चीन के बीच ट्रेड वार बढ़ने से जहां दुनियाभर के बाजारों पर दबाव है, वहीं, महंगे क्रूड ने सेंटीमेंट और खराब कर दिया है. ट्रेड वार की डर से विदेशी निवेशक सतर्क हैं. वहीं, क्रूड 85 से 86 डॉलर प्रति बैरल की रेंज में है. भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा क्रूड आयात करता है. ऐसे में क्रूड महंगा होने से न केवल आयातकों की तरफ से डॉलर की डिमांड बढ़ रही है बल्कि महंगाई भड़कने का भी खतरा बढ़ गया है.

बॉन्ड यील्ड में तेजी : 10 साल की बॉन्ड यील्ड करीब 9 फीसदी हो गई, जोकि नवंबर 2014 के बाद सबसे ज्यादा है. जब भी मैक्रोइकोनॉमिक इंडिकेटर्स कमजोर पड़ते हैं, बॉन्ड यील्ड बढ़ जाती है. तब निवेशक अपने जोखिम से बचने के लिए बॉन्ड से अधिक रिटर्न चाहते हैं.

(Inputs: BSE and NSE)

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